“कॉकरोच इज़ बैक”: शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर एक बार फिर सुलगा, सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल से आंदोलन और तेज़

NEET पेपर लीक और CBSE मार्किंग विवाद से शुरू हुआ “कॉकरोच जनता पार्टी” अब बन गया है देशभर के युवाओं की आवाज़, सरकार पर बढ़ता दबाव

राजधानी दिल्ली का जंतर-मंतर एक बार फिर देश की राजनीति के केंद्र में आ गया है। महज़ डेढ़ महीने पहले सोशल मीडिया पर एक व्यंग्य के तौर पर शुरू हुआ “कॉकरोच जनता पार्टी” (CJP) नाम का आंदोलन अब केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर देशव्यापी जनांदोलन की शक्ल ले चुका है। रविवार को जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठने के बाद इस आंदोलन ने एक नया मोड़ ले लिया है।

कैसे शुरू हुआ आंदोलन

इस पूरे विवाद की जड़ मई 2026 में सुप्रीम कोर्ट की एक सुनवाई में जा छिपी है, जहां मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की एक टिप्पणी में “कॉकरोच” शब्द के इस्तेमाल को लेकर विवाद खड़ा हो गया था। हालांकि बाद में मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि उनकी टिप्पणी केवल फर्जी डिग्री के सहारे पेशे में घुसने वालों के लिए थी, लेकिन देश के बेरोजगार युवाओं ने इस शब्द को अपनी पहचान बना लिया। 16 मई 2026 को राजनीतिक संचार रणनीतिकार अभिजीत दिपके ने सत्ता-व्यवस्था पर कटाक्ष करते हुए एक्स (X) पर “कॉकरोच जनता पार्टी” बनाने का ऐलान किया — यह नाम सीधे तौर पर सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी पर तंज था। पुणे से पत्रकारिता और बोस्टन विश्वविद्यालय से जनसंपर्क की पढ़ाई कर चुके दिपके पहले आम आदमी पार्टी के साथ भी काम कर चुके हैं। लॉन्च के पांच दिन के भीतर ही इसके इंस्टाग्राम फॉलोअर्स की संख्या भाजपा के आधिकारिक हैंडल को पीछे छोड़ते हुए करोड़ों में पहुंच गई। 21 मई को सरकार ने “राष्ट्रीय सुरक्षा” का हवाला देते हुए सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 69(A) के तहत पार्टी का X अकाउंट प्रतिबंधित कर दिया, लेकिन कुछ ही मिनटों में “कॉकरोच इज़ बैक” नाम से नया अकाउंट बनाकर पार्टी फिर सक्रिय हो गई।

जंतर-मंतर पर पहला बड़ा प्रदर्शन

6 जून को अभिजीत दिपके बोस्टन से सीधे दिल्ली पहुंचे और दिल्ली पुलिस से अनुमति लेकर जंतर-मंतर पर पहला बड़ा प्रदर्शन किया। इसमें करीब 6 से 7 हज़ार लोग शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने कॉकरोच के मुखौटे पहनकर NEET 2026 पेपर लीक और CBSE परिणामों में कथित गड़बड़ी को लेकर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की। शिक्षा मंत्री का पुतला जलाने की कोशिश में कुछ कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में भी लिया। दिपके ने सरकार को सात दिन का अल्टीमेटम देते हुए कहा था कि यह आंदोलन अब पूरे देश में फैलेगा।

जयपुर में हमला, फिर भी पीछे नहीं हटे दिपके

आंदोलन जैसे-जैसे आगे बढ़ा, इसमें टकराव की घटनाएं भी सामने आईं। 15 जून को जयपुर के शहीद स्मारक पर एक प्रदर्शन के दौरान भीड़ में मौजूद दो युवकों ने दिपके पर थप्पड़ों से हमला कर दिया। हमले के बावजूद दिपके ने आंदोलन वापस लेने से इनकार करते हुए इसे आंदोलन कुचलने की साजिश बताया और शांतिपूर्ण तरीके से संघर्ष जारी रखने का ऐलान किया।

दूसरा धरना: रातभर डटे रहे प्रदर्शनकारी

20 जून को CJP ने जंतर-मंतर पर दूसरा बड़ा प्रदर्शन शुरू किया, जो अनिश्चितकालीन धरने में बदल गया। पुलिस की ओर से तय समय सीमा खत्म होने और जगह खाली करने के कई अल्टीमेटम के बावजूद दिपके और समर्थक थाली-चम्मच बजाते हुए रातभर डटे रहे। दूसरे दिन दोबारा हुई NEET परीक्षा देने वाले छात्र भी परीक्षा खत्म होने के बाद सीधे धरनास्थल पहुंचे। तीसरे दिन आत्महत्या कर चुके छात्रों की याद में कैंडल मार्च निकाला गया। पुलिस पर आरोप लगे कि धरनास्थल की बिजली-पानी की सुविधा रोकी गई और लोगों से पहचान-पत्र मांगकर रोका जा रहा है।

सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल से नया मोड़

बीते शुक्रवार दिपके ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में ऐलान किया कि शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर अभियान अब राष्ट्रव्यापी होगा, और 28 जून को देशभर के छात्रों, किसानों व अभिभावकों से जंतर-मंतर पहुंचने की अपील की। इसी कड़ी में जलवायु कार्यकर्ता व शिक्षाविद् सोनम वांगचुक ने रविवार को राजघाट जाकर “प्रधान गो बैक” अभियान के तहत अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी। दिपके ने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश, हरियाणा और पंजाब के कई किसान नेताओं को नज़रबंद किया जा रहा है, ताकि वे प्रदर्शन में शामिल न हो सकें। पार्टी ने आत्महत्या कर चुके छात्रों के परिवारों के लिए एक-एक करोड़ रुपये मुआवज़े की मांग भी रखी है। NEET पेपर लीक से जुड़े मामलों में अब तक कम से कम 17 छात्रों की आत्महत्या की बात सामने आई है। पार्टी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सीधे हस्तक्षेप की मांग करते हुए चेतावनी दी कि यदि कार्रवाई नहीं हुई तो उन्हें भी इस नाकामी के लिए ज़िम्मेदार माना जाएगा।

सरकार और राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया

सरकार की ओर से अब तक इस्तीफे की मांग पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, हालांकि शिक्षा मंत्रालय ने पेपर लीक के दोषियों के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाने की बात कही है। दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा को लेकर शहर को कई ज़ोन में बांटकर सख्त इंतज़ाम किए हैं। दिपके ने स्पष्ट किया है कि यह आंदोलन किसी राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं, बल्कि व्यवस्था की जवाबदेही के लिए है, और सभी दलों से छात्रों के मुद्दे पर राजनीति से ऊपर उठने की अपील की है। फिलहाल कांग्रेस समेत कुछ विपक्षी दलों ने भी इस मुद्दे पर अलग से प्रदर्शन की घोषणा की है।

देश-दुनिया में असर

शुरुआत में एक व्यंग्यात्मक डिजिटल अभियान के तौर पर पहचाना जाने वाला यह आंदोलन अब परीक्षा प्रणाली, बेरोज़गारी और संस्थागत जवाबदेही जैसे मुद्दों पर Gen-Z की आवाज़ का प्रतीक बन गया है। करोड़ों सोशल मीडिया फॉलोअर्स और कई राज्यों में फैल चुके ज़मीनी प्रदर्शनों ने इसे भारतीय राजनीति में एक नई तरह की डिजिटल-जन लामबंदी के उदाहरण के रूप में स्थापित कर दिया है। हालांकि कुछ टिप्पणीकार इसे महज़ एक सोशल-मीडिया-निर्मित नैरेटिव बताकर इसकी स्वतःस्फूर्तता पर सवाल भी उठा रहे हैं।

आगे क्या?

सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल और दिपके के राष्ट्रव्यापी अभियान के ऐलान के साथ यह आंदोलन एक नए, ज़्यादा टकराव वाले दौर में प्रवेश कर चुका है। पार्टी ने स्पष्ट किया है कि जब तक धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते, धरना और देशव्यापी विरोध जारी रहेंगे। आने वाले दिनों में सरकार के रुख और वांगचुक की सेहत पर स्थिति की दिशा तय होने की संभावना है — यह देखना अहम होगा कि क्या यह दबाव सरकार को नीतिगत बदलाव या किसी मंत्री-स्तरीय कार्रवाई के लिए मजबूर करता है, या आंदोलन समय के साथ ठंडा पड़ जाता है, जैसा बीते वर्षों में कई आंदोलनों के साथ देखा गया है।

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