Noida job fraud gang arrested: नोएडा, पुलिस कमिश्नरेट गौतमबुद्धनगर ने युवाओं को नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी करने वाले एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश करते हुए छह लोगों को गिरफ्तार किया है। इस कार्रवाई में साइबर क्राइम टीम, नोएडा जोन और थाना सेक्टर 20 पुलिस की संयुक्त टीम शामिल रही। पुलिस के अनुसार यह गिरोह पिछले करीब डेढ़ साल से नौकरी के इच्छुक युवाओं को झांसा देकर मोटी रकम वसूल रहा था।
कैसे हुआ खुलासा
एडीसीपी नोएडा मनीषा सिंह ने बताया कि पुलिस आयुक्त के निर्देशन में नोएडा जोन में अपराधियों के खिलाफ लगातार कार्रवाई चल रही है। इसी क्रम में थाना सेक्टर 20 को एक गुप्त सूचना मिली थी कि सेक्टर 27 स्थित अट्टा मार्केट की एक बिल्डिंग में फर्जी नौकरी दिलाने के नाम पर एक ऑफिस संचालित हो रहा है। जांच में सूचना सही पाए जाने पर 27 जुलाई 2026 को दबिश देकर मौके से चार महिलाओं और दो पुरुषों को गिरफ्तार किया गया।
गिरफ्तार आरोपियों का विवरण
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों में शामिल हैं:
1. श्वेता सिंह उर्फ प्रिया, पुत्री चन्द्र प्रताप सिंह — निवासी शुक्लागंज, उन्नाव
2. नीजू यादव, पुत्री मनोज यादव — निवासी सेक्टर 22, नोएडा (उम्र 29 वर्ष)
3. कीर्ति सिंह उर्फ मीरा, पत्नी उज्जवल सिंह — निवासी न्यू अशोक नगर, दिल्ली (उम्र 29 वर्ष)
4. पूजा, पुत्री लल्लू प्रसाद — निवासी अशोक नगर, दिल्ली (उम्र 27 वर्ष)
5. रूपेश कुमार, पुत्र राम कुमार सिंह — निवासी सेक्टर 22, नोएडा (उम्र 22 वर्ष)
6. आमीर राणा, पुत्र मईनूद्दीन — निवासी पिलखुआ, जिला हापुड़ (उम्र 46 वर्ष)
क्या-क्या हुआ बरामद
आरोपियों के कब्जे से पुलिस ने भारी मात्रा में सामान बरामद किया है, जिनमें शामिल हैं — 3 मोबाइल फोन, 11 फीस बुक, 4 रसीद बुक, 22 प्रचार-प्रसार पम्पलेट और 20 भरे हुए रिक्रूटमेंट फॉर्म। ये तमाम दस्तावेज गिरोह की कार्यप्रणाली और अब तक की गई ठगी की कड़ी को समझने में पुलिस के लिए अहम सबूत माने जा रहे हैं।
कैसे करते थे ठगी
एडीसीपी मनीषा सिंह ने बताया कि यह गिरोह जस्टडायल जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर फर्जी नौकरी के विज्ञापन प्रचारित करता था। इसके अलावा मेट्रो स्टेशनों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में पोस्टर व पम्पलेट चिपकाकर बेरोजगार युवाओं और मैनपावर की जरूरत वाली कंपनियों दोनों को निशाना बनाया जाता था। संपर्क होने पर आरोपी प्रोसेसिंग फीस के नाम पर पीड़ितों से करीब 1300 से 1500 रुपये या उससे अधिक की रकम वसूल लेते थे और बाद में न तो नौकरी दी जाती थी और न ही पैसा वापस किया जाता था। पुलिस पूछताछ में यह भी सामने आया कि गिरोह की मुख्य संचालिका का एक अन्य व्यवसाय भी है, जिसकी आड़ में उसने यह फर्जी ऑफिस खोल रखा था। इस काम में उसने और भी कई लोगों को नौकरी पर रख रखा था।
सैकड़ों लोग बने शिकार
पुलिस के मुताबिक अब तक की जांच में सामने आया है कि सैकड़ों की संख्या में युवा इस गिरोह की ठगी का शिकार हो चुके हैं। कई पीड़ित अपनी शिकायत लेकर थाने भी पहुंचे हैं। पुलिस अब आरोपियों के बैंक खातों और यूपीआई लेनदेन की जांच में जुटी है, क्योंकि कई शिकायतकर्ताओं ने बताया कि उन्होंने यूपीआई और बैंक ट्रांसफर के जरिए भी पैसा दिया था। इसके साथ ही आरोपियों के मोबाइल नंबरों की NCRP पोर्टल पर भी जांच कराई जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इनके खिलाफ पहले से कोई साइबर शिकायत दर्ज तो नहीं है।
दर्ज मुकदमा
इस मामले में थाना सेक्टर 20, नोएडा में मुकदमा अपराध संख्या 308/2026 के तहत बीएनएस की धारा 318(4) और आईटी एक्ट की धारा 66डी के अंतर्गत केस दर्ज किया गया है। सभी छह आरोपियों को गिरफ्तार कर माननीय न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया। पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि नौकरी के नाम पर किसी भी अनजान व्यक्ति या एजेंसी को पहले से फीस न दें और ऐसे किसी भी संदिग्ध विज्ञापन या ऑफिस की सूचना तुरंत नजदीकी थाने या साइबर क्राइम हेल्पलाइन को दें।

