नीट पेपर लीक के खिलाफ कॉकरोच जनता पार्टी का पहला शांतिपूर्ण प्रदर्शन, सोनम वांगचुक भी पहुँचे; अगले शनिवार फिर प्रदर्शन की घोषणा
राजधानी के ऐतिहासिक जंतर-मंतर पर शनिवार को एक अलग किस्म का आंदोलन उमड़ा, न कोई पार्टी का झंडा, न बसों में भरकर लाई गई भीड़, न खाने-पीने का लालच। हाथों में संविधान की प्रति, एक फूल और गुस्से से भरे पोस्टर लिए हजारों युवा देश के कोने-कोने से जंतर-मंतर पहुँचे। मौका था कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके के नेतृत्व में पहले बड़े विरोध प्रदर्शन का, जिसकी माँग थी: नीट पेपर लीक की जवाबदेही और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का तत्काल इस्तीफा।
‘जय भीम’ से शुरुआत, देशभर में प्रदर्शन की चेतावनी
अभिजीत दीपके ने डॉ. भीमराव अंबेडकर की किताब हाथ में लिए जंतर-मंतर पहुँचते ही ‘जय भीम’ के नारे से अपने संबोधन की शुरुआत की। हजारों समर्थक पहले से ही एकत्रित थे — कुछ के हाथों में किताबें और फूल, कुछ ने ‘कॉकरोच’ के मुखौटे पहन रखे थे। ‘धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो’ के पोस्टर चारों तरफ नज़र आ रहे थे। दीपके ने चेतावनी दी कि अगर धर्मेंद्र प्रधान शाम 5 बजे तक इस्तीफा नहीं देते, तो अगले एक हफ्ते में देश के कई शहरों में विरोध प्रदर्शन आयोजित किए जाएँगे। उन्होंने अगले शनिवार 13 जून को फिर जंतर-मंतर पर बड़े प्रदर्शन की घोषणा भी की।
सोनम वांगचुक भी पहुँचे — बोले, यह तो बस शुरुआत है
प्रसिद्ध वैज्ञानिक और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने मंगलवार 2 जून को ही घोषणा कर दी थी कि अगर धर्मेंद्र प्रधान 6 जून से पहले इस्तीफा नहीं देते, तो वे सीजेपी के जंतर-मंतर प्रदर्शन में शामिल होंगे। वांगचुक ने कहा था कि शिक्षा की इस “दिल तोड़ने वाली” स्थिति को देखते हुए कोई भी आत्मसम्मानी मंत्री स्वयं ही इस्तीफा दे देता। प्रदर्शन स्थल पर उन्होंने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की माँग तो केवल शुरुआत है।
नीट घोटाला: लाखों छात्रों का भविष्य दाँव पर
5 मई को राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) द्वारा आयोजित नीट-यूजी परीक्षा में करीब 24 लाख अभ्यर्थी बैठे थे। 4 जून को परिणाम घोषित होते ही बिहार समेत कई राज्यों में प्रश्नपत्र लीक और अन्य अनियमितताओं के आरोप सामने आने लगे। बिहार पुलिस ने लीक करने वाले आरोपियों के बयान दर्ज किए, जबकि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने पेपर लीक से साफ इनकार किया। जंतर-मंतर पर मिले छत्तीसगढ़ के रायपुर से आए एक प्रदर्शनकारी ने दर्द भरी आपबीती सुनाई: “मेरे दोस्त का यह चौथा प्रयास था, इस बार उसका पेपर लीक हो गया। वह इतना रो रहा था कि मुझसे देखा नहीं गया। मध्य प्रदेश में आकांक्षा नाम की एक लड़की ने तो जान दे दी क्योंकि वो दोबारा पेपर नहीं दे पा रही थी।” उनका सवाल था: “अगर सरकार पेपर नहीं करा सकती तो उसे बैठने का क्या अधिकार है?”
‘1,000 की भीड़ 1 लाख के बराबर’
दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति सुबह दी, जिससे कई लोग समय पर नहीं पहुँच सके। फिर भी जंतर-मंतर खचाखच भर गया। जो लोग पहुँचे, वे हैदराबाद, हिमाचल, रायपुर, केरल, गुड़गाँव और कानपुर जैसे दूर-दराज के इलाकों से अपना किराया खर्च कर आए थे। किसी को साड़ी नहीं दी गई, किसी के खाते में पैसे नहीं डाले गए, न ही बसें भेजी गईं। जामिया में शोध कर रहे केरल के लुबेब ने कहा: “यह एक ऑर्गेनिक प्रोटेस्ट है। सरकारी मशीनरी ने परमिशन देर से दी, छात्र नेताओं को पुलिस ने फोन कर डराया, इसके बावजूद लोग आए। इससे ज्यादा भीड़ हो सकती थी।”
पुराने लीक पीड़ित भी उठे
साकेत, दिल्ली के सीए पीयूष का दर्द नया नहीं था: “2018 में सीबीएसई 12वीं का मेरा इकोनॉमिक्स का पेपर लीक हुआ था। रीटेस्ट देना पड़ा था। ये जो बाहर आ जाता है वही नज़र आता है, लीक तो हर साल हो रहा है।” जेएनयू छात्र संघ की अध्यक्ष नेहा समेत कई छात्र संगठनों ने भी एनटीए को भंग करने और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की माँग दोहराई।
मीडिया, संविधान और जवाबदेही
पत्रकारिता छोड़ चुकीं भूमिका ने प्रदर्शन में बड़ा सवाल उठाया: “पिछले 10 सालों में 93,000 सरकारी स्कूल बंद हो गए हैं, ढाई करोड़ बच्चों ने स्कूल जाना बंद किया है, यह सवाल कोई मेनस्ट्रीम चैनल क्यों नहीं पूछता?” उन्होंने कहा कि वे किसी व्यक्ति या पार्टी का नहीं, बल्कि इस आंदोलन का समर्थन करती हैं। दिल्ली के दीपक अहूजा ने सीधे शब्दों में कहा: “आजाद भारत की सबसे डरपोक सरकार है यह। ये सरकार उस लाल माइक से भी डरती है जो सच दिखाता है।”
अगला कदम
सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने एक हफ्ते का अल्टीमेटम दे दिया है। उनका कहना है कि अगर माँगें नहीं मानी गईं तो देशभर के शहरों में प्रदर्शन होंगे और 13 जून को जंतर-मंतर पर फिर बड़ा जमावड़ा होगा। प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा। एक पोस्टर पर लिखी इबारत पूरे आंदोलन का सार बयान कर रही थी: “लॉस्ट एंड फाउंड, क्वेश्चन पेपर लॉस्ट, पब्लिक ट्रस्ट लॉस्ट, अकाउंटेबिलिटी लॉस्ट; एजुकेशन मिनिस्टर फाउंड , प्लीज रिटर्न रेजिग्नेशन एट द अर्लिएस्ट।”

