बिहार के भोजपुर जिले में हुए चर्चित भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दाखिल CBI जांच की मांग वाली याचिका पर शीर्ष अदालत ने सुनवाई करने से इनकार कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी किए बिना याचिकाकर्ता को संबंधित हाईकोर्ट का रुख करने की सलाह दी और स्पष्ट किया कि वह उचित समझें तो हाईकोर्ट के समक्ष याचिका दाखिल कर सकते हैं।
गौरतलब है कि भोजपुर के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव निवासी 28 वर्षीय भरत भूषण तिवारी की 17 जून को पुलिस की गोली लगने के बाद पटना के PMCH अस्पताल ले जाते समय अत्यधिक खून बहने से मौत हो गई थी। इस घटना को ‘फर्जी एनकाउंटर’ और ‘न्यायेतर हत्या’ करार देते हुए सुप्रीम कोर्ट के वकील विशाल तिवारी ने जनहित याचिका (PIL) दाखिल कर मामले की CBI जांच, संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ FIR और सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज की निगरानी में स्वतंत्र जांच समिति गठित करने की मांग की थी।
तत्काल सुनवाई से पहले भी कोर्ट का इनकार
याचिकाकर्ता ने मामले की तत्काल सुनवाई का भी अनुरोध किया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने जल्द सुनवाई की विशेष अपील स्वीकार करने से इनकार करते हुए याचिकाकर्ता को निर्धारित प्रक्रिया का पालन करने का निर्देश दिया, यानी पहले अदालत की रजिस्ट्री से संपर्क करना होगा। अब अंततः CBI जांच की मांग वाली याचिका पर भी सुनवाई से इनकार कर दिए जाने के बाद कानूनी लड़ाई का अगला चरण हाईकोर्ट में तय होगा।
परिवार पहले ही पहुंच चुका है पटना हाईकोर्ट
दिलचस्प बात यह है कि सुप्रीम कोर्ट के इस रुख से पहले ही तिवारी परिवार ने पटना हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटा दिया था। भरत तिवारी की मां आशा देवी की सहमति से पटना हाईकोर्ट में सीबीआई जांच की मांग को लेकर रिट याचिका दाखिल की गई है। परिवार की वकील वर्षा कुमारी ने पुलिस द्वारा भरत तिवारी, उनके पिता और भाई के खिलाफ दर्ज मामलों को ‘प्रतिशोध की भावना से दर्ज’ एफआईआर बताते हुए इन्हें चुनौती देने की तैयारी का संकेत दिया है।
सरकार ने पहले ही घोषित की न्यायिक जांच
जनाक्रोश और राजनीतिक दबाव के बीच बिहार सरकार ने पहले ही इस मामले में कदम उठाए हैं। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मामले की न्यायिक जांच की घोषणा की थी, जिसकी अध्यक्षता पटना हाईकोर्ट के एक रिटायर्ड जज करेंगे, और घटनास्थल पर मौजूद शाहपुर थाना प्रभारी समेत चार पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया गया है। राज्य के मंत्री दिलीप जायसवाल ने कहा था कि जांच में पुलिस की भूमिका के साथ-साथ यह भी देखा जाएगा कि भरत तिवारी के पास कथित अवैध हथियार कहां से आया।
राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया
इस एनकाउंटर ने बिहार में सियासी तूफान खड़ा कर दिया है। शाहाबाद इलाके में लोगों में भारी गुस्सा है और NDA गठबंधन के भीतर से भी आलोचना हो रही है, जबकि विपक्षी नेता तेजस्वी यादव ने इस घटना को “पुलिस की वर्दी की आड़ में की गई हत्या” करार दिया है। वहीं भोजपुरी सिने स्टार और भाजपा विधान पार्षद पवन सिंह ने भी संवेदना जताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा था कि स्वर्गीय भरत भूषण तिवारी केवल यही चाहते थे कि जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी जनता की समस्याओं का समाधान करें। अब सबकी निगाहें पटना हाईकोर्ट में होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां एनकाउंटर की वैधता, स्वतंत्र जांच की आवश्यकता और पुलिस कार्रवाई से जुड़े तमाम पहलुओं पर विस्तृत सुनवाई होने की संभावना है।

