पश्चिम बंगाल के आसनसोल में शुक्रवार रात लाउडस्पीकर की आवाज कम करने और उसके नियम लागू करने को लेकर उपजे विवाद ने तनाव का रूप ले लिया, जिसमें उग्र भीड़ ने शहर के जहांगीरी मोहल्ला पुलिस चौकी पर जमकर पथराव और तोड़फोड़ की। बाद में पुलिस ने लाठीचार्ज कर कार्रवाई की और आंसू गैस के गोले छोड़ दिए, जिससे इलाके में स्थिति कुछ देर तक अत्यंत तनावपूर्ण रही।
लाउडस्पीकर पर तनाव कैसे बढ़ा
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, जहांगीरी मोहल्ला इलाके में एक मस्जिद पर लगे लाउडस्पीकर की आवाज को लेकर कई नागरिकों ने शिकायत की थी, जिसके बाद पुलिस ने धार्मिक स्थलों पर लाउडस्पीकर के प्रयोग के नियम लागू करने के लिए टीम भेजी। निर्देश के बाद भी लाउडस्पीकर की आवाज को लेकर कुछ लोगों को आपत्ति थी, जिससे तीखा विवाद शुरू हो गया और धीरे‑धीरे भीड़ बढ़ने लगी।
पुलिस चौकी पर हमला और तोड़फोड़
सूत्रों के अनुसार, शुक्रवार देर रात जहांगीरी मोहल्ला पुलिस चौकी से जुड़े विवाद के बाद सैकड़ों लोगों की भीड़ ने चौकी का घेराव कर लिया और दीवारों पर पथराव, जाली तोड़ने और कर्मचारियों के वाहनों को क्षतिग्रस्त करने जैसी तोड़‑फोड़ की। इस दौरान पुलिस कर्मी भीतर फंसे हुए थे और भीड़ ने चौकी के बाहर ही उपद्रव मचाना शुरू कर दियBonus्य, जिससे स्थानीय निवासियों में भी दहशत फैल गई।
लाठीचार्ज, आंसू गैस और शामिलों की पहचान
पुलिस के अनुसार, जब भीड़ ने खुद को नहीं रोका और चौकी पर हमला जारी रखा तो बल ने लाठीचार्ज कर हालात को नियंत्रित करने का प्रयास किया और आंसू गैस के गोले छोड़े गए। इस कार्रवाई के बाद भीड़ का दबाव कुछ हद तक कम हुआ, हालांकि घटना के बाद इलाके में भारी पुलिस बल तैनात किया गया और अधिकारी CCTV फुटेज के आधार पर उपद्रव में शामिल लोगों की पहचान कर रहे हैं।
व्यापक राजनीतिक और सामाजिक पृष्ठभूमि
जानकार मानते हैं कि आसनसोल का यह घटनाक्रम राज्य सरकार की ओर से लाउडस्पीकर के दुरुपयोग, नोटीफिकेशन और नियमों को लेकर बढ़ती कार्रवाई के पृष्ठभूमि में आया है, जहां पुलिस को विभिन्न धार्मिक स्थलों पर लाउडस्पीकर के प्रयोग पर निगरानी रखने के निर्देश दिए गए थे। अधिकारियों का दावा है कि अब इन नियमों को “सख्ती” से लागू करने की कोशिश की जा रही है, लेकिन इसी दौरान आसनसोल जैसी घटनाएं ने साम्प्रदायिक संवेदनशीलता और कानून व्यवस्था की चुनौतियों को भी उजागर कर दिया है।

