2024 करोड़ का रियल एस्टेट घोटाला: दिल्ली-एनसीआर के रियल एस्टेट क्षेत्र में एक बड़े घोटाले का पर्दाफाश हुआ है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 10 अप्रैल 2026 को अर्थ इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (EIL) और उससे जुड़ी ग्रुप कंपनियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए दिल्ली और गुरुग्राम में एक साथ 10 ठिकानों पर छापेमारी की।
करोड़ों की नकदी और गहने बरामद
इस छापेमारी में ED की टीम ने करीब 6.3 करोड़ रुपये नकद, 7.5 करोड़ रुपये मूल्य के सोने-चांदी के गहने, चांदी के बुलियन और कई लग्जरी घड़ियां जब्त कीं। यह अंडरपास आउटर रिंग रोड के सबसे व्यस्त चौराहों में से एक मुकरबा चौक पर निर्मित किया गया है। ये सभी छापे दिल्ली और गुरुग्राम में कंपनी के निदेशकों, प्रमोटरों और संबंधित संस्थाओं से जुड़े 10 परिसरों पर मारे गए।
19,425 निवेशकों से 2024 करोड़ की ठगी
जांच में खुलासा हुआ कि आरोपी कंपनियों ने समय पर आवासीय और व्यावसायिक इकाइयां देने तथा सुनिश्चित रिटर्न का वादा कर 19,425 से अधिक घर खरीदारों और निवेशकों से लगभग 2,024.45 करोड़ रुपये एकत्र किए, लेकिन खरीदारों से भारी अग्रिम राशि लेने के बावजूद न तो प्रोजेक्ट पूरे हुए और न ही निवेशकों को कब्जा सौंपा गया।
कौन-कौन से प्रोजेक्ट हैं जांच के घेरे में?
अर्थ ग्रुप ने दिल्ली-NCR, गुरुग्राम, ग्रेटर नोएडा और लखनऊ में ‘अर्थ’ ब्रांड के तहत कई रियल एस्टेट प्रोजेक्ट लॉन्च किए थे — जिनमें अर्थ टाउन, अर्थ सैफायर कोर्ट, अर्थ कोपिया, अर्थ टेक-वन, अर्थ आइकॉनिक, अर्थ टाइटेनियम, अर्थ इलाकासा, अर्थ ग्रेसिया और अर्थ स्काईगेट प्रमुख हैं।
कहां गया निवेशकों का पैसा?
जांच के मुताबिक जुटाए गए धन का उपयोग गुरुग्राम, दिल्ली और राजस्थान में ग्रुप कंपनियों और परिवार के सदस्यों के नाम पर जमीन खरीदने, शेल/समूह संस्थाओं के माध्यम से धन के हेरफेर, व्यक्तिगत भूमि सौदों और व्यवसाय में सक्रिय भूमिका न होने के बावजूद परिवार के सदस्यों को वेतन देने में किया गया।
मुख्य आरोपी कौन हैं?
इस धोखाधड़ी में शामिल मुख्य व्यक्तियों में अवधेश कुमार गोयल, रजनीश मित्तल, अतुल गुप्ता और विकास गुप्ता के नाम सामने आए हैं। इसके अलावा लैवेंडर इंफ्राटेक, ध्रुव रियल एस्टेट डेवलपर्स, मुरलीधर इंफ्राकॉन, बांके बिहारी फार्मिंग और जूलियन इंफ्राकॉन जैसी शेल कंपनियों के ज़रिए अपराध की कमाई को डायवर्ट करने का भी खुलासा हुआ है।
EOW और SFIO की भी थी नजर
दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने पहले ही कंपनी और समूह संस्थाओं के खिलाफ 5 FIR दर्ज की थीं, जिनमें धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात और साजिश जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं। इसके अलावा SFIO ने भी कंपनी अधिनियम की धारा 447 के तहत कंपनी के प्रमोटरों और निदेशकों के खिलाफ अलग से आपराधिक शिकायत दर्ज की थी। ED ने कहा है कि मामले की जांच अभी जारी है। छापेमारी में मिले दस्तावेजों, डिजिटल डेटा और जब्त संपत्तियों की गहन जांच की जा रही है और जल्द ही मुख्य आरोपियों को समन जारी कर पूछताछ की जाएगी। यह मामला दिल्ली-NCR के रियल एस्टेट क्षेत्र में बढ़ते घोटालों की एक और कड़ी है, जिसमें हजारों मध्यमवर्गीय परिवारों की जीवनभर की जमापूंजी दांव पर लगी है।
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