धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर जंतर मंतर पर उमड़ी युवा क्रांति, थाली-चम्मच से ‘वायरस’ भगाने का व्यंग्यात्मक प्रदर्शन

नीट यूजी 2026 पेपर लीक, सीबीएसई मूल्यांकन अनियमितताओं और छात्रों की बढ़ती आत्महत्याओं के मुद्दे पर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (सीजेपी) का दूसरा बड़ा प्रदर्शन आज जंतर मंतर पर हुआ। अभिजीत दीपके के नेतृत्व में हजारों छात्र, अभिभावक, युवा और आम नागरिक थाली-चम्मच लेकर पहुंचे और कोविड काल के ‘थाली बजाओ, कोरोना भगाओ’ अभियान की तर्ज पर व्यंग्य करते हुए ‘धर्मेंद्र प्रधान नाम के वायरस’ को भगाने का नारा लगाया। सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके, जो अमेरिका से विशेष रूप से इस प्रदर्शन के लिए लौटे थे, ने प्रदर्शन को शांतिपूर्ण रखने की अपील की। उन्होंने कहा, “लंबी लड़ाई है, बिना इस्तीफे के कोई नहीं हिलेगा।” प्रदर्शनकारियों ने दो मिनट का मौन रखकर उन छात्रों को श्रद्धांजलि दी जिन्होंने पेपर लीक और मानसिक दबाव के चलते आत्महत्या कर ली। मंच पर लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी पहुंचे, जिन्होंने सरकारी अधिकारियों और आईएएस-आईपीएस की तुलना करते हुए कड़ी आलोचना की।

प्रदर्शन की खास बातें

व्यंग्यात्मक प्रतीक: प्रदर्शनकारियों ने थाली और चम्मच बजाकर शिक्षा व्यवस्था में बैठे ‘वायरस’ को भगाने का प्रदर्शन किया। एक छात्र ने कहा, “कोविड भगाने के लिए थाली बजाई जा सकती है तो धर्मेंद्र प्रधान को क्यों नहीं?”

विविध भागीदारी: बिहार, ग्वालियर, नोएडा समेत देश भर से छात्र, इंजीनियर, सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवा, सुरक्षा गार्ड और यहां तक कि चौथी कक्षा की छोटी बच्ची लवी भी अपने पिता के साथ पहुंची। लवी ने कहा, “मेरी दीदी का नीट एग्जाम है, मैं उनके लिए आई हूं।”

मौन और संकल्प: पीड़ित परिवारों के लिए मौन रखा गया। अभिजीत दीपके ने अनिश्चितकालीन धरने की घोषणा की और दिल्ली पुलिस से अनुमति बढ़ाने की मांग की। 

सोनम वांगचुक का संदेश: वांगचुक ने कहा कि तरक्की के लिए आत्मा और जमीर बेचने वाले अधिकारियों से वैश्याएं भी बेहतर हैं। उन्होंने शिक्षा सुधार पर जोर दिया और राजनेताओं के बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ाने की वकालत की।

पृष्ठभूमि और सरकारी रुख

नीट यूजी 2026 का 3 मई का परीक्षा पेपर लीक होने के बाद रद्द कर दिया गया था, जिससे 22 लाख से अधिक छात्र प्रभावित हुए। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने लीक स्वीकार किया, सीबीआई जांच का आदेश दिया और 2027 से कंप्यूटर आधारित परीक्षा की घोषणा की। पुनर्परीक्षा 21 जून को प्रस्तावित है। हालांकि, प्रदर्शनकारी इन कदमों को अपर्याप्त मानते हैं। उन्होंने कहा कि बार-बार पेपर लीक, गलत एडमिट कार्ड और मूल्यांकन घोटालों ने छात्रों के भविष्य को बर्बाद कर दिया है। सीजेपी ने पीएम मोदी से भी प्रधान का इस्तीफा लेने की मांग की।

युवा आक्रोश का प्रतीक

यह प्रदर्शन ऑनलाइन मीम और व्यंग्य से शुरू होकर सड़क पर एक बड़े युवा आंदोलन का रूप ले चुका है। अभिजीत दीपके ने देश भर का दौरा कर छात्रों की पीड़ा सुनी। प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा, हालांकि पुलिस ने सुरक्षा के मद्देनजर सतर्कता बरती। छात्रों का कहना है कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार और जवाबदेही तय किए बिना आंदोलन जारी रहेगा। एक इंजीनियर प्रदर्शनकारी अमीन अख्तर ने कहा, “डर-डर के कब तक चलेगा? किसी को तो आवाज उठानी ही पड़ेगी।” सरकार की ओर से अभी कोई नया बयान नहीं आया है, लेकिन प्रदर्शनकारियों का संकल्प साफ है—शिक्षा मंत्रालय में बदलाव तक धरना चलेगा। यह आंदोलन न सिर्फ नीट और सीबीएसई, बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र की विश्वसनीयता पर सवाल उठा रहा है।

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