कंक्रीट के जंगल में जिंदगी की जंग: नोएडा की हाई राइज सोसाइटियों में हेलमेट पहनकर निकलने को मजबूर हैं निवासी, करोड़ों का घर, पर जान का कोई ठिकाना नहीं

मलबे की मार से जान गई, बिल्डरों पर एफआईआर तो हुई, पर सवाल वही: जवाबदेह कौन?

उत्तर प्रदेश के नोएडा और ग्रेटर नोएडा में बहुमंजिला इमारतें जहाँ एक ओर “स्मार्ट सिटी” के सपने का प्रतीक मानी जाती हैं, वहीं दूसरी ओर इन्हीं इमारतों की जर्जर दीवारें और झड़ता हुआ प्लास्टर अब रहवासियों की रातों की नींद उड़ा रहा है। यहाँ बच्चे शाम को खेलने निकलते हैं तो साइकिल पर हेलमेट पहनकर न सड़क के यातायात से बचने के लिए, बल्कि अपने ही घर की बिल्डिंग से गिरते मलबे से बचने के लिए। यह कोई अतिशयोक्ति नहीं, यह नोएडा के सेक्टर 76 और 78 की ‘अंतरिक्ष गोल्फ व्यू’ जैसी नामी सोसाइटियों की रोजमर्रा की सच्चाई है।

जब घर के आँगन में ही सिर पर मंडराता है खतरा

नोएडा के सेक्टर-78 स्थित अंतरिक्ष गोल्फ व्यू-2 सोसाइटी में बहुमंजिला इमारतों से प्लास्टर गिरने की घटनाएं अब आम होती जा रही हैं, जिससे निवासियों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आए दिन हो रही इन घटनाओं में लोग घायल हो रहे हैं और खड़ी गाड़ियों को भी नुकसान पहुंच रहा है। सोसाइटी की निवासी दीप्ति बताती हैं कि मलबा लगातार गिरता रहता है बारिश हो या न हो, तूफान हो या न हो। उनकी बेटी के आगे-पीछे कई बार मलबे के टुकड़े गिर चुके हैं। एक बार तो गाड़ी पर ही गिर गया था। अब वे बच्ची को पार्क में खेलने भेजने से डरती हैं। युवा निवासी लविवेश की बात और भी डराती है वे बताते हैं कि मदर डेरी वाले इलाके में ‘सी टावर’ से कई बार गाड़ियों पर मलबा गिर चुका है। बालकनी की हालत इतनी खराब है कि लगता है जैसे किसी भी पल टूट कर नीचे आ जाए। लविवेश के लिए क्रिकेट का शौक अब दम तोड़ रहा है “बाहर निकलना बहुत कम हो गया है, डर लगता है कि ऊपर से मलबा न गिर जाए।”

ताजा त्रासदी: अरिहंत अंबर में प्लास्टर से गई जान, मेंटेनेंस इंचार्ज गिरफ्तार

यह खतरा महज डर नहीं, बल्कि अब मौत का सबब भी बन चुका है। ग्रेटर नोएडा में एक ऊंची इमारत से प्लास्टर का टुकड़ा गिरने से बाइक सवार 46 वर्षीय व्यक्ति की मौत हो गई। यह घटना बिसरख थाना क्षेत्र की ‘अरिहंत अंबर’ सोसाइटी में हुई, और पुलिस ने इमारत के रखरखाव प्रबंधक दीपक को गिरफ्तार कर लिया। टावर डी-1507 में रहने वाले विकास चावला अपनी बाइक से सोसाइटी से बाहर जा रहे थे। जैसे ही वह टावर के नीचे से गुजर रहे थे, इमारत के बाहरी हिस्से से प्लास्टर का एक बड़ा टुकड़ा अचानक टूटकर उनके ऊपर आ गिरा। प्लास्टर गिरने से उनकी बाइक डिसबैलेंस होकर गिर गई, जिससे उनका सिर दीवार के किनारे पर लगा और अस्पताल में उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। इस घटना के बाद बिल्डर के खिलाफ प्राथमिकी भी दर्ज कराई गई।

एक अकेली सोसाइटी नहीं — पूरा नोएडा इसी संकट में

ग्रेटर नोएडा वेस्ट की हाईराइज सोसाइटियों में लगातार प्लास्टर गिरने की घटनाओं से निवासी दहशत में हैं। ताजा मामला सुपरटेक इको विलेज-1 का है। देर रात आई तेज आंधी के दौरान एक टावर की 20वीं मंजिल से प्लास्टर का बड़ा हिस्सा टूटकर नीचे गिरा और खुले क्षेत्र में खड़ी एक कार पर आ गिरा, जिससे वाहन क्षतिग्रस्त हो गया। राहत की बात यह रही कि उस वक्त वहाँ कोई व्यक्ति मौजूद नहीं था अन्यथा बड़ा हादसा हो सकता था। इसके बावजूद विभिन्न सोसाइटियों में इस तरह की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं, जिससे साफ है कि समस्या केवल किसी एक सोसाइटी तक सीमित नहीं है, बल्कि कई हाईराइज इमारतों में निर्माण गुणवत्ता और रखरखाव पर गंभीर सवाल हैं। इसी बीच नोएडा के सेक्टर-75 स्थित आईवीवाई काउंटी सोसाइटी में आग बुझाने पहुंचे दमकलकर्मियों की वॉटर होज की धार मुश्किल से 5वीं-6ठी मंजिल तक ही पहुंच सकी, जबकि आग 12वें फ्लोर पर तांडव मचा रही थी। लोगों ने कहा कि नोएडा जैसे हाई-राइज हब में पुरानी और आउटडेटेड तकनीकों के सहारे लाखों लोगों की जान को खतरे में डाला जा रहा है।

मेंटेनेंस के नाम पर हजारों की वसूली, सुविधा का नामोनिशान नहीं

अंतरिक्ष गोल्फ व्यू की निवासी दीप्ति बताती हैं कि 1345 वर्ग फुट के फ्लैट का मेंटेनेंस चार्ज ₹4,100 प्रतिमाह है, जो पिछले छह महीनों में ही बढ़ाया गया है। इस रकम के बावजूद सफाई नहीं होती, बिल्डिंग जर्जर है और मेंटेनेंस विभाग शिकायतें सुनने को तैयार नहीं। “धरना-प्रदर्शन तक किया, पर कोई सुनवाई नहीं,” वे कहती हैं। यही हाल नोएडा की अन्य सोसाइटियों का भी है। नोएडा और ग्रेटर नोएडा की कई सोसाइटियों में मेंटेनेंस एजेंसियाँ बढ़ती श्रम लागत और महंगाई को शुल्क वृद्धि का कारण बता रही हैं, जबकि निवासी जवाबदेही, पारदर्शिता और सेवाओं में सुधार की माँग कर रहे हैं। नोएडा के सेक्टर-76 की आम्रपाली प्रिंसिले एस्टेट सोसाइटी में भी निवासियों की शिकायत पर डिप्टी रजिस्ट्रार ने नोटिस जारी किया है। निवासियों का कहना है कि एओए की तरफ से छह महीने में ही दो बार रखरखाव शुल्क बढ़ा दिया गया।

स्ट्रक्चरल ऑडिट का आदेश कागजों पर, जमीन पर शून्य

मार्च 2025 में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने सोसाइटियों का स्ट्रक्चरल ऑडिट कराने और तीन माह के भीतर रिपोर्ट जमा करने के निर्देश दिए थे लेकिन एक साल से अधिक समय बीत जाने के बाद भी रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई है। नोएडा प्राधिकरण ने अब सोसाइटियों का स्ट्रक्चरल ऑडिट करने के लिए निजी एजेंसियों को भी शामिल करने का फैसला किया है नई नीति के तहत 15 मीटर से ऊंची किसी भी इमारत को अधिभोग प्रमाण-पत्र लेने से पहले स्ट्रक्चरल ऑडिट कराना अनिवार्य होगा। 1 अप्रैल 2025 के बाद से अब तक केवल नौ ग्रुप हाउसिंग सोसाइटियों को ऑडिट रिपोर्ट जमा करने के बाद अधिभोग प्रमाण-पत्र जारी किया गया है। निवासियों ने प्रशासन और प्राधिकरण से मांग की है कि हाईराइज सोसाइटियों की नियमित जांच कराई जाए और जहाँ भी निर्माण में लापरवाही मिले, वहाँ बिल्डर व जिम्मेदार एजेंसियों के खिलाफ कार्रवाई हो, ताकि भविष्य में कोई और परिवार हादसे का शिकार न बने।

कब जागेगा सिस्टम?

आम्रपाली, अंतरिक्ष, अरिहंत, सुपरटेक ये केवल नाम नहीं हैं, बल्कि हजारों परिवारों की जीवनभर की कमाई का आसरा हैं। करोड़ों रुपए देकर खरीदे गए इन फ्लैटों में आज लोग अपने ही घर की परिधि में डर-डर कर जी रहे हैं। सोसाइटी के दुकानदार चार साल से इसी मलबे की मार झेल रहे हैं “दो-तीन दिन में, महीने में गिरता ही रहता है। हम भी कई बार बचे हैं।” यह उनका दर्द है, जो जानते हैं कि शिकायत करने पर “करा देंगे” सुनने को मिलेगा और कुछ नहीं। सवाल यह है कि जब सरकारी ऑडिट आदेश धूल खाते हैं, बिल्डर एफआईआर के बाद भी महफूज रहते हैं और मेंटेनेंस विभाग शिकायतों को दरकिनार करता है  तो आखिर इन हेलमेट पहने बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा?

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