मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) संकट ने भारत की रसोईघरों को सीधा निशाना बना लिया है। देश में एलपीजी (तरलीकृत पेट्रोलियम गैस) के आयात में पिछले एक महीने में 52 प्रतिशत की जबरदस्त गिरावट दर्ज की गई है, जिससे गैस सिलेंडरों की आपूर्ति श्रृंखला पर भारी दबाव पड़ गया है। भारत अपनी 60 प्रतिशत से अधिक एलपीजी जरूरत इसी संवेदनशील समुद्री मार्ग से पूरी करता है, ऐसे में आम घरों में सिलेंडर की उपलब्धता मुश्किल हो सकती है और कीमतों में उछाल का डर मंडरा रहा है।
पेट्रोलियम मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल 2026 में भारत ने कुल 14 लाख मीट्रिक टन (एमटी) एलपीजी आयात किया, जो मार्च के 29 लाख एमटी से आधे से भी कम है। यह कमी मुख्य रूप से ईरान और सऊदी अरब जैसे प्रमुख आपूर्तिकर्ताओं से होने वाले आयात में बाधा के कारण हुई है। होर्मुज जलडमरूमध्य, जहां से वैश्विक 20 प्रतिशत तेल और गैस गुजरती है, वहां अमेरिका-ईरान तनाव और हूती विद्रोहियों की धमकियों से जहाजरानी ठप्प हो गई है। सूत्रों का कहना है कि भारतीय तेल कंपनियों को वैकल्पिक मार्गों पर निर्भर होना पड़ रहा है, जो लागत को 20-30 प्रतिशत बढ़ा रहे हैं।
भारतीय रसोई गैस वितरण कंपनियों ने चेतावनी दी है कि यदि यह स्थिति दो सप्ताह और बनी रही, तो दिल्ली-एनसीआर, मुंबई और कोलकाता जैसे महानगरों में सब्सिडी वाले 14.2 किलो के सिलेंडरों की कमी हो सकती है। उज्ज्वला योजना के तहत 10 करोड़ से अधिक गरीब परिवारों पर सबसे ज्यादा असर पड़ेगा। इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (आईओसी) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “हम स्टॉक से काम चला रहे हैं, लेकिन नई खेप न आने पर वितरण प्रभावित होगा। कीमतें 100-200 रुपये बढ़ सकती हैं।”
सरकार ने स्थिति पर नजर रखने के लिए आपात बैठक बुलाई है। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने आज ट्वीट कर कहा, “एलपीजी आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए वैकल्पिक स्रोतों से आयात बढ़ाया जा रहा है। जनता घबराए नहीं।” विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक संकट बने रहने पर डीजल और पेट्रोल की कीमतों पर भी असर पड़ेगा, जो पहले से ही ऊंचे स्तर पर हैं। महिलाओं और गृहिणियों में चिंता की लहर है। दिल्ली की एक गृहिणी रानी देवी ने कहा, “सिलेंडर न मिला तो फिर लकड़ी जलानी पड़ेगी। सरकार क्या करेगी?” अर्थशास्त्रियों का आकलन है कि यदि आयात पूरी तरह रुक गया, तो मुद्रास्फीति में 0.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो सकती है। फिलहाल, तेल कंपनियां रिजर्व स्टॉक से वितरण जारी रखे हुए हैं, लेकिन भविष्य अनिश्चित है।

