नामांकन खारिज, कांग्रेस बेदम, 18 जून के चुनाव से पहले सियासी समीकरण पलटे
मध्यप्रदेश से राज्यसभा चुनाव लड़ने की कांग्रेस की कोशिश को उस वक्त गहरा झटका लगा जब देश की सर्वोच्च अदालत ने पार्टी की वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन की उस याचिका पर कोई अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया जिसमें उनके नामांकन पत्र खारिज किए जाने को चुनौती दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट की वेकेशन बेंच ने तुरंत कोई भी अंतरिम आदेश जारी करने से साफ इनकार कर दिया और मामले को 12 जून को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया। इस घटनाक्रम के बाद भाजपा के तीनों उम्मीदवार तरुण चुघ, रजनीश अग्रवाल और महेश केवट अब निर्विरोध राज्यसभा में जाने की राह पर हैं।
पूरा मामला क्या है?
यह विवाद 9 जून को रिटर्निंग ऑफिसर एवं मध्यप्रदेश विधानसभा के प्रमुख सचिव अरविंद शर्मा द्वारा नटराजन के नामांकन पत्र खारिज किए जाने से शुरू हुआ। आपत्ति भाजपा प्रत्याशी महेश केवट और प्रदेश महामंत्री राहुल कोठारी ने उठाई थी। भाजपा का आरोप था कि नटराजन ने अपने नामांकन के साथ दाखिल हलफनामे में हैदराबाद की एक अदालत में लंबित मामले का उल्लेख नहीं किया। रिटर्निंग ऑफिसर के आदेश के अनुसार, नटराजन को अक्तूबर 2025 में हैदराबाद की अदालत से एक नोटिस मिला था, लेकिन उन्होंने नामांकन के साथ जमा फॉर्म-26 में इस कार्यवाही का उल्लेख नहीं किया। इसी आधार पर रिटर्निंग ऑफिसर ने हलफनामे को अधूरा मानते हुए उनकी उम्मीदवारी खारिज कर दी।
कांग्रेस ने बताया राजनीतिक षड्यंत्र
कांग्रेस नेता ने गुरुवार, 11 जून को सुप्रीम कोर्ट का रुख किया और निर्वाचन अधिकारी के फैसले को “मनमाना, पक्षपाती और कानून के खिलाफ” बताते हुए इसे पलटने का आग्रह किया। इससे एक दिन पहले, 10 जून को कांग्रेस का एक प्रतिनिधिमंडल जिसमें के.सी. वेणुगोपाल, रणदीप सुरजेवाला, जयराम रमेश, दीपा दासमुंशी, विवेक तंखा और अभिषेक मनु सिंघवी शामिल थे चुनाव आयोग से मिला और इस फैसले को पलटने की मांग की। कांग्रेस ने दलील दी कि नटराजन के खिलाफ दायर निजी शिकायत पर किसी भी अदालत ने अभी संज्ञान नहीं लिया है, इसलिए इसे “लंबित मामले” के रूप में दर्शाना जरूरी नहीं था।
सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ?
वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने न्यायमूर्ति पी.के. मिश्रा और अतुल एस. चंदुरकर की पीठ के समक्ष इस मामले को “वास्तव में अत्यंत जरूरी” बताते हुए तत्काल सुनवाई और चुनाव परिणाम पर रोक की मांग की। हालाँकि सुप्रीम कोर्ट ने मध्यप्रदेश में जारी राज्यसभा चुनाव प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया और परिणाम घोषित करने से रोकने की मांग भी ठुकरा दी। पीठ ने याचिका की स्वीकार्यता पर भी सवाल उठाया। चुनाव आयोग की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता डी.एस. नायडू ने कोर्ट को बताया कि याचिका की प्रति अभी तक चुनाव आयोग को नहीं दी गई है।
राजनीतिक असर: BJP की क्लीन स्वीप तय
कांग्रेस का कोई उम्मीदवार न बचने से भाजपा के तीनों उम्मीदवार निर्विरोध उच्च सदन में जाने वाले हैं। नाम वापसी की अंतिम तारीख 11 जून थी और राज्यसभा चुनाव 18 जून को होने हैं। इस तरह मध्यप्रदेश की तीनों राज्यसभा सीटों पर भाजपा का परचम लहराना तय हो गया है और कांग्रेस राज्य की विधानसभा में संख्याबल होने के बावजूद सदन में अपना प्रतिनिधि भेजने में नाकाम रही।
कौन हैं मीनाक्षी नटराजन?
मीनाक्षी नटराजन का जन्म 23 जुलाई 1973 को मध्यप्रदेश के उज्जैन जिले के बिरलाग्राम नागदा में एक श्रमिक वर्गीय परिवार में हुआ था, जिनकी जड़ें तमिलनाडु से हैं। उन्होंने देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर से जीव विज्ञान में बी.एससी. और जैव रसायन में एम.एससी. की पढ़ाई की। उन्होंने 1998 में NSUI से राजनीतिक सफर शुरू किया, सोनिया गाँधी को अपने भाषण से प्रभावित किया और 1999 में NSUI की राष्ट्रीय अध्यक्ष बनीं। 2009 में उन्होंने मंदसौर लोकसभा सीट से 30,000 से अधिक मतों से जीत दर्ज की थी, जहाँ से 1971 से एक ही भाजपा नेता जीतते आ रहे थे। हालाँकि 2014 और 2019 में वे यह सीट हार गईं। फरवरी 2025 में उन्हें AICC का तेलंगाना प्रभारी बनाया गया।
आगे की राह
मामले में 12 जून को सुनवाई निर्धारित है, लेकिन चुनाव प्रक्रिया पर कोई रोक न लगने से कांग्रेस की कानूनी लड़ाई महज औपचारिकता बनकर रह सकती है। नटराजन ने इन आरोपों को राजनीतिक साजिश करार देते हुए कहा कि हैदराबाद की अदालत में दायर याचिका उनकी छवि खराब करने की कोशिश है। इस पूरे प्रकरण ने एक बार फिर यह सवाल उठाया है कि क्या रिटर्निंग ऑफिसर के पास नामांकन खारिज करने की इतनी व्यापक शक्तियाँ होनी चाहिए, और क्या मामूली तकनीकी आधार पर किसी उम्मीदवार की उम्मीदवारी समाप्त करना लोकतंत्र की भावना के अनुरूप है?

