CWG 2026 Live: ग्लासगो में जारी कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के आठवें दिन भारत के लिए यादगार पल आए, जब जूडो में देश को अपने इतिहास के पहले दो स्वर्ण पदक हासिल हुए। यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में भारत को जूडो में इससे पहले कभी गोल्ड मेडल नहीं मिला था।
असमिता डे ने रचा इतिहास
त्रिपुरा के बेलोनिया की रहने वाली असमिता डे ने महिलाओं की 48 किलोग्राम भारवर्ग के फाइनल में कनाडा की हाइडी क्वाच को यूको के आधार पर 2-1 से हराकर स्वर्ण पदक जीता। इसी के साथ वह कॉमनवेल्थ गेम्स इतिहास में जूडो में गोल्ड मेडल जीतने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी (पुरुष या महिला) बन गईं। साइकिल मैकेनिक की बेटी असमिता का सफर आसान नहीं रहा। शुरुआत में वह 800 मीटर दौड़ में हिस्सा लेती थीं, लेकिन बाद में उन्हें जूडो से जोड़ा गया। 2015 में त्रिपुरा स्पोर्ट्स स्कूल और फिर 2018 में साई क्षेत्रीय केंद्र, भोपाल (एनसीओई) से जुड़ने के बाद उनके करियर ने रफ्तार पकड़ी। सेमीफाइनल में उन्होंने स्कॉटलैंड की समर शॉ को हराकर फाइनल का टिकट कटाया था।
हर्ष सिंह ने भी जीता गोल्ड
असमिता डे की जीत के कुछ ही देर बाद हर्ष सिंह ने पुरुषों के 60 किलोग्राम भारवर्ग के फाइनल में ऑस्ट्रेलिया के ओलंपियन जोशुआ काट्ज़ को हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इस जीत के साथ हर्ष सिंह कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीतने वाले पहले भारतीय पुरुष जूडोका बन गए। सेमीफाइनल में उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के ही पेड्रो कार्लोस एंटुन नेटो को वाजा-आरी से हराया था। इस तरह जूडो में भारत के खाते में दिन भर में दो ऐतिहासिक स्वर्ण पदक जुड़ गए।
मुक्केबाजी में भी भारत का दबदबा
जूडो के अलावा मुक्केबाजी में भी भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन जारी रखा। शुक्रवार को सेमीफाइनल मुकाबलों में भारत का रिकॉर्ड पांच जीत से पांच रहा। जादुमणि सिंह मंडेंगबाम ने पुरुषों के 50 किलोग्राम भारवर्ग के सेमीफाइनल में नामीबिया के फिलिप हाओसेब को 5-0 से हराकर फाइनल में जगह बनाई और भारत के लिए कम से कम रजत पदक पक्का किया। वहीं अरुंधति चौधरी ने महिलाओं के 70 किलोग्राम वर्ग के सेमीफाइनल में बर्मिंघम 2022 की स्वर्ण पदक विजेता रही वेल्स की रोजी एक्लेस को 4-0 से मात देकर फाइनल में प्रवेश किया। ओलंपियन जैस्मीन लांबोरिया ने भी दमदार प्रदर्शन करते हुए महिलाओं के 57 किलोग्राम भारवर्ग के फाइनल में जगह बनाई, उन्होंने लेसोथो की रापेलांग मासेलेला को आरएससी के आधार पर हराया।
इनके अलावा साक्षी चौधरी, प्रीति पवार, प्रिया घनघस, ओलंपिक पदक विजेता लवलीना बोरगोहेन, सचिन सिवाच, अंकुश पंघाल और नरेंदर बेरवाल भी सेमीफाइनल मुकाबलों में उतरे। इस शानदार प्रदर्शन के साथ भारत के कुल पांच मुक्केबाज अलग-अलग भारवर्गों के फाइनल में पहुंच चुके हैं, जिससे देश को मुक्केबाजी में भी कई पदकों की उम्मीद बंध गई है। गौरतलब है कि भारत ने अब तक कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में मुक्केबाजी में कुल 44 पदक जीते हैं, जिनमें 11 स्वर्ण शामिल हैं। ग्लासगो में जारी यह टूर्नामेंट भारतीय खेल प्रेमियों के लिए यादगार साबित हो रहा है, जहां एक ही दिन में जूडो जैसे कम चर्चित खेल में दो ऐतिहासिक स्वर्ण पदक और मुक्केबाजी में पांच फाइनलिस्ट भारत की बढ़ती खेल ताकत का प्रमाण हैं।
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