नोएडा-ग्रेटर नोएडा में बिजली बिल पर मंडराया बड़ा संकट, छूट खत्म होने के आसार बढ़े; प्रदेशभर में फ्यूल सरचार्ज पर रोक, पर तलवार अभी लटकी

उत्तर प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं के लिए राहत और संकट की खबरें एक साथ सामने आ रही हैं। एक तरफ ग्रेटर नोएडा क्षेत्र के 2.5 लाख से अधिक उपभोक्ताओं पर पिछले चार साल से मिल रही 10 प्रतिशत बिजली बिल छूट खत्म होने का खतरा पहले से ज्यादा गहरा गया है, तो दूसरी तरफ प्रदेश के बाकी हिस्सों में लागू किए जाने वाले 10 प्रतिशत फ्यूल सरचार्ज पर नियामक आयोग ने अंतरिम रोक लगा दी है। हालांकि यह रोक स्थायी नहीं है और अंतिम फैसला अभी आना बाकी है, जिससे करोड़ों उपभोक्ता असमंजस की स्थिति में बने हुए हैं।

ग्रेटर नोएडा: छूट पर खतरा और गहराया

नोएडा पावर कंपनी लिमिटेड (NPCL) 2023 से ग्रेटर नोएडा क्षेत्र के उपभोक्ताओं को ‘रेग्युलेटरी सरप्लस’ के आधार पर बिजली बिल में 10 प्रतिशत की छूट दे रही है। बीते दिनों कंपनी ने इस छूट को समाप्त करने का प्रस्ताव उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग (UPERC) को सौंपा था, जिससे ग्रेटर नोएडा के 2.5 लाख से ज्यादा उपभोक्ता सीधे प्रभावित हो सकते हैं। अब इस मामले में एक नया मोड़ आया है। उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा के मुताबिक, नियामक आयोग ने NPCL के वित्तीय वर्ष 2023-24 के सरप्लस के पुनर्परीक्षण आदेश में बड़ा बदलाव किया है। आयोग द्वारा पहले मंजूर किए गए लगभग 1,500.63 करोड़ रुपये के सरप्लस को पुनर्गणना के बाद घटाकर मात्र 593.81 करोड़ रुपये कर दिया गया है। परिषद का आरोप है कि सरप्लस में इस बड़ी कटौती से ग्रेटर नोएडा के उपभोक्ताओं को लंबे समय से मिल रही करीब 10 प्रतिशत की छूट खत्म होने और आने वाले समय में दरों में वृद्धि होने की आशंका और बढ़ गई है। परिषद पहले से ही यह दावा करता रहा है कि बिजली कंपनियों के पास भारी अतिरिक्त फंड (लगभग 51,000 करोड़ रुपये) मौजूद है, इसलिए घाटा दिखाकर दरें बढ़ाना या छूट खत्म करना उचित नहीं है। परिषद ने नियामक आयोग से नोएडा की बिजली कंपनी में हुई वित्तीय गड़बड़ियों की स्वतंत्र जांच कराने की मांग भी दोहराई है।

प्रदेशभर में फ्यूल सरचार्ज: फिलहाल राहत, पर अंतिम फैसला बाकी

दूसरी तरफ, उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (UPPCL) ने मार्च 2026 की बिजली खरीद लागत के आधार पर जून के बिलों में 10 प्रतिशत तक का फ्यूल सरचार्ज (ईंधन अधिभार) जोड़ने का आदेश 29 मई को जारी किया था। इससे प्रदेश के लगभग 2 करोड़ से ज्यादा उपभोक्ताओं के मासिक बिल में 1.24 प्रतिशत से 10 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी का अंदेशा था — यानी 1,000 रुपये के बिल पर लगभग 12.40 रुपये तक का अतिरिक्त बोझ। लेकिन उपभोक्ता परिषद ने इस फैसले को नियमों के विरुद्ध बताकर नियामक आयोग के सामने याचिका दाखिल की। परिषद का तर्क है कि UPPCL ने सरचार्ज की गणना करते समय मार्च 2026 की वास्तविक बिजली खरीद लागत के साथ लगभग 1,400 करोड़ रुपये के पुराने बकाया दावे और देनदारियां भी जोड़ दी, जो नियामकीय प्रावधानों के अनुरूप नहीं है। परिषद के अनुसार इस गलत गणना से उपभोक्ताओं पर करीब 1,610 करोड़ रुपये का अनुचित अतिरिक्त बोझ डाला गया। परिषद का दावा है कि यदि सही ढंग से गणना की जाती, तो बिल में 10 प्रतिशत बढ़ोतरी के बजाय करीब 2 प्रतिशत की कमी होनी चाहिए थी। इस पर सुनवाई करते हुए नियामक आयोग ने सख्त रुख अपनाया और जून के बिजली बिलों में प्रस्तावित 10 प्रतिशत फ्यूल सरचार्ज की वसूली पर अंतरिम रोक लगा दी। आयोग ने UPPCL से सात दिन के भीतर विस्तृत स्पष्टीकरण मांगा है कि यह सरचार्ज किस आधार पर और किन नियमों के तहत तय किया गया, और दो साल पुराना बकाया घाटा इसमें कैसे जोड़ा गया। आयोग ने स्पष्ट किया है कि जब तक मामले में अंतिम फैसला नहीं आता, तब तक बिलों में कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं जोड़ा जाएगा। UPPCL के जवाब के बाद ही आयोग इस पर सर्वोच्च और अंतिम निर्णय सुनाएगा।

स्थिति एक नज़र में

| क्षेत्र / कंपनी | प्रस्तावित बदलाव | प्रभावित उपभोक्ता | फिलहाल स्थिति |

|—|—|—|—|

| ग्रेटर नोएडा (NPCL) | 10% छूट समाप्त करने का प्रस्ताव | 2.5 लाख+ | सरप्लस घटाए जाने से खतरा और बढ़ा, अंतिम फैसला लंबित |

| शेष उत्तर प्रदेश (UPPCL) | 1.24%–10% फ्यूल सरचार्ज | 2 करोड़+ | आयोग ने जून बिल पर अंतरिम रोक लगाई, 7 दिन में जवाब तलब |

अब तक का घटनाक्रम

उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए लगातार छठे साल बिजली दरें न बढ़ाने का फैसला पहले ही ले चुका है, और NPCL उपभोक्ताओं के लिए भी 10 प्रतिशत छूट को आगे बढ़ाने का आदेश दिया था। इसी बीच कंपनी ने अगले वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए टैरिफ बढ़ोतरी का प्रस्ताव तो नहीं दिया, लेकिन छूट खत्म करने का प्रस्ताव अब भी आयोग के विचाराधीन है। वहीं UPPCL के फ्यूल सरचार्ज मामले में भी आयोग का अंतिम आदेश UPPCL के जवाब के बाद ही आएगा। यानी फिलहाल उपभोक्ताओं को दोनों मामलों में अस्थायी राहत है, लेकिन स्थायी समाधान अभी सामने नहीं आया है।

उपभोक्ताओं के लिए आगे क्या?

ग्रेटर नोएडा के उपभोक्ताओं को अभी 10 प्रतिशत छूट मिलती रहेगी, जब तक आयोग अंतिम फैसला नहीं सुनाता। प्रदेश के बाकी हिस्सों में जून के बिल में फ्यूल सरचार्ज नहीं जोड़ा जाएगा, जब तक UPPCL का जवाब आने के बाद आयोग कोई निर्णय नहीं लेता। उपभोक्ता परिषद ने दोनों मामलों में कंपनियों की गणना पर सवाल उठाते हुए स्वतंत्र जांच और सरप्लस राशि के समायोजन की मांग की है। अंतिम आदेश आने तक उपभोक्ताओं को अपने बिलों पर नजर रखने की सलाह दी जा रही है, क्योंकि आयोग का फैसला आने वाले महीनों के बिल पर सीधा असर डालेगा।

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