Noida Breaking News: जाम में फंसे ऑफिसगोइंग लोगों ने श्रमिकों से की बात, समझाने के बाद कुछ देर के लिए खोला रास्ता

Noida Breaking News: नोएडा। सोमवार की सुबह नोएडा में जब लोग अपने-अपने दफ्तरों की ओर निकले, तो उन्हें रास्ते में एक अजीब मंजर देखने को मिला। सड़कों पर वाहनों की लंबी कतारें लगी थीं और यातायात पूरी तरह ठप था। जब लोगों ने आगे बढ़कर जाम की वजह जानने की कोशिश की, तो पता चला कि वेतन वृद्धि की मांग को लेकर श्रमिक वर्ग गोलचक्कर के पास सड़क पर बैठकर धरना दे रहा है।

ऑफिस की चिंता, जाम की मार

सुबह के व्यस्त घंटों में नोएडा की सड़कों पर फंसे दफ्तर जाने वाले लोगों की परेशानी साफ झलक रही थी। कोई अपने बॉस को फोन करके देरी की सूचना दे रहा था, तो कोई घड़ी देख-देखकर बेचैन हो रहा था। लंबे समय तक जाम में खड़े रहने के बाद कुछ लोगों ने खुद ही पहल की और गोलचक्कर के पास जाकर धरने पर बैठे श्रमिकों से सीधे बातचीत शुरू कर दी।

आम लोगों ने श्रमिकों को समझाया अपना दर्द

दफ्तर जाने वाले इन लोगों ने श्रमिकों से कहा कि हम भी आप ही की तरह मेहनतकश लोग हैं, रोज काम पर जाते हैं और परिवार चलाते हैं। आपकी मांगें जायज हो सकती हैं, लेकिन सड़क जाम करने से हम जैसे आम लोगों की रोजी-रोटी पर भी असर पड़ता है। तरह-तरह की दुहाई देते हुए उन्होंने श्रमिकों से रास्ता खोलने की गुजारिश की।

समझाइश काम आई, हटा धरना

आम नागरिकों की इस सीधी और दिल से की गई अपील का असर हुआ। गोलचक्कर के पास धरने पर बैठे श्रमिक धीरे-धीरे वहां से हट गए और वाहनों को आगे निकलने का रास्ता दे दिया। इसके बाद जाम में फंसे वाहन एक-एक कर आगे बढ़ने लगे और लोगों ने राहत की सांस ली।

प्रशासन नहीं, जनता ने सुलझाई समस्या

इस पूरे घटनाक्रम में सबसे उल्लेखनीय बात यह रही कि जो काम प्रशासन नहीं कर पाया, वह आम नागरिकों ने आपसी बातचीत और सहानुभूति से कर दिखाया। न लाठी चली, न आंसू गैस, बस इंसानियत की जुबान में की गई अपील ने वह काम किया जो घंटों की पुलिस तैनाती भी नहीं कर पाई थी।

श्रमिकों का आंदोलन जारी

हालांकि गोलचक्कर से धरना हटने के बाद भी श्रमिकों का आंदोलन पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। वेतन वृद्धि की उनकी मांग अभी भी अनसुनी है और वे अपने हक के लिए लड़ते रहने की बात कह रहे हैं। नोएडा के विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में पिछले तीन-चार दिनों से जारी यह आंदोलन तब तक थमने के आसार नहीं हैं, जब तक कंपनी प्रबंधन और श्रमिकों के बीच कोई ठोस सहमति नहीं बनती।

 

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