नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस ने एक बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए पिछले ढाई दशकों से कानून की आँखों में धूल झोंक रहे एक शातिर अपराधी को धर दबोचा है। खुद को ‘एक्स-मुस्लिम’ (पूर्व-मुस्लिम) बताने वाला और सोशल मीडिया पर अपनी पहचान बनाने वाला सलीम वास्तिक आखिरकार पुलिस के हत्थे चढ़ गया है। सलीम पर 1995 में एक 13 साल के बच्चे के अपहरण और उसकी निर्मम हत्या का आरोप है, जिसमें उसे उम्रकैद की सजा भी मिल चुकी थी।
अपराध की पृष्ठभूमि: 1995 का वो खौफनाक हत्याकांड
मामले की जड़ें साल 1995 से जुड़ी हैं, जब दिल्ली के गोकलपुरी इलाके से 13 वर्षीय संदीप बंसल का अपहरण कर लिया गया था। पुलिस जांच में सलीम वास्तिक का नाम मुख्य आरोपी के रूप में सामने आया था। सलीम ने न केवल मासूम संदीप का अपहरण किया, बल्कि उसकी हत्या भी कर दी थी।
इस जघन्य अपराध के लिए दिल्ली की एक अदालत ने साल 1997 में सलीम को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। वह जेल की सजा काट रहा था, लेकिन साल 2000 में उसे पैरोल (बेल) मिली। जेल से बाहर आते ही सलीम ने कानून को चकमा दिया और फरार हो गया।
पहचान बदलकर 25 साल तक छिपे रहने का खेल
सलीम वास्तिक मूल रूप से उत्तर प्रदेश के शामली का रहने वाला है। साल 2000 में फरार होने के बाद उसने अपनी पुरानी पहचान पूरी तरह मिटा दी। पुलिस के अनुसार:
- वह पिछले 25 सालों से अलग-अलग जिलों में अपनी पहचान बदलकर रह रहा था।
- हाल के वर्षों में उसने खुद को एक ‘एक्स-मुस्लिम’ एक्टिविस्ट के तौर पर पेश करना शुरू किया था।
- वह सोशल मीडिया पर सक्रिय था और एक नई सार्वजनिक छवि बनाने की कोशिश कर रहा था ताकि किसी को उसके आपराधिक इतिहास पर शक न हो।
कैसे हुई गिरफ्तारी?
दिल्ली पुलिस की स्पेशल टीम पिछले काफी समय से पुराने भगोड़ों (Proclaimed Offenders) की तलाश में जुटी थी। खुफिया जानकारी और तकनीकी सर्विलांस की मदद से पुलिस को सलीम के ठिकाने का पता चला। आखिरकार, उसे गाजियाबाद के लोनी इलाके से गिरफ्तार कर लिया गया।
“सलीम वास्तिक एक शातिर अपराधी है जिसने उम्रकैद की सजा मिलने के बाद कानून से भागने का रास्ता चुना। उसने अपनी पहचान छिपाई, लेकिन पुलिस की सतर्कता ने उसे आखिरकार सलाखों के पीछे पहुँचा ही दिया।” — पुलिस अधिकारी का बयान
सलीम की गिरफ्तारी के बाद अब उसे फिर से जेल भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि इन 25 सालों के दौरान उसे किन लोगों ने पनाह दी और क्या उसने इस दौरान किसी अन्य आपराधिक गतिविधि को अंजाम दिया। यह मामला इस बात की याद दिलाता है कि कानून के हाथ लंबे होते हैं और अपराध चाहे कितना भी पुराना क्यों न हो, न्याय अपना रास्ता ढूंढ ही लेता है।

