बैसाखी 2026: बैसाखी 2026 मंगलवार, 14 अप्रैल को मनाई जाएगी। इस दिन वैसाखी संक्रांति का शुभ मुहूर्त सुबह 9 बजकर 39 मिनट पर है, जब सूर्य मेष राशि में प्रवेश करता है।
बैसाखी का इतिहास और महत्व
बैसाखी का इतिहास बेहद गौरवशाली है। 13 अप्रैल 1699 को गुरु गोबिंद सिंह जी ने आनंदपुर साहिब में खालसा पंथ की स्थापना की थी। उन्होंने हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ में से उन लोगों को आगे आने को कहा जो धर्म के लिए अपना जीवन बलिदान करने को तैयार हों। पाँच वीर पुरुष आगे आए, जिन्हें गुरु जी ने अमृत छकाकर खालसा पंथ में दीक्षित किया। ये पाँचों ‘पंज प्यारे’ कहलाए। बैसाखी का दिन भारतीय इतिहास में एक दुखद याद भी लेकर आता है 13 अप्रैल 1919 को जलियाँवाला बाग में हजारों निर्दोष भारतीयों पर ब्रिटिश सेना ने गोलियाँ चलाईं थीं। इसलिए यह दिन स्वतंत्रता संग्राम के शहीदों को श्रद्धांजलि देने का भी अवसर है।
देशभर में अलग-अलग रूपों में मनाया जाता है यह पर्व
बैसाखी का पर्व अकेले पंजाब तक सीमित नहीं है यह पोहेला बोइशाख (बंगाली नव वर्ष), विषु (केरल का नव वर्ष), और बिहू (असमिया नव वर्ष) के साथ भी मेल खाता है।
उत्सव की रौनक
इस दिन श्रद्धालु तड़के गुरुद्वारों में माथा टेकते हैं और कीर्तन में भाग लेते हैं। अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में लाखों लोगों की भीड़ जुटती है। नगर कीर्तन निकाले जाते हैं जिनमें गतका (सिख मार्शल आर्ट) का प्रदर्शन भी होता है। किसान रबी फसल की सफल कटाई की खुशी में भांगड़ा और गिद्दा नृत्य करते हैं। सामुदायिक लंगर में सभी को बिना किसी जाति-धर्म के भेदभाव के भोजन कराया जाता है। परंपरागत व्यंजनों में कड़ा प्रसाद, मक्के की रोटी-सरसों का साग, छोले भटूरे, मीठे चावल और लस्सी शामिल हैं।
विश्वभर में उत्साह
कनाडा के सरे, वैंकूवर और टोरंटो में विशाल परेड निकाली जाती हैं। ब्रिटेन में लंदन और अन्य शहरों में नगर कीर्तन होते हैं। अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और दुनिया भर में जहाँ भी सिख समुदाय है, वहाँ यह पर्व धूमधाम से मनाया जाता है।
बैसाखी की शुभकामनाएँ
इस पावन अवसर पर देशभर में लोग एक-दूसरे को शुभकामनाएँ दे रहे हैं। आप भी अपनों को संदेश भेजें —
“बैसाखी का त्योहार आपके जीवन में सुख, समृद्धि और नई उमंग लेकर आए। हैप्पी बैसाखी 2026!”
“वाहेगुरु की कृपा हमेशा आप पर बनी रहे। बैसाखी मुबारक हो!”

