ईरान-इज़राइल युद्ध की तपिश: क्या बुझने लगा है दुबई के प्रॉपर्टी मार्केट का आकर्षण? डर में निवेशक

Delhi | पिछले कई सालों से दुनिया भर के अमीरों और निवेशकों के लिए ‘सुरक्षित ठिकाना’ (Safe Haven) माने जाने वाले दुबई के रियल एस्टेट बाजार में अब घबराहट के संकेत मिलने लगे हैं। ईरान और इज़राइल के बीच सीधे संघर्ष और क्षेत्रीय अस्थिरता के कारण, दुबई में प्रॉपर्टी की कीमतों में गिरावट और मांग में सुस्ती आने की खबरें सामने आ रही हैं।

1. ‘सेफ हेवन’ की छवि को लगा झटका

दुबई की सबसे बड़ी खूबी इसकी स्थिरता रही है। रूस-यूक्रेन युद्ध हो या अन्य वैश्विक संकट, निवेशकों ने हमेशा दुबई को सुरक्षित माना। लेकिन वर्तमान संघर्ष में खाड़ी क्षेत्र के सीधे शामिल होने की आशंका और हालिया रक्षात्मक अलर्ट्स ने इस भरोसे को हिला दिया है। विदेशी निवेशक, विशेषकर पश्चिमी देशों और भारत से आने वाले खरीदार, अब ‘रुको और देखो’ (Wait and Watch) की नीति अपना रहे हैं।

2. मांग में कमी और डील्स का रद्द होना

रियल एस्टेट ब्रोकरों के अनुसार, पिछले कुछ हफ्तों में नई बुकिंग्स में 15-20% की गिरावट देखी गई है। कई बड़े निवेशक जो विला और लग्जरी अपार्टमेंट्स में करोड़ों का निवेश करने वाले थे, उन्होंने फिलहाल अपने हाथ खींच लिए हैं। बाजार में यह डर बैठ गया है कि अगर युद्ध लंबा खिंचा, तो प्रॉपर्टी के दाम और भी गिर सकते हैं।

3. सप्लाई का बढ़ता दबाव

दुबई में इस समय निर्माणाधीन संपत्तियों (Off-plan properties) की भरमार है। विश्लेषकों का मानना है कि 2026 में रिकॉर्ड संख्या में नए घर बाजार में आने वाले हैं। एक तरफ सप्लाई बढ़ रही है और दूसरी तरफ युद्ध के डर से मांग कम हो रही है—यह संतुलन बिगड़ने से कीमतों पर नीचे की ओर दबाव बढ़ रहा है। कुछ क्षेत्रों में कीमतों में 5% से 10% तक की शुरुआती गिरावट की खबरें हैं।

4. किराए के बाजार पर असर

न केवल बिक्री, बल्कि रेंटल मार्केट पर भी इसका असर पड़ सकता है। यदि क्षेत्रीय तनाव के कारण पर्यटन और बिजनेस ट्रैवल कम होता है, तो शॉर्ट-टर्म रेंटल (जैसे Airbnb) से होने वाली कमाई कम हो जाएगी, जिससे छोटे निवेशक अपनी प्रॉपर्टी बेचने पर मजबूर हो सकते हैं।

मुख्य बिंदु: एक नज़र में

  • निवेशकों की चिंता: युद्ध के कारण सुरक्षा और लॉजिस्टिक्स को लेकर बढ़ता डर।
  • लेनदेन में सुस्ती: लग्जरी सेगमेंट में नई डील्स की रफ्तार धीमी पड़ी।
  • ब्रोकरों का अनुमान: यदि तनाव कम नहीं हुआ, तो आने वाले महीनों में कीमतों में बड़ी गिरावट संभव है।
  • भारतीयों पर असर: दुबई में निवेश करने वाले भारतीयों का एक बड़ा हिस्सा अब अपने पोर्टफोलियो को लेकर सतर्क है।

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