“Women are ignored” within the BJP itself: एक तरफ भारतीय जनता पार्टी पूरे देश में “नारी शक्ति वंदन अभियान” के तहत महिला सशक्तिकरण का ढोल पीट रही है, वहीं दूसरी तरफ नोएडा में पार्टी के अपने संगठन की एक कारस्तानी ने उसी अभियान की पोल खोल दी है।
नोएडा महानगर भाजपा द्वारा नारी शक्ति वंदन अभियान के लिए बनाई गई जिला संयोजक टीम में महिला मोर्चा की जिला अध्यक्ष शारदा चतुर्वेदी को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया है न उन्हें संयोजक बनाया गया, न किसी कार्यक्रम की जिम्मेदारी सौंपी गई। इस घटना से भाजपा की महिला कार्यकर्ताओं में भारी आक्रोश फैल गया है। 13 से 20 अप्रैल तक चलने वाले इस अभियान की टीम में 14 पदाधिकारी शामिल हैं, जिनमें 8 महिलाएं और 6 पुरुष हैं। जिला अध्यक्ष महेश चौहान और जिला मंत्री प्रज्ञा शर्मा को कार्यक्रम का संयोजक बनाया गया है, लेकिन महिला मोर्चा की सर्वोच्च जिला पदाधिकारी का नाम सूची में कहीं नहीं है।
संगठन पर उठे गंभीर सवाल
महिला कार्यकर्ताओं का सीधा सवाल है जब अभियान का नाम ही “नारी शक्ति वंदन” है और उसकी कमान भाजपा महिला मोर्चा के हाथों में होनी चाहिए थी, तो उसी मोर्चे की जिला अध्यक्ष को क्यों दरकिनार किया गया? कार्यकर्ताओं ने इसे “अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण” और संगठन की आंतरिक गुटबाजी का परिणाम बताया है।
बड़ी तस्वीर में क्या है?
भाजपा 11 अप्रैल से 25 अप्रैल तक देशभर में नारी शक्ति वंदन अभियान चला रही है, जिसका मकसद महिला आरक्षण विधेयक के संशोधन पर जनसमर्थन जुटाना और 2029 के चुनावों से पहले महिला कैडर को मजबूत करना है। भाजपा ने अपने सांसदों के लिए व्हिप भी जारी किया है कि वे 16 से 18 अप्रैल तक संसद के विशेष सत्र में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहें, जहां नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर संशोधन पर चर्चा होनी है। ऐसे में नोएडा की यह घटना भाजपा के लिए न सिर्फ संगठनात्मक शर्मिंदगी है, बल्कि “नारी शक्ति” के उसके राष्ट्रीय संदेश पर भी सवालिया निशान लगाती है। जो पार्टी संसद में महिलाओं को 33% आरक्षण दिलाने की बात करती है, वही अपने ही जिले में महिला मोर्चा की अध्यक्ष को उनके सबसे प्रासंगिक अभियान से बाहर कर देती है यह विरोधाभास अब पार्टी के लिए मुश्किल खड़ी कर सकता है।

