मध्य प्रदेश के नर्मदा अंचल पर आधारित क्राइम-थ्रिलर को मिली समीक्षकों की सराहना, इश्तियाक खान के विलेन अवतार और असली लोकेशंस पर की गई शूटिंग बनी फिल्म की जान
देश की राजधानी से सटे नोएडा के सेक्टर-18 स्थित द ग्रेट इंडिया प्लेस (जीआईपी) मॉल के मिराज सिनेमा के हॉल नंबर 4 में मंगलवार को शाम पाँच बजे हिंदी फिल्म ‘द नर्मदा स्टोरी’ की एक विशेष मीडिया स्क्रीनिंग का आयोजन किया गया। इस स्क्रीनिंग में बड़ी संख्या में मीडियाकर्मियों ने शिरकत की और फिल्म का निःशुल्क प्रदर्शन देखा। गौरतलब है कि यह फिल्म 12 जून 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी। निर्देशक जैगम इमाम द्वारा निर्देशित और एबी इन्फोसॉफ्ट क्रिएशन द्वारा निर्मित इस फिल्म में रघुबीर यादव, मुकेश तिवारी, अश्विनी कालसेकर, सिमाला प्रसाद, अंजलि पाटिल, ज़रीना वहाब और इश्तियाक खान जैसे दिग्गज कलाकार मुख्य भूमिकाओं में हैं।

क्या है फिल्म की कहानी?
फिल्म की कहानी नर्मदा अंचल और मध्यप्रदेश के पृष्ठभूमि पर आधारित है। कहानी का केंद्र एक आदिवासी महिला अग्नि धुर्वे हैं, जो अपनी बेटी को बचाने के लिए संघर्ष करती हैं। इस लड़ाई में पुलिस इंस्पेक्टर नर्मदा रायकवार उनका साथ देती हैं और दोनों मिलकर ताकतवर अपराधियों के खिलाफ मोर्चा खोलती हैं। इसके साथ ही एक लापता पुलिस इंस्पेक्टर पुरुषोत्तम भदौरिया की रहस्यमयी तलाश और पावर हाउस में मिली जली हुई लाश कहानी के रोमांच को और गहरा कर देती है।
मीडिया स्क्रीनिंग में क्या रहा माहौल?
जीआईपी मॉल के नोएडा सेक्टर 18 मेट्रो स्टेशन के निकट स्थित मिराज सिनेमा के तीसरी मंजिल पर मौजूद हॉल नंबर 4 में शाम पाँच बजे शुरू हुई इस विशेष स्क्रीनिंग में प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया से जुड़े पत्रकार, कैमरामैन और समीक्षक पहुँचे। फिल्म के समाप्त होने के बाद मीडियाकर्मियों में आम राय रही कि यह फिल्म बेहद संवेदनशील और यथार्थवादी है, जो मुख्यधारा की चकाचौंध से अलग एक गंभीर सिनेमाई अनुभव प्रदान करती है।
फिल्म की ताकत: असली लोकेशंस और दमदार अभिनय
फिल्म की सिनेमैटोग्राफी और बैकग्राउंड म्यूजिक इसकी कहानी को और प्रभावशाली बनाते हैं, और नर्मदा क्षेत्र की असली लोकेशंस फिल्म को वास्तविकता के काफी करीब ले जाती हैं। सिनेमैटोग्राफर सेतु श्रीराम ने मध्य प्रदेश के ग्रामीण परिवेश, कोहरे और रहस्य को कैमरे में बखूबी कैद किया है। फिल्म महिला सशक्तीकरण, न्याय और आदिवासी समुदायों के जीवन जैसे महत्वपूर्ण विषयों को केंद्र में रखती है। फिल्म में विलेन ‘निशा’ के किरदार में इश्तियाक खान ने रोंगटे खड़े करने वाला अभिनय किया है। रघुबीर यादव और मुकेश तिवारी ने भी अपने किरदारों के साथ पूरा न्याय किया है।
मध्यप्रदेश में भी हुई थी विशेष स्क्रीनिंग
रिलीज के पहले ही दिन मध्यप्रदेश में फिल्म ने धूम मचा दी थी। भोपाल के सिनेपोलिस और आशिमा मॉल मल्टीप्लेक्स सहित कई जिलों में फिल्म की स्पेशल स्क्रीनिंग आयोजित की गई और कई सिनेमाहॉल हाउसफुल रहे।
फिल्म की कुछ सीमाएँ
हालाँकि फिल्म को समीक्षकों ने सराहा है, लेकिन कुछ आलोचकों का मानना है कि दूसरे हाफ में कुछ उपकथाएँ मुख्य कथासूत्र की गति को धीमा कर देती हैं। साथ ही, पटकथा में और परतें जोड़ी जातीं तो कलाकारों की प्रतिभा और अधिक निखरती। यह फिल्म उन दर्शकों के लिए नहीं बनी जो मसालेदार और तेज़-रफ्तार बॉलीवुड थ्रिलर पसंद करते हैं।
किन्हें देखनी चाहिए यह फिल्म?
जिन दर्शकों को सस्पेंस, रहस्य और सच्ची घटनाओं से प्रेरित कहानियाँ पसंद हैं, उनके लिए यह फिल्म एक अनिवार्य सिनेमाई अनुभव है। ‘द केरल स्टोरी’ और ‘आर्टिकल 15’ जैसी सामाजिक व क्राइम ड्रामा फिल्मों के प्रशंसक इस फिल्म से निराश नहीं होंगे। ‘द नर्मदा स्टोरी’ उन गिनी-चुनी हिंदी फिल्मों में शामिल है जो एंटरटेनमेंट के साथ-साथ एक ज़रूरी सामाजिक संदेश भी देती हैं। नोएडा की मीडिया स्क्रीनिंग इस बात का प्रमाण रही कि यह फिल्म न केवल सिनेमाप्रेमियों, बल्कि समाज की नब्ज़ टटोलने वाले हर व्यक्ति के लिए देखने योग्य है।

