कोविड अपडेट: पांच साल बाद महामारी के शांत दौर में आंध्र प्रदेश में कोविड-19 ने एक बार फिर सुर्खियां बटोरी हैं। कडप्पा जिले में दो मौतें और कुल आठ पॉजिटिव मामले सामने आने के बाद राज्य सरकार सतर्क हो गई है। हालांकि स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि ये मामले स्पोरैडिक (छिटपुट) हैं और नया आउटब्रेक नहीं माना जा रहा है। फिर भी, संपर्क ट्रेसिंग, टेस्टिंग और जीनोम सीक्वेंसिंग जैसे कदम तेजी से उठाए जा रहे हैं।
घटना का विवरण
कडप्पा जिले से जुड़े दोनों मरीजों की मौत कोविड से हुई। पहला मामला 60 वर्षीय व्यक्ति का था, जो डायबिटीज और किडनी की बीमारी से ग्रस्त था। उन्हें तिरुपति के श्री वेंकटेश्वर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में भर्ती कराया गया था, बाद में वेल्लोर (तमिलनाडु) के क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज शिफ्ट किया गया। 28 जून को उनकी मौत हो गई। पोस्टमॉर्टम में RT-PCR टेस्ट पॉजिटिव आया। दूसरी मौत 7 जुलाई को हुई। 46 वर्षीय व्यक्ति कडप्पा के गवर्नमेंट जनरल हॉस्पिटल में भर्ती थे। उन्हें तेज सांस की तकलीफ और लगातार खांसी थी। सीटी स्कैन में कोविड जैसी गंभीर फेफड़ों की क्षति दिखी, जिसके कारण निमोनिया और बाइलेटरल लंग डैमेज से उनकी मौत हो गई। इन दोनों मौतों के अलावा आठ व्यक्ति पॉजिटिव पाए गए, जिनमें से ज्यादातर कडप्पा के ही हैं। पांच मामले कडप्पा में और बाकी संपर्कों के हैं। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, ज्यादातर केस हल्के हैं और संपर्कों को होम आइसोलेशन में रखा गया है।
सरकार की प्रतिक्रिया और उपाय
आंध्र प्रदेश स्वास्थ्य सचिव एस. सुरेश कुमार ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि स्थिति पर नजर रखी जा रही है। संपर्क ट्रेसिंग और टेस्टिंग शुरू कर दी गई है। अस्पतालों को आइसोलेशन वार्ड तैयार रखने, ऑक्सीजन, वेंटिलेटर और टेस्टिंग किट्स की पर्याप्त व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं। “पिछले छह दिनों में कोई नया केस नहीं आया है। यह स्पोरैडिक इंसिडेंट लगता है। घबराने की जरूरत नहीं,” सुरेश कुमार ने कहा। राज्य सरकार ने प्रभावित व्यक्तियों के स्वाब नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (NIV), पुणे भेजे हैं। जीनोम सीक्वेंसिंग के नतीजे एक-दो दिनों में आने की उम्मीद है। पांच विशेषज्ञों की कमेटी ने अभी नये सबवैरिएंट की संभावना को खारिज किया है, लेकिन डॉक्टरों को शक है कि कोई आक्रामक ओमिक्रॉन सबवैरिएंट हो सकता है, जिससे सांस की तकलीफ तेजी से बढ़ रही है।
क्या है चिंता का कारण?
कोविड अब एंडेमिक चरण में है, यानी यह मौसमी बीमारी की तरह रहेगा। ओमिक्रॉन वंश के सबवैरिएंट्स (जैसे NB.1.8.1, XFG, BA.3.2 आदि) दुनिया भर में फैल रहे हैं। भारत में भी हल्के केस रिपोर्ट हो रहे हैं, लेकिन गंभीरता कम है। विशेषज्ञों के मुताबिक, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं, डायबिटीज, हृदय रोग या कमजोर इम्यूनिटी वाले लोग अभी भी जोखिम में हैं। तमिलनाडु सरकार ने भी कहा कि उनके यहां कोई हाई-सेवियरिटी स्ट्रेन नहीं है और केस पिछले सालों से कम हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के हालिया अपडेट्स के अनुसार, वर्तमान में circulating वैरिएंट्स (XFG, NB.1.8.1, BA.3.2 आदि) अतिरिक्त खतरा नहीं पैदा कर रहे हैं, लेकिन सतर्कता जरूरी है।
क्या करें आम लोग?
मास्क पहनें, खासकर भीड़भाड़ वाले इलाकों में। हाथ धोएं और सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें। लक्षण (बुखार, खांसी, सांस फूलना, थकान) दिखें तो तुरंत टेस्ट कराएं। हाई-रिस्क ग्रुप वाले लोग सावधानी बरतें। फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है। यह 2020-21 जैसी लहर नहीं लग रही। राज्य सरकार की निगरानी जारी है और NIV रिपोर्ट का इंतजार है। नागरिकों को सतर्क रहना चाहिए, लेकिन दैनिक जीवन प्रभावित होने की संभावना कम है। अपडेट्स के लिए आधिकारिक वेबसाइट्स चेक करें।

