एमिटी विश्वविद्यालय में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर विशेष परिचर्चा, विशेषज्ञों ने कहा, बढ़ती उम्र में भी योग रख सकता है स्वस्थ और सक्रिय

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2026 के उपलक्ष्य में एमिटी विश्वविद्यालय के एमिटी एलुमनाई रिलेशंस कार्यालय द्वारा बढ़ती उम्र की स्वस्थता के लिए योग” विषय पर एक ऑनलाइन परिचर्चा सत्र का आयोजन किया गया। इस सत्र में विभिन्न क्षेत्रों की विशेषज्ञ पूर्व छात्राओं ने योग के शारीरिक, मानसिक और सामाजिक लाभों पर अपने अनुभव और विचार साझा किए।

सत्र का शुभारंभ

परिचर्चा सत्र का उद्घाटन एमिटी विश्वविद्यालय के डीन (एजुकेशन) और एमिटी इंस्टीट्यूट ऑफ इंडियन सिस्टम ऑफ मेडिसिन के मेंटर डॉ. एस.के. श्रीवास्तव, एमिटी एलुमनाई रिलेशंस की उपनिदेशक डॉ. रितु भटनागर और एमिटी विश्वविद्यालय लखनऊ कैंपस के एलुमनाई रिलेशंस डॉ. सैयद वजाहत अब्बास रिजवी ने संयुक्त रूप से किया। सत्र का संचालन एमिटी इंस्टीट्यूट ऑफ इंडियन सिस्टम ऑफ मेडिसिन के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. संजय सिंह ने किया।

डॉ. श्रीवास्तव बोले — लंबी उम्र के साथ स्वस्थ उम्र जरूरी

डॉ. एस.के. श्रीवास्तव ने कहा कि आज विश्व में जनसंख्या की औसत आयु तेजी से बढ़ रही है और इक्कीसवीं सदी की सबसे बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती यह सुनिश्चित करना है कि लंबी जिंदगी सेहतमंद, सार्थक और संतोषजनक भी हो। उन्होंने कहा कि यह लक्ष्य योग के माध्यम से ही संभव है।

विशेषज्ञों ने क्या कहा?

मोशनआरएक्स की सह-संस्थापक डॉ. साक्षी अग्रवाल ने कहा कि हेल्दी एजिंग के लिए योग अब केवल योग केंद्रों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि एलोपैथिक इलाज के साथ-साथ योग थेरेपी, नेचुरोपैथी और सही खान-पान को अपनाना जरूरी है। सिंपली ब्रीथ वेलनेस की संस्थापक सुश्री दीपिका लालवानी ने बताया कि उम्र बढ़ने के साथ मांसपेशियां कमजोर होने लगती हैं, जिससे इम्यूनिटी भी घटती है। लेकिन यदि योग और व्यायाम नियमित रूप से किया जाए तो 70 साल की उम्र में भी मांसपेशियों को पुनः सक्रिय किया जा सकता है। मैक्स अस्पताल की क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट सुश्री वंसुधरा चौधरी ने कहा कि योग और कॉग्निटिव बिहेवियर थेरेपी में गहरी समानता है। योग केवल आसनों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह खुद को बेहतर ढंग से समझने और समाज में सकारात्मक रूप से जीने की एक मेडिटेशन गाइडबुक है। रजिस्टर्ड डायटीशियन और नेचुरोपैथी प्रैक्टिशनर डॉ. अंजलि शुक्ला ने बताया कि योग नर्वस सिस्टम को शांत कर लगातार बनने वाले तनाव से मुक्ति दिलाता है। शोध से यह भी प्रमाणित हुआ है कि नियमित योग से टाइप-2 डायबिटीज के रोगियों का शर्करा स्तर भी सामान्य होता है। सर्टिफाइड योग शिक्षक सुश्री दीक्षा शर्मा पांचाल ने स्पष्ट किया कि योग कोई ‘क्विक फिक्स’ नहीं है। महर्षि पतंजलि द्वारा बताए गए अष्टांग योग — यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि — को जीवन का अंग बनाना होगा। उन्होंने कहा कि बीमार पड़ने पर नहीं, बल्कि सदा स्वस्थ रहने के लिए योग को जीवन में शामिल करना आवश्यक है। वेलनेस प्रशिक्षक सुश्री प्रतिष्ठा गोयल ने कहा कि दिन में केवल 30 मिनट से 1 घंटा योग को देने से पूरे 24 घंटे के लिए शरीर और मन तरोताजा रहता है। उन्होंने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस लोगों को स्वयं से जोड़ने और स्वस्थ आदतें अपनाने के लिए प्रेरित कर रहा है।

सत्र में उत्साहजनक भागीदारी

इस ऑनलाइन परिचर्चा सत्र में एमिटी विश्वविद्यालय के बड़ी संख्या में वर्तमान छात्र एवं शिक्षकगण भी शामिल हुए और विशेषज्ञों के अनुभवों से लाभान्वित हुए। यह परिचर्चा सत्र इस बात का प्रमाण है कि योग अब केवल एक परंपरागत अभ्यास नहीं, बल्कि आधुनिक जीवनशैली की बीमारियों से लड़ने और बढ़ती उम्र में भी जीवन को स्वस्थ, सक्रिय और सार्थक बनाए रखने का सबसे सशक्त माध्यम बन चुका है।

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