‘अवैध प्रथा पर लगाम’, इलाहाबाद हाईकोर्ट का सख्त आदेश, रात 10 बजे के बाद शादियों में DJ और लाउडस्पीकर पूरी तरह बंद

ध्वनि प्रदूषण को ‘स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा’ बताते हुए न्यायालय ने पुलिस, नगर निगम और प्रशासन को सख्त कार्रवाई के दिए निर्देश; यूपी के सभी 18 मंडलों में होगा पार्कों का सर्वे, उत्तर प्रदेश में शादी-विवाह के मौसम में देर रात तक बजने वाले DJ और लाउडस्पीकर की गूंज अब आम लोगों की नींद और सुकून नहीं छीन पाएगी। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाते हुए साफ़ शब्दों में कहा है कि रात 10 बजे के बाद किसी भी शादी, विवाह समारोह या सामाजिक आयोजन में DJ बजाना और लाउडस्पीकर का उपयोग करना न केवल क़ानूनी रूप से प्रतिबंधित है, बल्कि यह एक “अवैध प्रथा” है जिसे किसी भी क़ीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की खंडपीठ ने यह आदेश एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आम नागरिकों, बच्चों और बुजुर्गों को होने वाली असुविधा को देखते हुए यह कदम अत्यंत जरूरी है। अदालत ने राज्य सरकार, पुलिस महकमे, नगर निगम और लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) — सभी को सुप्रीम कोर्ट के पूर्व आदेशों के अनुरूप सख्त और तत्काल कार्रवाई करने का आदेश दिया है।

क्या कहा अदालत ने?

अदालत ने इस पूरे मामले को महज़ शोर-शराबे की शिकायत नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य और नागरिक अधिकारों का गंभीर उल्लंघन बताया। ध्वनि प्रदूषण (नियंत्रण एवं विनियमन) नियम, 2000 के तहत रात 10 बजे से सुबह 6 बजे के बीच ड्रम, तुरही, साउंड एम्पलीफायर या किसी भी प्रकार के लाउडस्पीकर का उपयोग सार्वजनिक आपात स्थिति के अलावा पूर्णतः प्रतिबंधित है।  कोर्ट ने यह भी रेखांकित किया कि DJ सिस्टम में एक साथ कई एम्पलीफायर जुड़े होते हैं और उनसे निकलने वाली संयुक्त ध्वनि हज़ार डेसिबल से भी अधिक हो सकती है — जो कि निर्धारित सीमा से कहीं ऊपर है। अदालत ने कहा था कि DJ से निकलने वाली ध्वनि अत्यंत अप्रिय और हानिकारक स्तर की होती है और न्यूनतम वॉल्यूम पर भी यह निर्धारित मानकों का उल्लंघन करती है।

पार्कों का होगा सर्वे, व्यावसायिक उपयोग पर रोक

अदालत ने प्रदेश के सभी 18 मंडलों के मंडलायुक्तों और जिलाधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में पार्कों, खेल के मैदानों और खुली जगहों का विस्तृत सर्वे करें। इन स्थानों को उत्तर प्रदेश पार्क, खेल मैदान और खुली जगह संरक्षण एवं विनियमन अधिनियम 1975 के तहत सरकारी सूची में शामिल किया जाएगा।  अदालत ने यह भी कहा कि इन सार्वजनिक स्थानों का उपयोग तय उद्देश्य के अलावा किसी अन्य गतिविधि के लिए नहीं किया जा सकता, जब तक कि इसके लिए सक्षम प्राधिकरण से अनुमति न ली जाए। हाईकोर्ट ने LDA को निर्देश दिया कि वह जनेश्वर मिश्र पार्क सहित अन्य पार्कों के व्यावसायिक उपयोग पर पुनर्विचार करे।  कोर्ट ने टिप्पणी की कि पार्कों में होने वाली व्यावसायिक और सामाजिक गतिविधियों से न केवल ध्वनि प्रदूषण बढ़ता है, बल्कि वहां रहने वाले पक्षियों और अन्य जीवों पर भी इसका नकारात्मक असर पड़ता है।

पृष्ठभूमि: पुराना आदेश और सुप्रीम कोर्ट की टकराहट

यह पहली बार नहीं है जब इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाया हो। अगस्त 2019 में भी हाईकोर्ट ने ध्वनि प्रदूषण का हवाला देते हुए पूरे उत्तर प्रदेश में DJ पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया था और राज्य सरकार को इससे जुड़ी शिकायतें दर्ज करने के लिए एक टोल-फ्री नंबर जारी करने का निर्देश दिया था। उस आदेश में उल्लंघन पर पांच साल की सज़ा और एक लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान था। हालांकि बाद में सुप्रीम कोर्ट ने उस व्यापक प्रतिबंध को इस आधार पर स्थगित कर दिया था कि DJ से जीविका कमाने वाले हज़ारों लोगों का रोज़गार प्रभावित हो रहा था। अब हाईकोर्ट की नई पीठ ने फिर से इस मुद्दे को उठाते हुए रात 10 बजे के बाद के प्रतिबंध को सख्ती से लागू करने का आदेश दिया है जो कानूनी रूप से पहले से ही प्रभावी है, परंतु ज़मीन पर अनदेखी का शिकार रहा है।

शिकायत और कार्रवाई की व्यवस्था

अदालत ने यह भी कहा है कि ध्वनि प्रदूषण नियमों के उल्लंघन की शिकायत ईमेल, SMS और WhatsApp के जरिए भी दर्ज कराई जा सकती है। पुलिस को निर्देश दिया गया है कि वह रात 10 बजे के बाद किसी भी शिकायत पर तत्काल कार्रवाई करे और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ दंडात्मक कार्यवाही की जाए।

विशेषज्ञों की राय

पर्यावरण विशेषज्ञों और चिकित्सकों ने अदालत के इस कदम की सराहना की है। उनका कहना है कि अत्यधिक ध्वनि प्रदूषण से बहरापन, उच्च रक्तचाप, नींद संबंधी विकार और हृदय रोग जैसी समस्याएं बढ़ती हैं। भारत में न्यायालयों ने बार-बार माना है कि धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन महत्वपूर्ण हैं, लेकिन वे दूसरों के स्वास्थ्य और शांति को नुकसान नहीं पहुंचा सकते। यह आदेश उत्तर प्रदेश में लाखों उन नागरिकों के लिए राहत की खबर है जो शादी के मौसम में रात भर बजने वाले DJ की आवाज़ से परेशान रहते हैं। अब देखना यह है कि प्रशासन इस आदेश को वास्तव में ज़मीन पर कितनी सख्ती से लागू करता है।

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