बुजुर्गों की ज़िंदगी भर की कमाई लूटी, न्याय के लिए तरस रहा नोएडा का 71 वर्षीय दंपति, आत्महत्या की दी चेतावनी

संपत्ति दस्तावेजों की आड़ में करोड़ों की ठगी, फर्जी मॉर्टगेज और बैंकिंग जालसाजी का सुनियोजित षड्यंत्र; पुलिस और प्रशासन मौन

उत्तर प्रदेश के नोएडा सेक्टर-52 में रहने वाले 71 वर्षीय वरिष्ठ नागरिक अनिल प्रसाद और उनकी पत्नी किरण प्रसाद जीवन भर की मेहनत से अर्जित संपत्ति और बचत को एक सुनियोजित वित्तीय षड्यंत्र में गँवाकर आज न्याय के लिए दर-दर भटक रहे हैं। दंपति का आरोप है कि आदित्य प्रकाश नामक एक व्यक्ति ने उनका विश्वास अर्जित कर उनके करोड़ों रुपये हड़प लिए, उनकी आवासीय संपत्ति को उनकी जानकारी के बिना बैंक में गिरवी रखवा दिया और फर्जी दस्तावेजों के जरिये उन्हें भारी ऋण के बोझ तले दफन कर दिया। सबसे दुखद पहलू यह है कि पुलिस और प्रशासन के तमाम दरवाजे खटखटाने के बावजूद पीड़ित दंपति को अब तक न्याय नहीं मिला है। हताश होकर पीड़ित ने सार्वजनिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में आत्महत्या तक की चेतावनी दे डाली है।

कैसे बिछाया गया जाल

पीड़ित अनिल प्रसाद के अनुसार, वर्ष 2022 में आदित्य प्रकाश को एक सीमित और स्पष्ट उद्देश्य के लिए अधिकृत किया गया था — कि वह स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की नोएडा शाखा से उनके मूल संपत्ति दस्तावेज प्राप्त कर उन्हें वापस सौंप दे। लेकिन एक बार दस्तावेज हाथ में आने के बाद आदित्य प्रकाश ने उन्हें लौटाने से इनकार कर दिया। इसके पश्चात वृद्ध दंपति को समय-समय पर बुलाकर विभिन्न दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराए जाते रहे। दंपति का कहना है कि उन्हें यह कभी नहीं बताया गया कि वे किन दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कर रहे हैं।

निदेशक बनाने का प्रलोभन और करोड़ों का ऋण

शिकायतकर्ता ने बताया कि आरोपी ने उन्हें एक निजी कंपनी में निदेशक बनाने का प्रस्ताव दिया था। इस प्रस्ताव में उन्हें आश्वस्त किया गया कि उनकी वित्तीय जिम्मेदारी नाममात्र की रहेगी। परंतु बाद में पता चला कि उनकी वास्तविक सहमति और जानकारी के बिना करोड़ों रुपये के ऋण, गारंटी और मॉर्टगेज से जुड़े दस्तावेज तैयार किए जा चुके थे। दंपति का आरोप है कि लगभग 2 करोड़ रुपये का ऋण 30 सितंबर 2022 को स्वीकृत और वितरित किया गया।

मॉर्टगेज में गंभीर अनियमितता का संदेह — ऋण पहले, अनुमति बाद में

इस मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू वह प्रक्रियागत विरोधाभास है जिसे पीड़ित ने उजागर किया है। उपलब्ध अभिलेखों के अनुसार, नोएडा प्राधिकरण द्वारा मॉर्टगेज संबंधी स्वीकृति 6 दिसंबर 2022 को प्रदान की गई — यानी ऋण स्वीकृति और वितरण के लगभग ढाई महीने बाद। पीड़ित ने सीधा सवाल उठाया है कि जब संपत्ति गिरवी रखने की वैधानिक अनुमति दो महीने से भी अधिक समय बाद मिली, तो बैंक ने ऋण किस आधार पर स्वीकृत और वितरित किया? उनका यह भी आरोप है कि मॉर्टगेज प्रक्रिया पूरी करने के लिए बाद में मोबाइल नंबर और अभिलेखों में हेरफेर किया गया।

संपत्ति गिरवी रखे जाने की कोई जानकारी नहीं दी गई

पीड़ित दंपति का स्पष्ट कहना है कि वे केवल लीज और अन्य औपचारिक कागजात पर हस्ताक्षर करने के लिए उपस्थित हुए थे। उन्हें कभी यह नहीं बताया गया कि उनकी आवासीय संपत्ति को ऋण की सुरक्षा के रूप में बंधक बनाया जा रहा है। बुढ़ापे के एकमात्र सहारे — अपने घर को — इस प्रकार दाँव पर लगाए जाने की जानकारी होती तो वे कभी सहमति न देते।

धनराशि के लेनदेन में भी पारदर्शिता का अभाव

पीड़ित पक्ष का आरोप है कि विभिन्न कंपनियों और व्यक्तियों के बैंक खातों के माध्यम से बड़ी मात्रा में धनराशि का लेनदेन किया गया, जिसकी कोई पारदर्शी जानकारी उन्हें नहीं दी गई। यह संपूर्ण मामला एक सोचे-समझे वित्तीय षड्यंत्र की ओर इशारा करता है जिसमें दस्तावेजी जालसाजी, बैंकिंग धोखाधड़ी और संपत्ति की अवैध बंधकबाजी एक साथ शामिल प्रतीत होती है।

पुलिस और प्रशासन की चुप्पी — न्याय की राह बंद

पीड़ित दंपति के अनुसार, वे कई महीनों से नोएडा पुलिस, प्रशासन और संबंधित अधिकारियों के पास न्याय की गुहार लगा रहे हैं, लेकिन आरोपी के विरुद्ध अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। उनकी शिकायतों को या तो अनसुना कर दिया गया अथवा लंबे समय से लंबित पड़ी हैं। इस मामले पर न पुलिस की ओर से कोई बयान आया है और न ही बैंक या नोएडा प्राधिकरण की ओर से कोई स्पष्टीकरण।

“न्याय नहीं मिला तो आत्महत्या के सिवा कोई रास्ता नहीं” — पीड़ित की पीड़ा

हताश, टूटे हुए और बेबस इस वृद्ध दंपति ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बेहद दर्दनाक बात कही। अनिल प्रसाद ने कहा कि यदि उन्हें न्याय नहीं मिला तो उनके पास आत्महत्या के अलावा कोई रास्ता नहीं बचेगा। देश में ऐसे मामले पहले भी सामने आए हैं जब वित्तीय ठगी के शिकार बुजुर्गों ने निराश होकर अपनी जान दे दी। ऐसे में इस दंपति की यह चेतावनी महज़ एक बयान नहीं, बल्कि एक डूबते इंसान की आखिरी पुकार है।

बड़ा सवाल — बैंक और प्राधिकरण की भूमिका की जाँच क्यों नहीं?

इस पूरे प्रकरण में कई स्तरों पर सवाल उठते हैं। पहला  बैंक ने बिना वैध मॉर्टगेज अनुमति के ऋण कैसे स्वीकृत किया? दूसरा — नोएडा प्राधिकरण ने बाद में मॉर्टगेज की अनुमति किस आधार पर दी जब प्रक्रिया ही संदिग्ध थी? तीसरा — क्या किसी बैंक अधिकारी की इसमें संलिप्तता हो सकती है? दिल्ली-एनसीआर में एक ही संपत्ति को कई बार गिरवी रखकर बैंकों से करोड़ों की ठगी के मामले पहले भी उजागर हो चुके हैं और ऐसे प्रकरणों में आर्थिक अपराध शाखा ने कार्रवाई की है।

प्रश्न यह है कि इस मामले में वैसी सक्रियता क्यों नहीं दिख रही?

सुप्रीम कोर्ट अधिवक्ता व डी लीगल राइट ऑर्गेनाइजेशन की अध्यक्ष एडवोकेट नीतू वर्मा, जो दंपति के साथ थीं, ने कहा कि यह केवल निजी विवाद नहीं बल्कि वरिष्ठ नागरिकों के साथ कथित आर्थिक शोषण, बैंकिंग अनियमितताओं और दस्तावेजी जालसाजी का गंभीर मामला है। उन्होंने उपलब्ध दस्तावेजों का हवाला देते हुए कहा कि कई अहम सवाल उठते हैं जिन्हें स्वतंत्र, निष्पक्ष और समयबद्ध जांच के माध्यम से हल करने की जरूरत है।

निगरानी व जांच: EOW और बैंक ने उठाये कदम

वर्मा ने बताया कि शिकायत के आधार पर आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने 25 मार्च 2026 को जांच आदेश जारी किए हैं और दिल्ली पुलिस कमिश्नरेट ने नोएडा पुलिस कमिश्नरेट को आवश्यक कार्रवाई हेतु पत्र भेजा गया है। इसके अतिरिक्त, कि दंपति के अनुसार कैनरा बैंक के सतर्कता विभाग ने 29 मई 2026 को मामले की जांच प्रारंभ कर संबंधित अभिलेख तलब किए हैं। हालांकि दंपति ने बताया कि अतीत में कई बार संबंधित सरकारी विभागों, बैंक अधिकारियों और अन्य संस्थाओं के पास शिकायतें पहुँचाने के बावजूद उन्हें अब तक प्रभावी राहत नहीं मिली है। 71 वर्षीय अनिल प्रसाद और किरण प्रसाद की यह दुर्दशा केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं है — यह उस पूरी व्यवस्था पर सवालिया निशान है जो बुजुर्गों की रक्षा करने में विफल रही है। जब एक वृद्ध व्यक्ति यह कहने पर मजबूर हो जाए कि न्याय न मिले तो मृत्यु ही एकमात्र विकल्प है — तो यह सरकार, पुलिस, बैंकिंग तंत्र और न्यायिक प्रक्रिया सभी के लिए गहरी चिंता का विषय होना चाहिए। इस मामले में नोएडा पुलिस आयुक्त कार्यालय, संबंधित एसबीआई शाखा प्रबंधक और नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों का पक्ष जानने के लिए उनसे संपर्क किया गया, परंतु कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हुई।

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