नोएडा सेक्टर-6 फैक्ट्री डकैती-हत्या कांड: नोएडा, न्याय की लंबी लड़ाई के 15 साल बाद नोएडा जिला न्यायालय ने एक चौंकाने वाला फैसला सुनाया है। 14 जून 2011 की वह काली रात, जब सेक्टर-6 स्थित प्रेयर धूप अगरबत्ती प्राइवेट लिमिटेड फैक्ट्री में बदमाशों ने सिक्योरिटी गार्ड वीरेंद्र सिंह पर क्रूर हमला कर उन्हें मौत के घाट उतार दिया और लूटपाट मचाई, अब अनसुलझे सवालों में घिरी हुई है। जिला न्यायालय ने पुलिस की लचर पैरवी और जांच की गंभीर खामियों को रेखांकित करते हुए आरोपी लल्लन कुमार, सुरेंद्र दास और मनोज कुमार को सभी आरोपों से दोषमुक्त कर दिया है। कोर्ट ने संदेह का लाभ देते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष उचित सबूत पेश करने में नाकाम रहा।
वारदात की पूरी कहानी
उस रात बदमाशों ने फैक्ट्री पर धावा बोल दिया। सिक्योरिटी गार्ड वीरेंद्र सिंह ने विरोध करने की कोशिश की तो उनके सिर पर हथौड़े से वार किया गया। गंभीर रूप से घायल वीरेंद्र को अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। बदमाशों ने दो लैपटॉप, दो कंप्यूटर और मोबाइल फोन लूटकर फरार हो गए। पुलिस ने मामले की जांच के बाद तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया और दावा किया कि लूटा गया सामान भी बरामद कर लिया गया है। हालांकि, कोर्ट ने इस पूरे मामले में पुलिस की भूमिका को “पूरी तरह सतही” करार दिया। सबसे बड़ी खामी यह रही कि मुख्य आरोपी गौरव नेपाली, जिस पर गार्ड पर हथौड़े से वार करने का आरोप था, को आज तक गिरफ्तार नहीं किया जा सका।
कोर्ट का फैसला और उठते सवाल
कोर्ट के इस फैसले ने न्याय व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि ये तीन आरोपी निर्दोष हैं, तो वीरेंद्र सिंह की हत्या आखिर किसने की? क्या पुलिस की शुरुआती जांच में सबूतों को मजबूत बनाने की बजाय जल्दबाजी में गिरफ्तारियां की गईं? क्या लूटा गया सामान वाकई बरामद हुआ या सिर्फ कागजों में ही था? पुलिस की लापरवाही ने न केवल परिवार को न्याय से वंचित किया बल्कि अपराधियों को सजा से बचने का मौका भी दे दिया। वीरेंद्र सिंह जैसे आम सुरक्षाकर्मी, जो रात-दिन दूसरों की सुरक्षा के लिए तैनात रहते हैं, खुद सुरक्षा के अभाव में शिकार हो जाते हैं।
परिवार और समाज की प्रतिक्रिया
परिवार के सदस्यों में गुस्सा और निराशा है। उन्होंने पुलिस की जांच पर सवाल उठाते हुए कहा है कि सही दिशा में प्रयास नहीं किए गए। स्थानीय स्तर पर सुरक्षा गार्डों की सुरक्षा और फैक्ट्री क्षेत्रों में निगरानी को लेकर भी चिंता जताई जा रही है। पुलिस अब इस फैसले के बाद मामले की दोबारा जांच करने या नए सिरे से छानबीन करने पर विचार कर रही है, लेकिन 15 साल बीत जाने के बाद सबूतों के नष्ट हो चुके होने की आशंका बनी हुई है। यह मामला उत्तर प्रदेश पुलिस की जांच प्रक्रिया और फॉरेंसिक साक्ष्यों के इस्तेमाल में सुधार की मांग को फिर से मजबूत करता है। नोएडा जैसे औद्योगिक क्षेत्र में ऐसी घटनाएं सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़ी करती हैं। फिलहाल मुख्य आरोपी गौरव नेपाली अब भी फरार है। यदि आपके पास इस मामले से जुड़ी कोई जानकारी हो तो नोएडा पुलिस से संपर्क करें। न्याय की इस लड़ाई में वीरेंद्र सिंह का परिवार अब भी इंसाफ की उम्मीद लगाए बैठा है। यह रिपोर्ट उपलब्ध जानकारी और कोर्ट फैसले पर आधारित है। आगे की जांच के परिणाम आने पर अपडेट किया जाएगा।

