नोएडा-ग्रेटर नोएडा में पारा 44 डिग्री के पार, मुंबई में 68 साल में सबसे सूखा जून; जानें मॉनसून का ताजा हाल
जून का महीना खत्म होने को है, लेकिन देश के बड़े हिस्से को अभी भी गर्मी से राहत नहीं मिली है। हालात इतने बिगड़ गए हैं कि आर्थिक राजधानी मुंबई की झुग्गी बस्तियों में रहने वाले हजारों लोग रात को घर के बजाय समुद्र किनारे रेत पर सोने को मजबूर हैं, तो दूसरी तरफ नोएडा और ग्रेटर नोएडा में पारा 44 डिग्री तक पहुंच गया है। दिलचस्प यह है कि कुछ दिन पहले मशहूर कॉमेडियन-एक्टर सुनील ग्रोवर का भी एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें वे खुले आसमान के नीचे जमीन पर सोते नजर आए — हालांकि उनका कनेक्शन गर्मी से बचने का नहीं, बल्कि सादगी और आध्यात्मिकता से जुड़ा बताया जा रहा है।
मुंबई की झुग्गियों में रात भी बनी ‘सजा’
मुंबई में गर्मी का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा। दिन में चिलचिलाती धूप के बाद रात में भी तापमान में खास गिरावट नहीं आ रही, जिसकी एक बड़ी वजह बिजली कटौती भी है। शहर के झुग्गी इलाकों में टीन की छतों और कम वेंटिलेशन वाले घर शाम तक इतने गर्म हो जाते हैं कि अंदर सांस लेना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में बड़ी संख्या में परिवार रात के समय अपने घरों के बजाय समुद्र किनारे जाकर सोने लगे हैं, जहां चलने वाली ठंडी हवा से उन्हें थोड़ी राहत मिल जाती है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह गर्मी के मौसम में अब उनकी रोज़ की आदत बन गई है — मॉनसून शुरू होने के बाद ही वे यह सिलसिला बंद करते हैं। मौसम विभाग के मुताबिक अरब सागर से आ रही नम हवाओं और बादलों की मौजूदगी के कारण वातावरण में नमी बढ़ गई है, जिससे दिन की गर्मी रात में भी बरकरार रहती है।
सुनील ग्रोवर का सादगी भरा अंदाज भी आया सामने
इसी बीच कॉमेडियन सुनील ग्रोवर का एक इंस्टाग्राम वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ, जिसमें वे आलीशान होटल छोड़कर रात के समय नदी घाट के किनारे फुटपाथ पर चटाई बिछाकर सोते दिखे। अलग-अलग रिपोर्टों में घाट की लोकेशन को लेकर कुछ अंतर है — कुछ ने इसे वाराणसी के घाट से जोड़ा तो कुछ ने ऋषिकेश के त्रिवेणी घाट का बताया। वीडियो में उनके आसपास कई श्रद्धालु भी खुले आसमान के नीचे जमीन पर लेटे नजर आए, और बैकग्राउंड में महाकाल का भजन बज रहा था। वीडियो को उन्होंने ‘तारे जमीन पर’ कैप्शन के साथ शेयर किया था। हालांकि यह वीडियो सीधे तौर पर गर्मी से बचने के लिए नहीं था — फैंस इसे सुनील के सादगी भरे और आध्यात्मिक स्वभाव से जोड़कर देख रहे हैं, क्योंकि इससे पहले भी वे सड़क किनारे हैंडपंप पर खुद कपड़े धोते हुए वीडियो शेयर कर चुके हैं। फिर भी सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने इसे देशभर में पड़ रही भीषण गर्मी के मौजूदा माहौल से जोड़कर मजाकिया अंदाज में जिक्र किया।
नोएडा-ग्रेटर नोएडा और दिल्ली-एनसीआर भी बेहाल
मुंबई से करीब डेढ़ हजार किलोमीटर दूर नोएडा और ग्रेटर नोएडा में भी गर्मी ने जीना मुश्किल कर दिया है। बीते कुछ दिनों में यहां अधिकतम तापमान 41 से 44 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज किया गया, जबकि हवा की गुणवत्ता भी ‘खराब’ श्रेणी में बनी रही, जिससे बच्चों और बुजुर्गों की परेशानी और बढ़ गई। दिल्ली में भी पारा 42 डिग्री तक पहुंच गया था। राहत की खबर यह है कि मौसम विभाग (IMD) ने दिल्ली-एनसीआर — नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद समेत — के लिए 20 और 21 जून को आंधी-तूफान और हल्की से मध्यम बारिश का अलर्ट जारी किया है। 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार से चलने वाली हवाओं के साथ इन दो दिनों में तापमान गिरकर 36 से 38 डिग्री तक आ सकता है, जिससे उमस भरी गर्मी से कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।
मॉनसून की सुस्त चाल, मुंबई में 68 साल का रिकॉर्ड
मुंबई के लिए हालात ज्यादा चिंताजनक हैं। शहर में मॉनसून पहुंचने की सामान्य तारीख 10-11 जून मानी जाती है, लेकिन इस बार जून के पहले 15 दिनों में लगभग कोई असरदार बारिश दर्ज नहीं हुई — मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक ऐसा 68 साल में पहली बार हुआ है। पुणे में भी 1958 के बाद यह सबसे सूखा दौर बताया जा रहा है। अल नीनो के असर से मॉनसून की रफ्तार धीमी पड़ी है और मुंबई में अब तक सामान्य से काफी कम बारिश हुई है। मौसम विभाग के मुताबिक मॉनसून की उत्तरी सीमा पिछले कई दिनों से कोंकण तट पर हरनाई के आसपास ठहरी हुई है, और इसके आगे बढ़ने के लिए जरूरी कोई मजबूत निम्न दबाव क्षेत्र फिलहाल नहीं बना है। ऐसे में अब अनुमान है कि मुंबई में मॉनसून की ठीक-ठाक बारिश 25 जून के आसपास ही शुरू हो सकती है। देशभर में भी 1 से 16 जून के बीच मॉनसूनी बारिश सामान्य से करीब 35 प्रतिशत कम रही है, जिसमें मध्य भारत में सबसे ज्यादा कमी दर्ज की गई।
कब मिलेगी पूरी राहत?
कुल मिलाकर तस्वीर यह है कि उत्तर भारत के शहरों — दिल्ली, नोएडा, ग्रेटर नोएडा — को इस सप्ताहांत की बारिश से अस्थायी राहत मिल सकती है, लेकिन मुंबई और महाराष्ट्र के लोगों को मॉनसून के लिए अभी कुछ और दिन इंतजार करना होगा। तब तक झुग्गी बस्तियों के लोगों के लिए समुद्र किनारे की रात ही सबसे बड़ा सहारा बनी रहेगी।

