अखिलेश यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती को पुराने गठबंधन का हवाला देते हुए कहा, “हम तो उन्हें गठबंधन के दौरान प्रधानमंत्री बनाना चाहते थे।” उन्होंने इंडिया गठबंधन का जिक्र करते हुए बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर भी तंज कसा। अखिलेश बोले, “हमने कहा था कि नीतीश प्रधानमंत्री के तौर पर रिटायर नहीं होंगे, लेकिन भाजपा ने उन्हें राज्यसभा सदस्य बनाकर रिटायर कर दिया। अब वे मुख्यमंत्री के तौर पर रिटायर होंगे।”
आज ही उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के हेलीकॉप्टर में लखनऊ एयरपोर्ट पर धुआं भरने की घटना हुई, जिस पर अखिलेश ने व्यंग्य करते हुए कहा, “उन्हें नया वाला हेलीकॉप्टर नहीं मिला होगा। प्रदेश में जो नया हेलीकॉप्टर आया है, वह उन्हें मिलना चाहिए।” उन्होंने सुरक्षा को लेकर चिंता जताई और कहा, “हेलीकॉप्टर एक मशीन है, किसी के साथ ऐसी घटना नहीं होनी चाहिए।”
अखिलेश ने महंगाई पर भी हमला बोला। उन्होंने बताया कि आज एलपीजी सिलेंडर के दाम 60 रुपये बढ़ गए और कहा, “जब भाजपाई जाएंगे, तब महंगाई जाएगी।” कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए उन्होंने गांजा तस्करी और पुलिस की मिलीभगत का जिक्र किया। इसके अलावा एक गाने को लेकर सपा को बदनाम करने की साजिश का आरोप लगाया और चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए। उन्होंने पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) को अपमानित करने का आरोप लगाते हुए भाजपा की आंतरिक कलह पर भी तंज कसा।
दूसरी ओर, भाजपा-आरएसएस 2027 के लिए पूरी तरह तैयार है। लोकसभा 2024 में स्थानीय मुद्दों की अनदेखी से हुई नाराजगी से सबक लेते हुए पार्टी ने रणनीति पूरी तरह बदल दी है। अब क्षेत्रीय स्तर के मुद्दों को प्राथमिकता दी जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद क्षेत्रीय समन्वय बैठकों में शामिल होकर जमीनी मूड टटोल रहे हैं। आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने भी पिछले एक साल में यूपी के हर हिस्से का दौरा किया है।
आज ही कानपुर में भाजपा-आरएसएस की बड़ी समन्वय बैठक हो रही है, जिसमें योगी समेत प्रदेश अध्यक्ष, संगठन मंत्री और आरएसएस पदाधिकारी शामिल हैं। इसमें यूजीसी विवाद, हिंदू एकता और जातीय समीकरण जैसे मुद्दों पर चर्चा हो रही है। भाजपा का लक्ष्य है कि 2024 की गलती न दोहराई जाए, जहां सांसदों के क्षेत्र से गायब रहने और स्थानीय मुद्दों की कमी से कार्यकर्ता उदासीन हो गए थे। अब बूथ स्तर तक फीडबैक लिया जा रहा है और राजनीतिक कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की जा रही है।
विश्लेषण
अखिलेश यादव का आक्रामक अंदाज 2027 के लिए पीडीए फॉर्मूला को मजबूत करने का संकेत देता है, जबकि भाजपा-आरएसएस क्षेत्रीय मुद्दों और हिंदुत्व के जरिए विपक्ष के जातीय गठजोड़ का मुकाबला करने की तैयारी में है। दोनों तरफ से आज की गतिविधियां साफ बताती हैं कि यूपी में सियासी जंग अब से ही शुरू हो चुकी है। सपा और भाजपा दोनों ही 2027 को अपनी साख का सवाल मान रहे हैं। जनता अब देखेगी कि कौन सी रणनीति जमीनी हकीकत से ज्यादा जुड़ती है।

