अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चीन यात्रा के दूसरे दिन राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ हुई वार्ता में कोई बड़ा ब्रेकथ्रू नहीं हुआ, लेकिन ईरान संकट, ताइवान और व्यापार जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। इसी बीच ईरान के साथ शांति वार्ता में प्रगति धीमी रही है, जबकि इजराइल-लेबनान युद्धविराम 45 दिनों के लिए बढ़ा दिया गया है।
ट्रंप ने बीजिंग से रवाना होने से पहले कहा कि शी जिनपिंग ने ईरान को सैन्य उपकरण न देने और संघर्ष समाप्त करने में मदद करने का वादा किया है। उन्होंने ईरान पर न्यूक्लियर हथियार न बनाने और युद्ध समाप्त करने को लेकर दोनों देशों की सोच में समानता बताई। हालांकि, चीन की आधिकारिक घोषणा में ईरान का जिक्र नहीं किया गया और विदेश मंत्रालय ने इस मुद्दे पर सवालों से किनारा कर लिया। ट्रंप ने कहा कि उन्हें चीन से कोई “एहसान” नहीं चाहिए, जिससे लगता है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने के लिए चीन के दबाव पर कोई ठोस प्रतिबद्धता नहीं बनी।
ईरान ने अमेरिका के साथ यूरेनियम संवर्धन के मुद्दे पर कोई सहमति न बनने की बात कही है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने कहा कि यह जटिल मुद्दा है, इसलिए इसे बाद के चरणों के लिए टाल दिया गया है। ट्रंप ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा था कि या तो डील करो वरना “annihilated” (नष्ट) हो जाओगे। उन्होंने फॉक्स न्यूज को दिए साक्षात्कार में ईरान की क्षमता पर फिर से हमला करने की ताकत जताई। दूसरी ओर, अमेरिकी विदेश विभाग ने इजराइल-लेबनान युद्धविराम को 45 दिनों के लिए बढ़ाने की घोषणा की। वाशिंगटन में दो दिनों की बातचीत के बाद यह फैसला लिया गया। अगले दौर की राजनीतिक बातचीत 2-3 जून को होगी, जबकि सुरक्षा संबंधी बातचीत 29 मई से पेंटागन के माध्यम से शुरू होगी।
ताइवान पर शी की सख्त चेतावनी
शी जिनपिंग ने ट्रंप को साफ चेतावनी दी कि अगर ताइवान मुद्दे को “सही तरीके” से नहीं संभाला गया तो अमेरिका और चीन के बीच “टकराव और यहां तक कि संघर्ष” हो सकता है। ट्रंप ने कहा कि उन्होंने ताइवान पर कोई प्रतिबद्धता नहीं दी और हथियार बिक्री पर फैसला अभी लंबित है। उन्होंने 140 अरब डॉलर के हथियार पैकेज पर हस्ताक्षर टाल रखे हैं।
व्यापार पर कुछ प्रगति
ट्रंप ने दावा किया कि चीन 200 बोइंग जेट खरीदने पर सहमत हुआ है और भविष्य में 750 विमानों का सबसे बड़ा ऑर्डर हो सकता है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि के अनुसार, चीन अगले कुछ वर्षों में अरबों डॉलर के कृषि उत्पाद भी खरीद सकता है। हालांकि, इन सौदों की पुष्टि बीजिंग या बोइंग की ओर से नहीं हुई है। टैरिफ पर चर्चा नहीं हुई।
विश्लेषण
ट्रंप-शी शिखर वार्ता pomp और pageantry से भरी रही, लेकिन कठिन मुद्दों पर कोई बड़ा समाधान नहीं निकला। ईरान पर चीन की मदद से होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने की उम्मीद अधर में लटकी हुई है, जबकि ताइवान पर तनाव बरकरार है। ईरान की ओर से शांति वार्ता में “गंभीरता” जताई जा रही है, लेकिन यूरेनियम और अन्य मुद्दों पर गतिरोध जारी है।
विदेश नीति विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों नेताओं की मुलाकात स्थिरता की ओर एक कदम है, लेकिन जटिल वैश्विक चुनौतियों का समाधान अभी दूर है। ट्रंप की “डीलमेकर” छवि और शी की रणनीतिक मजबूती के बीच संतुलन बनाना दोनों देशों के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है। अभी स्थिति नजर रखने वाली है, क्योंकि ईरान वार्ता के अगले दौर और ट्रंप की घर वापसी के बाद आगे की दिशा स्पष्ट होगी।

