अलर्ट! निहंग देहरादून आ रहे हैं — प्रेमनगर बनी छावनी, पुलिस ने दी चकमा देकर मेहूंवाला से शहर में घुसे निहंग

देहरादून। बृहस्पतिवार की रात देहरादून में ऐसा तनाव पैदा हुआ जैसा कम ही देखने को मिलता है। जैसे ही खुफिया इनपुट मिला कि निहंग सिख विकासनगर की ओर से देहरादून की तरफ बढ़ रहे हैं, पूरा प्रशासनिक और पुलिस तंत्र हरकत में आ गया। देखते ही देखते प्रेमनगर छावनी में तब्दील हो गया, बाजार बंद हो गए और आधी रात तक सड़कों पर सायरन गूंजते रहे।

कर्णप्रयाग विवाद की चिंगारी पहुंची देहरादून

यह पूरा घटनाक्रम उस विवाद की परिणति है जो चमोली जिले के कर्णप्रयाग में 16 जून को शुरू हुआ था। कर्णप्रयाग में स्थानीय लोगों और निहंग सिखों के बीच मामूली विवाद के दौरान कथित तौर पर तलवार से किए गए हमले में कुछ लोग घायल हो गए थे। घटना में एक निहंग सिख भी घायल हुआ था। पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर चार निहंग सिखों को गिरफ्तार किया था। इस घटना के बाद 20 जून को करीब आधा दर्जन निहंग रुद्रप्रयाग जिले के नगरासू गुरुद्वारे की छत पर चढ़ गए थे और प्रवेशद्वार बंद कर लिया था। पंजाब और पांवटा साहिब से आए एक सिख प्रतिनिधिमंडल से वार्ता के बाद 23 जून की शाम को उन्हें नीचे उतारा जा सका। लेकिन मामला यहीं नहीं रुका। कर्णप्रयाग की घटना के चार दिन बाद चार निहंगों ने रुद्रप्रयाग जिले के नगरासू स्थित गुरुद्वारे की छत पर चढ़कर कब्जा कर लिया था। वे गिरफ्तार निहंगों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई को एकतरफा बता रहे थे।

बैरियर तोड़कर उत्तराखंड की सीमा में घुसे निहंग

पंजाब से उत्तराखंड कूच के लिए निकले निहंग सिखों को कुल्हाल बॉर्डर पर रोका गया, लेकिन करीब 20-25 निहंग बैरिकेडिंग तोड़कर उत्तराखंड की तरफ बढ़ गए। पुलिस ने सीमा पर अवरोधक लगा रखे थे, लेकिन अस्त्र-शस्त्रों से लैस निहंग अवरोधकों पर चढ़ गए और उसे हटा दिया। निहंग सिखों ने वहां खड़ी कुछ गाड़ियों पर हमला किया और उनके कांच तोड़ डाले। एक वीडियो फुटेज में निहंग तलवार लहराते हुए भी नजर आए और काफी देर अराजकता की स्थिति बनी रही। पांवटा साहिब में प्रशासन के साथ बातचीत हुई, लेकिन मार्च रोकने पर सहमति नहीं बनी, जिसके बाद निहंग आगे बढ़ गए। करीब 50 निहंग बाइक से देहरादून की तरफ रवाना हो गए, जबकि करीब 150 निहंग वापस पांवटा साहिब लौट गए।

प्रेमनगर बनी छावनी, बंद हुए शटर

जैसे ही सूचना मिली कि निहंग प्रेमनगर की ओर से देहरादून में दाखिल होने की कोशिश करेंगे, पूरे इलाके का नक्शा बदल गया। प्रेमनगर की सड़क पर पुलिस की गाड़ियों के सायरन गूंजने लगे। तुरंत बैरिकेडिंग कर दी गई। प्रेमनगर चौक को पूरी तरह सील कर वाहनों की सघन जांच शुरू कर दी गई। सुरक्षा के मद्देनजर पीएसी समेत सभी थानों की फोर्स बुला ली गई। प्रेमनगर में रात के समय जैसे ही पुलिस की गाड़ियां पहुंचने लगीं तो हड़कंप मच गया। फोर्स लगातार पहुंचने लगी, दुकानों के शटर गिरने लगे, और सड़कों पर स्थानीय लोगों की भीड़ जुटने लगी। प्रेमनगर में जैसे ही पुलिस ने बेरिकेड कर वाहनों को रोका तो लंबा जाम लग गया। करीब डेढ़ से दो घंटे तक लंबा जाम लगा रहा, जिससे लोग काफी परेशान हुए। जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान और एसएसपी प्रमेन्द्र डोभाल देर रात तक स्वयं मोर्चे पर डटे रहे।

पुलिस को चकमा देकर निकले निहंग, उठे सवाल

यह पूरा मामला पुलिस के खुफिया तंत्र और रणनीति पर गंभीर सवाल भी खड़े करता है। विकासनगर की ओर से आ रहे निहंग किस रास्ते से निकल गए, यह पुलिस को पता ही नहीं चला। पुलिस निहंगों को मुख्य मार्गों पर ढूंढती रही और ये अनजान निहंग पुलिस को उन्हीं के जाने-पहचाने रास्तों पर चकमा देकर निकल गए। पुलिस को इंटेलिजेंस से सूचना मिली कि निहंग प्रेमनगर के रास्ते आएंगे, लेकिन निहंग पुलिस को चकमा देते हुए वाया मेहूंवाला-आईएसबीटी रेसकोर्स गुरुद्वारे में पहुंच गए। पुलिस को आनन-फानन में प्रेमनगर, शिमला बाईपास, आईएसबीटी और अन्य संभावित मार्गों पर नाकेबंदी करनी पड़ी। इस पूरे घटनाक्रम ने पुलिस की शुरुआती रणनीति और खुफिया तंत्र की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।

रेसकोर्स गुरुद्वारे में बातचीत, तड़के हुआ समाधान

कुछ निहंगों को देहरादून के रेसकोर्स स्थित गुरुद्वारे में ठहराया गया, जहां बाहर भारी पुलिस फोर्स तैनात रही। यहीं जिला प्रशासन, पुलिस अधिकारियों और सिख समाज के प्रतिनिधियों के बीच रातभर बातचीत चली। आखिरकार सुबह 3:30 बजे निहंग वापस पांवटा साहिब लौटने पर सहमत हो गए। वार्ता में शामिल कांग्रेस नेता और सिख समाज के प्रतिनिधि अमरजीत सिंह ने बताया कि निहंगों का मकसद कभी उन्माद फैलाना नहीं था, बल्कि शांतिपूर्ण समाधान निकालना था। निहंगों की मुख्य मांग यह रही कि गिरफ्तार चारों सिंहों को वापस पंजाब भेजा जाए। अधिकारियों ने वार्ता के दौरान आश्वासन दिया कि दो-चार दिनों के अंदर गिरफ्तार निहंगों की जमानत हो जाएगी।

स्थिति अब सामान्य, लेकिन प्रशासन अलर्ट पर

फिलहाल देहरादून में स्थिति सामान्य है, लेकिन प्रशासन अभी भी सतर्क है। रातभर पुलिस और प्रशासन को यह आशंका बनी रही कि अन्य निहंग जत्थे भी उत्तराखंड की ओर बढ़ सकते हैं, जिसके चलते पूरे दून में हाई अलर्ट जारी रहा। कर्णप्रयाग में गिरफ्तार साथियों की जमानत को लेकर जब तक अंतिम समाधान नहीं निकलता, तब तक स्थिति संवेदनशील बनी रह सकती है।

 

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