नोएडा में वीआईपी कल्चर पर पुलिस का शिकंजा: नोएडा और ग्रेटर नोएडा में वीआईपी संस्कृति का दिखावा करने वालों के खिलाफ गौतमबुद्धनगर पुलिस कमिश्नरेट ने व्यापक अभियान चलाकर 16,000 से अधिक चालान काटे हैं। पुलिस आयुक्त के निर्देश पर चलाए गए इस अभियान का मुख्य उद्देश्य वाहनों पर लाल और नीली बत्ती, हूटर, सायरन और पुलिस कलर के इस्तेमाल पर रोक लगाना था।
क्या-क्या है निशाने पर?
अभियान के दौरान वाहनों पर हूटर, सायरन और लाल-नीली बत्ती के अनाधिकृत इस्तेमाल के सैकड़ों मामले दर्ज किए गए। वाहनों पर पुलिस के रंग के दुरुपयोग के मामले भी सामने आए। इसके अलावा वाहनों पर जाति और समुदाय लिखे होने तथा अनधिकृत सरकारी चिह्न लगाने वालों पर भी कार्रवाई की गई।
फर्जी अफसर बनकर घूमने वालों पर भी कार्रवाई
नोएडा में ऐसे लोगों का भी भंडाफोड़ हुआ जो डिफेंडर, फॉर्च्यूनर और मर्सिडीज जैसी लग्जरी गाड़ियों पर नीली बत्ती और ड्राइवर के साथ चलते थे, ताकि लोग उन्हें असली अफसर या नेता समझें। ऐसे लोगों की गाड़ियों से फर्जी दस्तावेज, नकली सरकारी पास और वीआईपी प्रोटोकॉल से जुड़े सामान बरामद हुए।
क्या है कानून?
साल 2017 में केंद्र सरकार ने एक ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए वीआईपी संस्कृति पर प्रहार किया था। नियमों के अनुसार केवल एम्बुलेंस, फायर ब्रिगेड और पुलिस जैसी आपातकालीन सेवाओं में लगी गाड़ियाँ ही नीली बत्ती का इस्तेमाल कर सकती हैं। यह नियम राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस और मुख्यमंत्री पर भी बराबरी से लागू है।
पुलिस की चेतावनी
डीसीपी (यातायात) ने स्पष्ट किया है कि सड़कों पर अनुशासन बनाए रखने और यात्रियों की सुरक्षा के लिए भविष्य में भी इसी तरह के अभियान चलाए जाएंगे। पुलिस ने कहा है कि नियमों का उल्लंघन करने पर आगे और सख्त कार्रवाई करते हुए वाहनों को सीज भी किया जाएगा। आम नागरिकों से अपील की गई है कि वे बिना अधिकृत अनुमति के किसी भी प्रकार की बत्ती, हूटर, झंडा या सरकारी चिह्न अपने वाहनों पर न लगाएं अन्यथा सख्त कानूनी कार्रवाई के लिए तैयार रहें।

