कोटा अस्पताल त्रासदी: राजस्थान के कोटा स्थित न्यू मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में सिजेरियन ऑपरेशन के बाद एक के बाद एक प्रसूताओं की मौत का सिलसिला जारी रहने और ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन के एक बैच के नकली पाए जाने की रिपोर्ट सामने आने के बाद यह मामला अब राष्ट्रीय स्वास्थ्य संकट का रूप ले चुका है। 4 मई 2026 को कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में सिजेरियन डिलीवरी के बाद एक महिला की मौत हो गई और पाँच अन्य महिलाओं की हालत गंभीर हो गई। इसके बाद सात दिनों के भीतर कुल चार महिलाओं की मौत हो गई , और मृतकों की संख्या पाँच तक पहुँचने की आशंका जताई जा रही है।
क्या है पूरा मामला?
कोटा के सरकारी अस्पतालों में सिजेरियन सर्जरी के बाद कई महिलाओं की मौत हुई है और अनेक महिलाएँ किडनी फेल्योर जैसी गंभीर जटिलताओं से जूझ रही हैं। पीड़ित परिवारों ने चिकित्सकीय लापरवाही, विलंबित उपचार और घटिया दवाओं के उपयोग का आरोप लगाया है। परिवारों ने यह भी आरोप लगाया कि ऑपरेशन थिएटर में काई की परत दिखाई दे रही थी और सर्जरी के बाद तेज दर्द की बार-बार शिकायत के बावजूद डॉक्टरों ने ध्यान नहीं दिया। पीड़ित परिवारों के एक प्रतिनिधि ने बताया कि सभी मामलों में लक्षण एक जैसे थे ऑपरेशन के बाद अचानक ब्लड प्रेशर गिरना और किडनी फेल होना। यह भी आरोप लगाया गया कि डॉक्टर व्यक्तिगत रूप से घटिया दवाओं के उपयोग पर संदेह जता रहे थे, लेकिन सार्वजनिक रूप से बोलने से हिचकिचा रहे थे।
नकली ऑक्सीटोसिन की पुष्टि, 24 दवाएँ प्रतिबंधित
राजस्थान सरकार ने ड्रग कंट्रोल विभाग के माध्यम से एहतियातन पूरे राज्य में 24 दवाओं और चिकित्सा उपकरणों की बिक्री, उपयोग और वितरण पर अगले आदेश तक प्रतिबंध लगा दिया है। प्रतिबंधित वस्तुओं में इंजेक्शन, ग्लूकोज बोतलें, IV सेट, सिरिंज, कैथेटर और सर्जरी व प्रसव के दौरान उपयोग होने वाली अन्य सामग्री शामिल हैं। इन 24 में से 15 दवाएँ और चिकित्सा सामग्री राजस्थान मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड (RMSCL) द्वारा मुख्यमंत्री निशुल्क दवा योजना के तहत आपूर्ति की गई थीं, जिनमें IV सेट, सिरिंज, ग्लूकोज बोतलें और विभिन्न प्रकार के इंजेक्शन शामिल हैं। इसके अलावा नौ अन्य दवाएँ और उपकरण मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने स्थानीय स्तर पर खरीदे थे और मरीजों पर इस्तेमाल किए गए थे। ड्रग कंट्रोलर अजय फाटक ने RMSCL और राज्य भर के दवा विक्रेताओं को निर्देश दिए हैं कि जिन दवाओं और उपकरणों के नमूने प्रयोगशाला परीक्षण के लिए भेजे गए हैं, उन्हें जाँच रिपोर्ट आने तक किसी भी सरकारी अस्पताल या मेडिकल कॉलेज में उपयोग न किया जाए।
AIIMS की उच्चस्तरीय जाँच टीम तैनात
मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा के निर्देश पर AIIMS दिल्ली और AIIMS जोधपुर के डॉक्टरों की एक उच्चस्तरीय समिति गठित की गई है। इस समिति की अध्यक्षता AIIMS दिल्ली की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. रीता महेय कर रही हैं और इसमें सामाजिक चिकित्सा, अस्पताल प्रबंधन, सूक्ष्म जीव विज्ञान, बेहोशी विज्ञान और बाल चिकित्सा विशेषज्ञ भी शामिल हैं। जाँच दल ने कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल और जेके लोन सरकारी अस्पताल का निरीक्षण किया। परिवारों ने नसबंदी में लापरवाही, दूषित इंजेक्शनों के उपयोग, विलंबित इलाज और अपर्याप्त निगरानी के आरोप लगाए हैं, हालाँकि आधिकारिक कारण अभी जाँच के दायरे में है।
डॉक्टर व नर्सें निलंबित, प्रशासनिक कार्रवाई तेज
जाँच के बाद एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. नवनीत कुमार को निलंबित कर दिया गया, जबकि अनुबंध पर कार्यरत डॉ. श्रद्धा उपाध्याय को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया। नर्सिंग अधिकारी गुरजोत कौर और निमेश वर्मा को भी निलंबित किया गया, और वरिष्ठ डॉक्टरों को नोटिस जारी किए गए। जाँच में यह बात सामने आई कि 24 संदिग्ध दवाओं में 15 RMSCL के स्टॉक से कोटा भेजी गई थीं और नौ स्थानीय स्तर पर खरीदी गई थीं सभी के नमूने प्रयोगशाला परीक्षण के लिए भेजे गए हैं।
लोकसभा अध्यक्ष और मुख्यमंत्री सक्रिय
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा से इस मामले पर बातचीत की। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने त्वरित जाँच के निर्देश दिए हैं और चिकित्सा शिक्षा विभाग की प्रमुख सचिव गायत्री राठौर ने कहा है कि प्रारंभिक जाँच में चिकित्सा प्रोटोकॉल और प्रक्रियाओं का पालन करने में गंभीर लापरवाही के संकेत मिले हैं।
सरकारी स्वास्थ्य आपूर्ति श्रृंखला पर उठे सवाल
यह मामला केवल एक अस्पताल की विफलता नहीं, बल्कि सरकारी दवा आपूर्ति तंत्र पर गहरे सवाल खड़े करता है। जयपुर से भेजी गई विशेषज्ञ डॉक्टरों की चार सदस्यीय टीम ने ऑपरेशन थिएटरों में नसबंदी की खामियाँ भी पाई हैं। इंजेक्शनों की गुणवत्ता जाँच और आपूर्ति श्रृंखला की निगरानी में चूक का यह मामला देश भर में सरकारी अस्पतालों में दवाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठाता है। फिलहाल प्रयोगशाला जाँच रिपोर्ट का इंतजार है और AIIMS टीम की सिफारिशें आने के बाद आगे की कार्रवाई होने की संभावना है। मामले की जाँच जारी है।

