₹200 crore fraud in ‘The Aranya’: सीबीआई ने तेज की ‘द अरण्या’ ग्रुप हाउसिंग घोटाले की जांच, नोएडा प्राधिकरण के दो अधिकारियों से दस्तावेज तलब

₹200 crore fraud in ‘The Aranya: नोएडा के सेक्टर-119 में स्थित ‘द अरण्या’ ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट में लगभग 200 करोड़ रुपये की ठगी के मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने जांच को निर्णायक चरण में पहुंचा दिया है।  जांच एजेंसी ने बुधवार को नोएडा प्राधिकरण के ग्रुप हाउसिंग और प्लानिंग विभाग के दो वरिष्ठ अधिकारियों को परियोजना से जुड़े मूल कागजात के साथ समन भेजा।

दस्तावेजों पर हस्ताक्षर को लेकर हुआ विवाद

जांच के दौरान एक ऐसा मामला उजागर हुआ जिसने नोएडा प्राधिकरण की कार्यशैली पर भी संदेह पैदा कर दिया है।  सूत्रों के मुताबिक, ग्रुप हाउसिंग विभाग के मैनेजर विवेक गोयल और प्लानिंग विभाग के सीनियर मैनेजर वैभव गुप्ता मूल रिकॉर्ड और उसकी कॉपी लेकर सीबीआई कार्यालय पहुंचे।  जांच एजेंसी ने दस्तावेजों की प्रमाणिकता सुनिश्चित करने के लिए दोनों अधिकारियों से प्रतियों पर हस्ताक्षर करने को कहा। शुरुआती दौर में दोनों अधिकारी दस्तावेजों पर साइन करने से हिचक रहे थे, लेकिन सीबीआई की कड़ी मांग के बाद उन्हें हस्ताक्षर करने पड़े।  इस दौरान जांच टीम ने उन्हें जमकर फटकार भी लगाई।  सूत्रों के अनुसार, ग्रुप हाउसिंग विभाग में लंबे समय से तैनात रहने के बावजूद विवेक गोयल परियोजना से जुड़े कई अहम प्रश्नों का संतोषजनक उत्तर नहीं दे सके।  इस पर सीबीआई ने नाराजगी जताते हुए रिकॉर्ड रखने और जानकारी मुहैया कराने के तरीकों पर सवाल उठाए।

किन दस्तावेजों की मांग की गई?

सीबीआई ने परियोजना से जुड़े कई अहम मामलों के प्रमाणिक दस्तावेज मांगे हैं, जिनमें शामिल हैं,  बिल्डर को परियोजना का आवंटन कब किया गया और कब्जा कब सौंपा गया। आवंटन के वक्त कितना भुगतान हुआ और वर्तमान में कितनी राशि बकाया है। बकाया वसूली के लिए नोएडा प्राधिकरण ने कितनी बार नोटिस भेजे। कितने टॉवर और फ्लैट पूर्ण हो चुके हैं और कितने अभी अधूरे हैं। कितने फ्लैटों की रजिस्ट्रेशन हुई और कितनी रहीं लंबित। परियोजना में रहने वालों की मौजूदा स्थिति संबंधी जानकारी

ईडी की पिछली कार्रवाई और गिरफ्तारी

इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) पहले ही सक्रिय हो चुकी है।  अप्रैल 2025 में ईडी ने इस मामले में 200 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के संदेह में ‘द अरण्या’ प्रोजेक्ट पर छापेमारी की थी।  आरोप है कि बैंक से सेटलमेंट के बाद फ्लैटों को दोबारा बेचा गया और बिना बिके फ्लैटों को दोगुनी कीमत पर बेचने की जानकारी मिलने पर यह कार्रवाई की गई। सितंबर 2025 में ईडी ने इस प्रोजेक्ट में 100.06 करोड़ रुपये की संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच किया था। इससे पहले, अप्रैल 2025 में ईडी ने परियोजना की पैरेंट कंपनी उन्नति फार्च्यून होल्डिंग्स प्राइवेट लिमिटेड के प्रमोटर अनिल मिथस को गिरफ्तार किया था।  मिथस को 119 करोड़ रुपये के धन शोधन मामले में धनराशि के दुरुपयोग का दोषी पाया गया था।

जांच का दायरा बढ़ा

सीबीआई अब इन दस्तावेजों के आधार पर यह पुख्ता कर रही है कि परियोजना के दौरान नियमानुसार कार्य हुआ या नहीं, बकाया वसूली में कोई लापरवाही तो नहीं हुई और निवेशकों के साथ हुई ठगी में किस हद तक जिम्मेदारी तय होती है।  इस जांच की आंच अब सिर्फ बिल्डर तक ही सीमित नहीं रही, बल्कि नोएडा प्राधिकरण की भूमिका भी जांच के दायरे में आ चुकी है।

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