लुधियाना फैक्ट्री में ज़हरीली गैस रिसाव से 3 मज़दूरों की मौत, 4 अस्पताल में भर्ती

पंजाब के औद्योगिक शहर में एक बार फिर सुरक्षा मानकों पर उठे सवाल, फैक्ट्री मालिक पर कार्रवाई की माँग

पंजाब के औद्योगिक नगर लुधियाना में एक फैक्ट्री से ज़हरीली गैस के रिसाव की दर्दनाक घटना सामने आई है, जिसमें तीन मज़दूरों की जान चली गई और चार अन्य को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है। यह दुखद घटना उस शहर में घटी है जो अपने विशाल औद्योगिक क्षेत्र के लिए जाना जाता है, लेकिन जहाँ फैक्ट्रियों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी की शिकायतें अक्सर सामने आती रही हैं।

कैसे हुई घटना

प्रत्यक्षदर्शियों और प्रारंभिक जाँच रिपोर्टों के अनुसार, फैक्ट्री के एक हिस्से में अचानक ज़हरीली गैस का रिसाव शुरू हुआ। उस वक्त कई मज़दूर काम पर मौजूद थे। गैस की तीखी गंध और घुटन भरे वातावरण के कारण मज़दूर बेहोश होने लगे। जो मज़दूर वहाँ फँसे रहे, उनमें से तीन की मौके पर या अस्पताल पहुँचते-पहुँचते मौत हो गई, जबकि चार अन्य को तत्काल नज़दीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जिनकी हालत नाज़ुक बताई जा रही है।

पहले भी हो चुकी हैं ऐसी त्रासदियाँ

यह पहली बार नहीं है कि लुधियाना में गैस रिसाव की ऐसी दुखद घटना सामने आई हो। इससे पहले अप्रैल 2023 में लुधियाना के घनी आबादी वाले गियासपुरा इलाके में एक बड़ा हादसा हुआ था, जब सीवर में किसी रसायन के मिलने से मीथेन गैस के साथ प्रतिक्रिया हुई और ज़हरीला धुआँ फैल गया था। उस हादसे में 11 लोगों की मौत हुई थी जिनमें तीन बच्चे भी शामिल थे, और NDRF (राष्ट्रीय आपदा मोचन बल) को मौके पर बुलाना पड़ा था। उस घटना में पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (PPCB) द्वारा हाइड्रोजन सल्फाइड गैस का उच्च स्तर दर्ज किया गया था, और अधिकारियों ने माना था कि सीवर में अवैध रूप से रसायन बहाने के कारण यह हुआ था।

जाँच और कार्रवाई की माँग

ताज़ा हादसे के बाद स्थानीय प्रशासन और पुलिस घटनास्थल पर पहुँच गई है। लुधियाना पुलिस आयुक्त द्वारा हादसे की जाँच के लिए एसआईटी (विशेष जाँच दल) गठित किए जाने की परंपरा रही है। इस बार भी श्रमिक संगठनों और विपक्षी दलों ने फैक्ट्री मालिक पर तत्काल FIR दर्ज करने और पीड़ित परिवारों को उचित मुआवज़ा देने की माँग की है।

प्रवासी मज़दूर सबसे ज़्यादा प्रभावित

लुधियाना के औद्योगिक क्षेत्रों में उत्तर प्रदेश और बिहार से आए प्रवासी मज़दूरों की बड़ी संख्या काम करती है, जो अक्सर इन हादसों के सबसे बड़े शिकार बनते हैं। ये मज़दूर कम मज़दूरी पर खतरनाक परिस्थितियों में काम करने को मजबूर होते हैं और उनके पास सुरक्षा उपकरणों की भारी कमी होती है।

औद्योगिक सुरक्षा पर बड़े सवाल

औद्योगिक विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में गैस रिसाव जैसी घटनाएँ कमज़ोर सुरक्षा मानकों और अपर्याप्त निगरानी के कारण बार-बार होती हैं। पहले की जाँचों में यह भी सामने आया था कि कुछ रासायनिक कारखाने बिना लाइसेंस के संचालित हो रहे थे और खतरनाक परिस्थितियों में नाबालिगों को भी काम पर रखा जाता था।

राज्य सरकार की प्रतिक्रिया

पंजाब सरकार ने घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है और पीड़ित परिवारों को सहायता का आश्वासन दिया है। पूर्व में ऐसी घटनाओं में राज्य सरकार ने मृतकों के परिजनों को 2 लाख रुपये और घायलों को 50,000 रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की थी। इस बार भी मुआवज़े की माँग उठ रही है।

बॉक्स: लुधियाना में प्रमुख औद्योगिक गैस हादसे

|वर्ष  |घटना                   |मौतें|

|—-|———————-|--|

|2015|अमोनिया गैस टैंकर दुर्घटना      |6 |

|2023|गियासपुरा में हाइड्रोजन सल्फाइड रिसाव|11|

|2026|फैक्ट्री में ज़हरीली गैस रिसाव      |3 |

लुधियाना जैसे औद्योगिक शहरों में बार-बार होने वाली ये दुर्घटनाएँ इस बात की गवाही देती हैं कि मज़दूरों की सुरक्षा महज़ कागज़ों तक सीमित है। जब तक कारखानों में सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन नहीं होगा और दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं होगी, ऐसी त्रासदियाँ दोहराती रहेंगी।

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