गोवा तट पर बनेगा तैरता हाइब्रिड पावरहाउस, समुद्र में ही तैयार होगी Green Hydrogen

Green Hydrogen

Green Hydrogen: गोवा। भारत अब समुद्री ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में एक नई तकनीकी छलांग लगाने की तैयारी में है। गोवा के तट पर एक ऐसा तैरता हुआ हाइब्रिड पावरहाउस विकसित किया जा रहा है, जो सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और समुद्री लहरों की शक्ति का उपयोग कर सालभर लगातार बिजली उत्पादन करने में सक्षम होगा। इस परियोजना के माध्यम से समुद्र के बीच ही ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम उठाया जा रहा है।

जानकारी के अनुसार यह लचीला (फ्लेक्सिबल) तैरता प्लेटफॉर्म इस तरह डिजाइन किया जा रहा है कि यह मानसून के दौरान आने वाले तेज तूफानों और ऊंची लहरों को भी आसानी से झेल सके। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह तकनीक भारत की ऊर्जा जरूरतों को टिकाऊ और स्वच्छ विकल्प उपलब्ध कराने में अहम भूमिका निभा सकती है।

वैज्ञानिकों के अनुसार मानसून के समय सौर ऊर्जा उत्पादन में कमी आती है, जबकि इसी अवधि में समुद्री हवाएं और लहरें अधिक शक्तिशाली हो जाती हैं। वहीं गर्मियों में सौर ऊर्जा उत्पादन अधिक होता है। प्रस्तावित हाइब्रिड सिस्टम इन्हीं मौसमी परिस्थितियों को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है, जिससे पूरे वर्ष निर्बाध ऊर्जा उत्पादन संभव हो सकेगा।

सीएसआईआर–एनआईओ के निदेशक सिंह के अनुसार यह तकनीक न केवल निरंतर ऊर्जा उत्पादन सुनिश्चित करेगी, बल्कि भविष्य में ऊर्जा संकट के स्थायी समाधान के रूप में भी उभर सकती है। इस परियोजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि समुद्र में ही ग्रीन हाइड्रोजन गैस का उत्पादन किया जा सकेगा, जिससे ऊर्जा को स्टोर करना आसान होगा और उद्योगों तक इसकी आपूर्ति के लिए महंगी ट्रांसमिशन केबल बिछाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।

Green Hydrogen:

कैसे काम करेगी हाइब्रिड तकनीक

योजना के तहत सबसे पहले एक छोटे स्तर पर प्लेटफॉर्म बनाकर इसकी टेस्टिंग की जाएगी। वैज्ञानिकों द्वारा तैयार किए जा रहे इस सिस्टम को इस तरह डिजाइन किया जा रहा है कि खराब मौसम या अत्यधिक तूफान की स्थिति में इसे सुरक्षा के लिए तट के करीब लाया जा सके।

इसके बाद बड़े स्तर पर ऐसा तैरता प्लेटफॉर्म विकसित किया जाएगा, जो समुद्र में रहकर मौसम के अनुसार अपने ऊर्जा स्रोतों को समायोजित कर सकेगा। बारिश और कम धूप के समय यह पवन और समुद्री लहरों की ऊर्जा का उपयोग करेगा, जबकि अन्य समय में सौर ऊर्जा से उत्पादन किया जाएगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना भारत को ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन और नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिला सकती है। यह तकनीक ऊर्जा उत्पादन के पारंपरिक तरीकों में बड़ा बदलाव ला सकती है।

Green Hydrogen:

यहां से शेयर करें