नोएडा सेक्टर-62 स्थित प्रतिष्ठित उच्च शैक्षणिक संस्थान आईएमएस नोएडा (इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज) में गुरुवार को “प्रिंसिपल मीट 2026” का भव्य आयोजन किया गया। इस एक दिवसीय विशेष कार्यक्रम में दिल्ली-एनसीआर समेत फरीदाबाद, मेरठ, पंजाब, नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद के लगभग 100 स्कूलों के प्रिंसिपल, वरिष्ठ शिक्षाविद एवं शिक्षा विशेषज्ञ एकत्रित हुए। यह आयोजन राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी-2020) के प्रभावी क्रियान्वयन और स्कूल तथा उच्च शिक्षण संस्थानों के बीच बेहतर शैक्षणिक समन्वय की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।
अंकों की दौड़ से आगे जाने की जरूरत
कार्यक्रम का औपचारिक उद्घाटन करते हुए आईएमएस नोएडा के वाइस प्रेसिडेंट चिराग गुप्ता ने कहा कि भारत के शैक्षणिक परिदृश्य में आमूल-चूल बदलाव की आवश्यकता है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वर्तमान समय में केवल अंकों पर आधारित शिक्षा पर्याप्त नहीं है। आज के विद्यार्थी को तकनीकी ज्ञान, कौशल विकास और व्यावहारिक शिक्षा — इन तीनों का समन्वय चाहिए। चिराग गुप्ता ने यह भी रेखांकित किया कि विद्यार्थियों के समग्र विकास में शिक्षकों की भूमिका निर्णायक होती है और आने वाले दशक में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस शिक्षा क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन लेकर आएगा। ऐसे में छात्रों को नई तकनीकों और डिजिटल शिक्षा से जोड़ना अब समय की माँग नहीं, बल्कि अनिवार्यता बन चुकी है।
नवाचार और स्किल डेवलपमेंट से ही बनेगा भविष्य
आईएमएस नोएडा के प्रतिष्ठित सलाहकार प्रोफेसर (डॉ.) जेके शर्मा ने कहा कि एनईपी-2020 का मूल उद्देश्य शिक्षा को अधिक लचीला, कौशल-आधारित और छात्र-केंद्रित बनाना है। उन्होंने जोर देकर कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार, तकनीक और स्किल डेवलपमेंट को बढ़ावा देकर ही विद्यार्थियों को भविष्य के लिए तैयार किया जा सकता है। उनके अनुसार, छात्रों के जीवन में कौशल आधारित शिक्षा, डिजिटल लर्निंग, कम्युनिकेशन स्किल्स और व्यक्तित्व विकास जैसे विषयों को अब पाठ्यक्रम में उसी गंभीरता से स्थान मिलना चाहिए, जितना गणित और विज्ञान को मिलता है। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति की सबसे बड़ी खूबी यही है कि वह विद्यार्थियों को केवल परीक्षा तक सीमित नहीं रखती, बल्कि उन्हें व्यावहारिक और रोजगारपरक जीवन के लिए तैयार करती है।
एनईपी-2020 : बदलाव का रोडमैप
गौरतलब है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के सफल कार्यान्वयन के क्रम में डिजिटल लर्निंग और कौशल आधारित शिक्षा ने भारत के सुदूर क्षेत्रों में भी अपनी पैठ बनाई है, हालांकि राज्यों के साथ समन्वय और शिक्षकों का नया प्रशिक्षण अभी भी सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। इस नीति के अंतर्गत स्कूलों में 10+2 के पुराने ढाँचे के स्थान पर 5+3+3+4 का नया शैक्षणिक फॉर्मेट लागू किया जाना है, जिसमें संगीत, खेल और योग जैसे विषयों को भी मुख्य पाठ्यक्रम में शामिल करने का प्रावधान है। इस पृष्ठभूमि में आईएमएस नोएडा का यह आयोजन नीति के जमीनी क्रियान्वयन की दिशा में एक सार्थक कदम माना जा रहा है।
मंच पर हुआ व्यापक विमर्श
कार्यक्रम के दौरान सत्रों में शिक्षाविदों ने शिक्षा क्षेत्र की भावी चुनौतियों और उभरते अवसरों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया। चर्चा के केंद्र में मुख्य रूप से स्किल बेस्ड लर्निंग, क्रिएटिव एजुकेशन मॉडल, डिजिटल लर्निंग और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास जैसे विषय रहे। शिक्षाविदों का एकमत था कि वर्तमान समय में विद्यार्थियों को केवल सैद्धांतिक ज्ञान तक सीमित रखना उनके साथ अन्याय होगा — उन्हें व्यावहारिक और कौशल आधारित शिक्षा से जोड़ना अत्यंत आवश्यक है। इसके अलावा, शैक्षणिक संस्थानों के बीच आपसी समन्वय और सहयोग बढ़ाने पर विशेष बल दिया गया ताकि स्कूल से कॉलेज तक छात्र का शैक्षणिक सफर निर्बाध और उद्देश्यपूर्ण बन सके।
आईएमएस नोएडा की पहचान और पृष्ठभूमि
वर्ष 1998 में स्थापित आईएमएस नोएडा दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र का एक प्रमुख उच्च शैक्षणिक संस्थान है, जो प्रबंधन, सूचना प्रौद्योगिकी और पत्रकारिता के क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए जाना जाता है। संस्थान NAAC A+ मान्यता प्राप्त है और इसके 17,000 से अधिक पूर्व छात्र देश-विदेश में अपनी पहचान बना चुके हैं। इस प्रिंसिपल मीट जैसे आयोजनों के जरिए संस्थान शिक्षा जगत में स्कूल और कॉलेज स्तर पर नीतिगत संवाद को बढ़ावा देने की अपनी प्रतिबद्धता को रेखांकित कर रहा है।
विशेषज्ञों की राय
कार्यक्रम में भाग लेने वाले शिक्षाविदों का मानना था कि इस प्रकार के मंच न केवल विचारों के आदान-प्रदान के अवसर देते हैं, बल्कि नई शिक्षा नीति को व्यावहारिक धरातल पर उतारने में भी सहायक होते हैं। एनईपी-2020 में ऑनलाइन एवं डिजिटल शिक्षा के प्रभावी उपयोग के माध्यम से समानता, गुणवत्ता और प्रासंगिकता को सुदृढ़ करते हुए शिक्षण-अधिगम पारिस्थितिकी तंत्र में व्यापक परिवर्तन लाने की परिकल्पना की गई है। इसी लक्ष्य को सामने रखकर इस बैठक में शिक्षकों के प्रशिक्षण और डिजिटल संसाधनों के विस्तार पर भी सहमति जताई गई।कार्यक्रम के समापन पर सभी प्रतिभागियों ने संकल्प व्यक्त किया कि वे अपने-अपने संस्थानों में एनईपी-2020 की भावना के अनुरूप शिक्षण पद्धतियों को आधुनिक बनाने और विद्यार्थियों को भविष्य के लिए तैयार करने की दिशा में ठोस कदम उठाएंगे।

