उत्तर प्रदेश के नोएडा में 13 अप्रैल को औद्योगिक मजदूरों के वेतन वृद्धि के प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली यूनिवर्सिटी की छात्रा आकृति चौधरी को जमानत देने से इनकार कर दिया। जस्टिस बीवी नागरत्ना और उज्जल भुइयां की बेंच ने याचिका पर सुनवाई के दौरान सख्त लहजे में कहा, “आप हाईकोर्ट क्यों नहीं जाते? हर कोई अनुच्छेद 32 के तहत सीधे यहां आ जाता है, जबकि सुप्रीम कोर्ट में 93,000 मामले लंबित हैं|
घटना का पृष्ठभूमि
नोएडा के फेज-2, सेक्टर-60 और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में 10 अप्रैल से शुरू हुए मजदूर आंदोलन में न्यूनतम वेतन 26,000 रुपये करने, ओवरटाइम भत्ते और साप्ताहिक अवकाश जैसी मांगें उठीं। चौथे दिन 13 अप्रैल को प्रदर्शन हिंसक हो गया, जिसमें 100 से अधिक फैक्टरियों में तोड़फोड़, वाहनों में आगजनी और पथराव हुआ, कई पुलिसकर्मी घायल हुए।
गिरफ्तारियां और जांच
हिंसा के बाद पुलिस ने 300 से अधिक श्रमिकों समेत कई उकसाने वालों को गिरफ्तार किया, जिनमें आकृति चौधरी, मनीषा चौहान, सृष्टि गुप्ता, हिमांशु ठाकुर, सत्यम वर्मा और तमिलनाडु से पकड़ा गया मुख्य साजिशकर्ता आदित्य आनंद शामिल हैं। नोएडा कोर्ट ने तीनों महिलाओं को सशर्त पुलिस रिमांड दिया था। पुलिस का दावा है कि पाकिस्तान से संचालित सोशल मीडिया अकाउंट्स ने भ्रामक जानकारी फैला हिंसा भड़काई।
सरकारी कदम
प्रदर्शन के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने नोएडा गाजियाबाद में अकुशल मजदूरों का न्यूनतम वेतन 11,313 से बढ़ाकर 13,690 रुपये और कुशल का 16,868 रुपये किया, जो 21% वृद्धि है। 30 अप्रैल से 8 मई तक धारा 163 लागू रही। अब मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए गए हैं, 15 मई तक साक्ष्य मांगे गए।
अदालती कार्रवाई
सुप्रीम कोर्ट ने केशव आनंद की पुलिस प्रताड़ना वाली याचिका पर अधिकारियों को नोटिस जारी किया। आकृति चौधरी (दौलत राम कॉलेज से एमए इतिहास) की ओर से वकील ने गिरफ्तारी के आधार न बताने का तर्क दिया, लेकिन बेंच ने इलाहाबाद हाईकोर्ट जाने का निर्देश दिया। स्थिति अब नियंत्रण में है, लेकिन जांच जारी।
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