ट्रंप की चीन यात्रा से पहले ईरान युद्ध की छाया, अमेरिकी जेब पर बोझ, पाकिस्तान की भूमिका पर सवाल 

ईरान के साथ जारी संघर्ष अब अमेरिकी अर्थव्यवस्था और घरेलू जेब दोनों पर भारी पड़ रहा है। पेंटागन के अनुसार युद्ध की लागत 29 अरब डॉलर तक पहुंच चुकी है, जबकि मुद्रास्फीति तीन साल के उच्चतम स्तर पर है और किराने के सामान की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं। इसी बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चीन की यात्रा पर रवाना हो रहे हैं, जहां ताइवान नीति और ईरान मुद्दा चर्चा के केंद्र में रहेंगे। पाकिस्तान की मध्यस्थ भूमिका पर भी विवाद छिड़ गया है।

फरवरी के अंत में अमेरिका-इजराइल के संयुक्त हमलों के बाद शुरू हुए ईरान युद्ध को अब 11 सप्ताह से अधिक हो चुके हैं। दो सप्ताह के सीजफायर के बाद पाकिस्तान में अप्रैल की बातचीत नाकाम रही, लेकिन ट्रंप ने सीजफायर को अनिश्चितकाल के लिए बढ़ा दिया है और बातचीत पूरी होने तक ब्लॉकेड जारी रखने की घोषणा की है। ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बागेर घलीबाफ ने कहा है कि ईरान का 14-पॉइंट शांति प्रस्ताव ही एकमात्र विकल्प है।

युद्ध की सबसे प्रत्यक्ष मार अमेरिकी उपभोक्ताओं पर पड़ रही है। पेंटागन के एक अधिकारी ने कांग्रेस को बताया कि युद्ध की लागत दो सप्ताह पहले के 25 अरब डॉलर से बढ़कर 29 अरब डॉलर हो गई है, जिसमें गोला-बारूद, उपकरण प्रतिस्थापन और परिचालन खर्च शामिल हैं। वाशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल में किराने की कीमतें लगभग चार साल की सबसे तेज गति से बढ़ी हैं। बीफ जैसी वस्तुओं की कीमतें सबसे अधिक प्रभावित हुई हैं। गैसोलीन की औसत कीमत 4.50 डॉलर प्रति गैलन तक पहुंच गई है—युद्ध शुरू होने के बाद से 1.50 डॉलर की बढ़ोतरी। मुद्रास्फीति तीन साल के उच्चतम स्तर पर है। ट्रंप ने गैस टैक्स सस्पेंड करने का सुझाव दिया है, लेकिन उन्होंने स्पष्ट कहा, “ईरान वार्ता में मैं अमेरिकियों की वित्तीय स्थिति के बारे में सोचता भी नहीं। मेरा एकमात्र फोकस है कि ईरान को न्यूक्लियर हथियार नहीं मिलने चाहिए।”

पाकिस्तान की भूमिका 

रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने पाकिस्तान पर भरोसा न करने की बात कही। सीबीएस न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, सीजफायर के बाद ईरानी सैन्य विमान पाकिस्तानी एयरबेस पर पार्क किए गए, जो संभवतः अमेरिकी हमलों से बचाव के लिए था। ग्राहम ने कहा, “मैं पाकिस्तान पर जितना फेंक सकता हूं, उतना ही भरोसा करता हूं। अगर वे ईरानी संपत्तियों की सुरक्षा कर रहे हैं तो मध्यस्थता के लिए कोई और देश देखना चाहिए।” पाकिस्तान ने इन आरोपों को खारिज किया और कहा कि दोनों देशों के विमान कूटनीतिक सुविधा के लिए वहां हैं। ट्रंप ने हालांकि पाकिस्तान की भूमिका की तारीफ की।

चीन यात्रा: ताइवान और ईरान पर नजरें

ट्रंप आज चीन रवाना हो रहे हैं, जहां राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात होगी। ताइवान को हथियार बिक्री का मुद्दा अहम रहेगा। ट्रंप ने कहा कि वे शी के साथ इस पर चर्चा करेंगे। सीनेटरों के एक द्विदलीय समूह ने 14 अरब डॉलर के हथियार पैकेज को आगे बढ़ाने की मांग की है। चीन ताइवान को अपना अभिन्न अंग मानता है, जबकि अमेरिका स्टेटस क्वो बनाए रखने की नीति पर अड़ा है। ईरान युद्ध और क्षेत्रीय स्थिरता भी चर्चा का विषय रहेंगे। ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर हमले दोबारा हुए तो 90% यूरेनियम संवर्धन पर विचार किया जा सकता है। अमेरिका का अनुमान है कि ईरान के पास पहले से 60% संवर्धित यूरेनियम का बड़ा स्टॉक है, जिसे हमलों के दौरान भूमिगत किया गया था।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं

डेमोक्रेट्स ने ट्रंप के बयान की आलोचना की। सीनेट माइनॉरिटी लीडर चक शूमर ने कहा कि यह स्पष्ट है कि ट्रंप आम अमेरिकियों की परेशानी से बेखबर हैं। पोल्स में ट्रंप की अर्थव्यवस्था और मुद्रास्फीति हैंडलिंग की मंजूरी दर काफी कम है। विश्लेषकों का मानना है कि ईरान युद्ध लंबा खिंचने पर खाद्य मुद्रास्फीति और बढ़ सकती है, क्योंकि तेल की कीमतें, उर्वरक और परिवहन लागत प्रभावित हो रही हैं। ट्रंप उम्मीद जताते हैं कि युद्ध समाप्त होते ही तेल की कीमतें गिरेंगी। यह स्थिति ट्रंप प्रशासन के लिए दोहरी चुनौती पेश कर रही है—एक ओर ईरान को न्यूक्लियर बनने से रोकना, दूसरी ओर घरेलू अर्थव्यवस्था को संभालना, जबकि चीन जैसे बड़े खिलाड़ी के साथ जटिल कूटनीति चल रही है। आगे की बातचीत और युद्ध की अवधि ही तय करेगी कि आम अमेरिकी कितना और बोझ उठाएंगे।

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