बैंककर्मी आस्था सिंह बोलीं, “वीडियो गलत संदर्भ में वायरल, मैं पीड़ित हूं”; दूसरे पक्ष की ऋतु त्रिपाठी ने लगाए गंभीर आरोप; थाने में दोनों तरफ से तहरीर, FIR की तलवार लटकी
उत्तर प्रदेश के कानपुर स्थित HDFC बैंक की पनकी शाखा का एक वायरल वीडियो इन दिनों पूरे देश में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। बैंक की पनकी ब्रांच की रिलेशनशिप मैनेजर आस्था सिंह का एक वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से फैला, जिसमें वह गुस्से में “मैं ठाकुर हूं…” कहते हुए नजर आईं। इस वीडियो ने जातिवाद, पेशेवर आचरण और महिला सुरक्षा जैसे कई सवाल एक साथ खड़े कर दिए हैं।
कब और कैसे शुरू हुआ विवाद?
यह पूरा मामला 6 जनवरी 2026 को पनकी HDFC बैंक शाखा में उस समय शुरू हुआ जब दो महिला कर्मचारियों — रिलेशनशिप मैनेजर आस्था सिंह और पूर्व कर्मचारी ऋतु त्रिपाठी के बीच झगड़ा हुआ। यह विवाद ऋतु के इस्तीफे की प्रक्रिया के दौरान उनके पति की उपस्थिति से और उग्र हो गया। आस्था सिंह के अनुसार, उनकी शाखा में ऋतु तिवारी नाम की एक महिला काम करती थीं, जिन्होंने नौकरी से इस्तीफा दिया था और घटना वाले दिन वह अपना रिलीविंग लेटर लेने के लिए शाखा में आई थीं। बाद में ऋतु ने अपनी ननद को, जो वहां उपस्थित थीं, इस बारे में जानकारी दी और उसके बाद उनके पति करीब शाम 4:30 बजे शाखा बंद होने के बाद पहुंचे और कथित रूप से बदतमीजी की। लगभग 7-8 फरवरी 2026 को सोशल मीडिया पर आस्था सिंह का एक 30-45 सेकंड का वीडियो वायरल हुआ, जिसमें आस्था गुस्से में लैपटॉप उठाकर धमकाती दिख रही हैं और “मैं ठाकुर हूं, ऐसी की तैसी कर दूंगी…” कहते हुए सुनाई दे रही हैं।
आस्था सिंह का पक्ष: “वीडियो अधूरा और भ्रामक है”
आस्था सिंह ने मीडिया से बातचीत में स्पष्ट किया कि यह घटना पूरी तरह गलत तरीके से पेश की जा रही है। उन्होंने कहा, “यह घटना किसी ग्राहक से नहीं जुड़ी। मामला मेरी सहकर्मी के पति से है, जिन्होंने मेरे साथ बदतमीजी की और वह वीडियो उसी का जवाब था। मैंने अपनी जाति तभी बताई जब मुझसे पूछा गया। मैं ठाकुर हूं और मुझे इस पर गर्व है।” आस्था ने यह भी बताया कि उस युवक ने उन पर चिल्लाया और धमकी दी। एक महिला होने के नाते जब उन्हें असुरक्षित महसूस हुआ, तब उन्होंने अपनी बात रखी। उनका यह भी कहना था कि वह बैंकिंग क्षेत्र में पिछले 12 वर्षों से कार्यरत हैं और पहले कभी किसी के साथ ऐसा व्यवहार नहीं किया। वायरल वीडियो के बाद उन्हें और उनके परिवार को भारी मानसिक तनाव और सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग का सामना करना पड़ रहा है। आस्था ने यह भी कहा, “दुर्भाग्य से मामले को अलग रंग दिया जा रहा है। जिस सहकर्मी की बात है वह ब्राह्मण हैं। मैं जरूर कानूनी कार्रवाई करूंगी क्योंकि इससे सोशल मीडिया पर मेरी छवि खराब हुई है।”
दूसरे पक्ष की कहानी: ऋतु मिश्रा का जवाबी आरोप
ऋतु मिश्रा ने अपनी तरफ से सफाई देते हुए बताया कि 6 जनवरी को वह अपनी ननद के साथ बैंक गई थीं। उनकी ननद वॉशरूम गई थीं जहां आस्था पहले से मौजूद थीं और दरवाजे पर ताला नहीं था, इसलिए ननद ने दरवाजा खोल दिया। इसी बात पर आस्था ने हंगामा शुरू किया, अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया और लैपटॉप से मारने की कोशिश भी की। ऋतु ने यह भी बताया कि उन्होंने बैंक इसलिए छोड़ा क्योंकि गाइडलाइन के अनुसार शाम 6:30 बजे छुट्टी होनी चाहिए थी, लेकिन उन्हें अक्सर रात 8-9 बजे तक रोका जाता था। 31 दिसंबर 2024 की रात उन्हें रात 11 बजे तक बैंक में बिठाए रखा गया जबकि घर पर उनकी 8 महीने की बच्ची अकेली थी। ब्रांच मैनेजर के व्यवहार से तंग आकर उन्होंने इस्तीफा देने का फैसला किया।
पुलिस जांच और ताजा स्थिति
पुलिस जांच में ताजा घटनाक्रम यह है कि थाना पनकी की पुलिस ने दोनों पक्षों को बुलाकर बातचीत कराई। ऋतु त्रिपाठी समझौते के लिए तैयार हैं बशर्ते आस्था माफी मांगें, जबकि आस्था सिंह FIR पर अड़ी हुई हैं। पुलिस ने मुंबई स्थित HDFC बैंक के मुख्यालय से CCTV फुटेज की मांग की है और जल्द ही बैंक स्टाफ के बयान लिए जाएंगे। पनकी थाना प्रभारी मनोज सिंह के अनुसार दोनों तरफ से तहरीरें आ चुकी हैं और वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर FIR दर्ज की जाएगी।
सोशल मीडिया पर जाति की आग
वायरल वीडियो के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इस मामले को “ब्राह्मण बनाम ठाकुर” का रंग दे दिया गया, जिससे विवाद और अधिक गर्मा गया। विशेषज्ञों का मानना है कि बिना पूरी सच्चाई जाने किसी को भी सोशल मीडिया पर निशाना बनाना सरासर गलत है और यह एक तरह के झूठे प्रचार का हिस्सा हो सकता है।
HDFC बैंक की चुप्पी
इस पूरे विवाद में बैंक प्रबंधन ने मामले से पल्ला झाड़ लिया है। बैंक की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, जबकि मामला सीधे उनकी शाखा और कर्मचारियों से जुड़ा है।
विशेषज्ञों की राय
इस पूरे प्रकरण ने कई गंभीर सवाल उठाए हैं। पहला, कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा और गरिमा का सवाल। दूसरा, सोशल मीडिया पर अधूरे वीडियो के जरिए किसी की छवि बर्बाद करने का खतरा। तीसरा, बैंकों में कर्मचारियों के अत्यधिक कार्य-भार और उनके मानसिक स्वास्थ्य का मुद्दा। और चौथा, सबसे महत्वपूर्ण, जातिगत पहचान को व्यक्तिगत विवादों में खींच लाने की बढ़ती प्रवृत्ति।
आगे क्या?
मामले की अगली कड़ी मुंबई से आने वाली CCTV फुटेज होगी, जो यह तय करेगी कि उस दिन बैंक में वास्तव में क्या हुआ था और झगड़े की शुरुआत किस तरफ से हुई। पुलिस सूत्रों के अनुसार दोनों पक्षों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं और फुटेज मिलते ही FIR का रास्ता साफ होगा।यह मामला महज एक बैंक विवाद नहीं रहा, बल्कि यह आज के भारत में जाति, लिंग, पेशेवर नैतिकता और सोशल मीडिया के दुरुपयोग के बीच के टकराव का एक प्रतीक बन गया है।

