ट्रंप का हॉर्मुज़ नाकेबंदी का ऐलान: अमेरिका-ईरान के बीच पाकिस्तान में हुई 21 घंटे की शांति वार्ता बेनतीजा रहने के बाद रविवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने Truth Social पर एक विस्फोटक पोस्ट में अमेरिकी नौसेना को स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज़ में जाने या आने वाले ‘हर जहाज’ को रोकने का आदेश दिया। उन्होंने यह भी कहा कि जिन जहाजों ने ईरान को टोल चुकाया है, उन्हें अंतर्राष्ट्रीय जलक्षेत्र में भी खोजकर रोका जाएगा। ट्रंप ने ईरान पर “विश्व उगाही” का आरोप लगाते हुए कहा, “जिसने अवैध टोल दिया है, उसे समुद्र में सुरक्षित रास्ता नहीं मिलेगा।” अमेरिकी सेना ने घोषणा की कि यह नाकेबंदी सोमवार 13 अप्रैल को सुबह 10 बजे (अमेरिकी समय) से प्रभावी होगी।
वार्ता क्यों टूटी?
सूत्रों के अनुसार वार्ता की मुख्य बाधा ईरान का परमाणु कार्यक्रम रहा। ईरान की मांगों में हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य पर नियंत्रण, युद्ध क्षतिपूर्ति और लेबनान सहित पूरे क्षेत्र में युद्धविराम शामिल था। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इस्लामाबाद से लौटते हुए कहा कि उन्होंने “अंतिम और सर्वश्रेष्ठ प्रस्ताव” दिया था, जिसे ईरान ने ठुकरा दिया।
बाज़ारों में भूचाल: सेंसेक्स 1,600 अंक टूटा
भारतीय बाज़ारों में सोमवार की सुबह भारी बिकवाली देखी गई। BSE सेंसेक्स 1,613 अंक गिरकर 75,937 पर खुला, जबकि NSE निफ्टी 461 अंक लुढ़ककर 23,589 पर आ गया। सेंसेक्स के सभी 30 शेयर लाल निशान में थे। वैश्विक स्तर पर भी भारी गिरावट रही टोक्यो, हांगकांग और सियोल सहित प्रमुख एशियाई बाज़ार 1% से अधिक नीचे आ गए। भारत का अस्थिरता सूचकांक India VIX 13% से अधिक चढ़ गया, जो बाज़ार में घबराहट का संकेत है। स्मॉलकैप और मिडकैप सूचकांकों में 2% तक की गिरावट दर्ज की गई।
कच्चे तेल में आग: $100 का आंकड़ा फिर पार
कच्चे तेल की कीमतें, जो पिछले हफ्ते अस्थायी युद्धविराम की उम्मीद में $94–100 के दायरे में आ गई थीं, अब एक बार फिर $105 के पार पहुंच गई हैं। कोलंबिया यूनिवर्सिटी के ऊर्जा विशेषज्ञ करेन यंग ने चेतावनी दी है कि अगर नाकेबंदी लागू होती है तो बाज़ार से करीब 7 मिलियन बैरल कच्चे तेल की दैनिक आपूर्ति गायब हो सकती है। उन्होंने आशंका जताई कि 2026 के अंत तक तेल की ऊंची कीमतें बनी रह सकती हैं।
भारत के लिए विशेष खतरा
भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 66 पैसे कमज़ोर होकर ₹93.35 प्रति डॉलर पर आ गया। विशेषज्ञों ने बताया कि भारत अपनी 85% से अधिक कच्चे तेल की ज़रूरत हॉर्मुज़ मार्ग से पूरी करता है। इसलिए तेल की बढ़ती कीमतें देश के चालू खाता घाटे को बढ़ाएंगी, रुपये को कमज़ोर करेंगी और महंगाई बढ़ाएंगी। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने अप्रैल में अब तक ₹48,213 करोड़ की शुद्ध बिकवाली की है।
ईरान का रुख: “हमारा रास्ता बंद नहीं होगा”
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने चेतावनी दी है कि हॉर्मुज़ की तरफ बढ़ने वाले किसी भी सैन्य जहाज को युद्धविराम का उल्लंघन माना जाएगा और उसका सख्त जवाब दिया जाएगा। ईरान ने जिन देशों खासकर चीन, भारत और जापान — से ‘युआन’ में टोल वसूलकर उनके जहाजों को गुजरने दिया था, ट्रंप के नए आदेश के बाद उन देशों के जहाज भी अमेरिकी नौसेना की जद में आ सकते हैं।
विशेषज्ञों की राय
Geojit Investments के मुख्य रणनीतिकार वी.के. विजयकुमार ने कहा, “ट्रंप की नाकेबंदी की घोषणा के साथ अनिश्चितता और तेल की कीमतें दोनों उछल गई हैं। $103 का ब्रेंट क्रूड भारतीय अर्थव्यवस्था और बाज़ारों के लिए एक नया खतरा बनता जा रहा है।” रिपोर्टों के अनुसार हॉर्मुज़ से गुजरने वाली शिपिंग गतिविधि अभी सामान्य स्तर के मात्र 10% तक सीमित है।
निवेशकों के लिए सलाह: बाज़ार के जानकारों का कहना है कि जब तक हॉर्मुज़ संकट का हल नहीं निकलता, बाज़ार में भारी उतार-चढ़ाव जारी रहेगा। निवेशकों को सतर्क रहते हुए जोखिम भरे दांव से बचना चाहिए।

