बरसात के बाद बच्चे और बुजुर्ग हो रहे बीमार…. ये है कारण

मौसम तेजी से बदल रहा है और सुबह बारिश दिन में घूप व रात में सर्द हवा सांस के रोग से पीड़ित मरीजों के लिए जान की दुश्मन बन सकती है। डॉक्टरों का कहना है कि सुबह सैर सपाटे या अन्य किसी काम से बाहर जाना है तो हल्के गर्म कपड़े जरूर पहने। सर्द हवा शरीर में घुसी तो सेहत खराब कर सकती है। रात को निकलते वक्त भी ध्यान रखना जरूरी है।
फेलिक्स हॉस्पिटल के फिजीशियन डॉक्टर नीलभ प्रताप ने बताया कि हल्की ठंड वाले मौसम में सर्द हवा के साथ प्रदूषित कण रेसप्रेरित जोन में आ जाते है। खुले में टहलने पर ये प्रदूषित कण सांस के सहारे भीतर जाते है और उससे सांस लेने में दिक्कत होती है। बहुत अधिक बंद कमरे या ठंडे कमरे में बैठने या सोने के बाद खुली हवा में जाने से चेस्ट इंफेक्शन हो जाता है। बंद कमरे में अधिक लोग जब एक साथ बैठते है उसमें भी सांस लेना मुश्किल होता है। मौसम में हुए एकाएक बदलाव के बाद स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी बढ़ी है। ऐसे मौसम में लोगों को अपने खान पर विशेष ध्यान देना चाहिए। खुले में बिकने वाली खाद्य उत्पादों का सेवन नहीं करना चाहिए। इस दौरान यदि लोगों स्वास्थ्य में किसी प्रकार को बदलाव महसूस हो तो उसे नजरअंदाज करने की बजाए, त्वरित डॉक्टरी सलाह लेना चाहिए। ताकि संक्रमण को बढ़ने से रोका जा सके। इस मौसम का बूरा प्रभाव सर्वाधिक 5 साल से कम के बच्चों और उम्रदराज लोगों पर देखने को मिलता है। जिन्हें सामान्य से अधिक देखभाल की आवश्यकता होती है। ऐसे मौसम में स्वास्थ्य रहने के लिए केला के सेवन करें। केला पोटैशियम का अच्छा स्रोत है जो रक्तचाप नियंत्रित करता है। केले में फाइबर और विटामिन पाये जाते है। जो शरीर की रोग प्रतिरोधी क्षमता को मजबूत बनाता है। अनार में एंटी आक्सीडेंट भी लाभदायक होते है। इसके अलावा ताजी हरी सब्जियां, खट्टे फल व मछलियों को सेवन भी खासतौर पर करना चाहिए। थोड़ा व्यायाम भी जरूरी है। 5 साल से कम उम्र के बच्चों को ब्रांकाइटिस की समस्या अधिक होती है। ऐसे में कोल्ड ड्रिंक या आइसक्रीम खाने से खांसी और बढ़ सकती है। अगर आपको साइनस की समस्या है तो धूल मिटटी से बचे। इन दिनों उनके पास बच्चे काफी आ रहे हैं, जो बुखार और खांसी-जुकाम से पीड़ित हैं। इन दिनों बच्चों को पूरे कपड़े पहना कर रखें। उबला ठंडा पानी दें। घर का भोजन ही दें। घर के आसपास पानी एकत्र न होने दें। ठंडी चीजों और बाहर का खाना खाना से बचे। बिना डॉक्टर किसी भी प्रकार की दवाओं का सेवन नहीं करें। लक्षण दिखने पर डॉक्टर से सलाह लें।

यह बीमारी बढ़ी
-जुकाम
-सिरदर्द
-दमा या अस्थमा
-गठिया या हड्डियों में दर्द
-हार्टअटैक
-गैस्ट्रोएंटराइटिस
-ब्रांकाइटिस
-खांसी

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