Death of Jaspal Rana: नई दिल्ली। भारतीय खेल जगत में शुक्रवार को शोक की लहर दौड़ गई। पूर्व दिग्गज निशानेबाज और कोच जसपाल राणा का 49 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। बताया जा रहा है कि जर्मनी के म्यूनिख में आयोजित आईएसएसएफ वर्ल्ड कप से भारतीय दल के साथ लौटते समय फ्लाइट में उनकी तबीयत बिगड़ गई। नई दिल्ली पहुंचने पर उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली।
Death of Jaspal Rana:
उनके असामयिक निधन से पूरा भारतीय खेल जगत स्तब्ध है। जसपाल राणा ने न केवल एक सफल निशानेबाज के रूप में देश का नाम रोशन किया, बल्कि कोच के रूप में भी भारतीय शूटिंग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। उनके मार्गदर्शन में मनु भाकर, सौरभ चौधरी, अनीश भानवाला और चिंकी यादव जैसे कई प्रतिभाशाली खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चमके।
Death of Jaspal Rana: 12 वर्ष की उम्र में ही कर दिया था कमाल
जसपाल राणा का जन्म 28 जून 1976 को उत्तराखंड के उत्तरकाशी में एक गढ़वाली परिवार में हुआ था। उनके पिता नारायण सिंह राणा 1971 युद्ध के अनुभवी सैनिक रहे हैं, जिन्होंने इंडो-तिब्बत बॉर्डर पुलिस में भी सेवा दी और बाद में उत्तराखंड के पहले खेल मंत्री बने। उनके पिता स्वयं भी निशानेबाजी में रुचि रखते थे और जसपाल राणा के पहले कोच रहे। परिवार में उनकी बहन सुषमा सिंह (राणा) और भाई सुभाष राणा भी अच्छे निशानेबाज रहे हैं।
जसपाल राणा ने मात्र 12 वर्ष की उम्र में अहमदाबाद में आयोजित 31वीं राष्ट्रीय शूटिंग चैंपियनशिप में रजत पदक जीतकर अपने करियर की शुरुआत की थी। इसके बाद वर्ष 1994 में 46वीं विश्व शूटिंग चैंपियनशिप (जूनियर वर्ग) में स्टैंडर्ड पिस्टल इवेंट में स्वर्ण पदक जीतकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया।
जसपाल राणा का जीवन परिचय
- जन्म: 28 जून 1976
- निधन: 12 जून 2026
- पत्नी: आरुषी वर्मा
- खेल: निशानेबाजी
प्रतिस्पर्धा इवेंट
- 10 मीटर एयर पिस्टल
- 25 मीटर सेंटर-फायर पिस्टल
- 25 मीटर स्टैंडर्ड पिस्टल
उपलब्धियां
- 12 वर्ष की उम्र में पहला राष्ट्रीय पदक
- 1994 एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक
- 600 से अधिक अंतरराष्ट्रीय व राष्ट्रीय पदक
- अर्जुन पुरस्कार (1994)
- पद्म श्री (1997)
- द्रोणाचार्य पुरस्कार (2020)
कोच के रूप में भारतीय शूटिंग को दी नई दिशा
खेल से संन्यास के बाद जसपाल राणा ने कोच के रूप में भारतीय शूटिंग को विश्व स्तर पर मजबूत पहचान दिलाई। उन्होंने कई युवा खिलाड़ियों को तराशकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाया। हाल ही में वे भारतीय पिस्टल टीम के हाई-परफॉर्मेंस कोच के रूप में कार्यरत थे।
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