नोएडा/ग्रेटर नोएडा: दिल्ली-एनसीआर में पर्यावरण और नदियों के अस्तित्व को लेकर एक बार फिर बहस छिड़ गई है। नोएडा और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरणों के दावों के विपरीत, यमुना और हिंडन नदी के डूब क्षेत्र (Yamuna-Hindon flooding) में धड़ल्ले से बने अवैध फार्महाउसों ने नदियों के प्राकृतिक बहाव को पूरी तरह से रोक दिया है। आरोप है कि यह जमीन खेती या पर्यावरण संरक्षण के लिए नहीं, बल्कि रसूखदारों के ऐशो-आराम और व्यावसायिक गतिविधियों के लिए घेरी गई है। इस पूरे खेल में स्थानीय प्रशासन और प्राधिकरणों की भूमिका पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
कुछ लोगों तक सिमट कर रह गई ‘स्वच्छ हवा’
विभिन्न सामाजिक और पर्यावरणीय संगठनों का आरोप है कि हिंडन और यमुना के डूब क्षेत्र की सैकड़ों एकड़ जमीन पर अवैध रूप से पक्के निर्माण और आलीशान फार्महाउस खड़े कर दिए गए हैं। संगठनों का कहना है कि:
“प्रकृति और स्वच्छ हवा पर हर नागरिक का समान अधिकार है। लेकिन यहाँ कुछ चुनिंदा प्रभावशाली और अमीर लोगों ने नदियों की जमीन घेरकर पेड़ों के बीच की स्वच्छ हवा को सिर्फ अपने तक सीमित कर लिया है।”
आम जनता जहाँ प्रदूषण और कंक्रीट के जंगल में जीने को मजबूर है, वहीं इन नदी क्षेत्रों पर कब्जा करके निजी विलासिता के केंद्र बना दिए गए हैं।
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बिगड़ रहा है ईको-सिस्टम, बाढ़ का बढ़ा खतरा
विशेषज्ञों के अनुसार, नदियों के डूब क्षेत्र (Floodplain) नदी के फेफड़े होते हैं। ये बाढ़ के पानी को सोखने और भूजल स्तर (Groundwater Level) को बनाए रखने में मदद करते हैं।
- प्राकृतिक बहाव बाधित: अवैध निर्माण के कारण हिंडन और यमुना का प्राकृतिक बहाव क्षेत्र सिकुड़ गया है।
- इको-सिस्टम को भारी नुकसान: यहाँ धड़ल्ले से बोरवेल चलाकर भूजल का दोहन किया जा रहा है और पक्के निर्माण से जमीन की पानी सोखने की क्षमता खत्म हो रही है।
- बाढ़ की विभीषिका: हाल के वर्षों में मानसून के दौरान नोएडा और ग्रेटर नोएडा के डूब क्षेत्रों में आई भीषण बाढ़ इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है, जहाँ अवैध फार्महाउसों के कारण पानी रिहायशी इलाकों की तरफ मुड़ गया था।
प्राधिकरण पर ‘संरक्षण’ देने का आरोप
क्षेत्र में सक्रिय सामाजिक कार्यकर्ताओं और किसान संगठनों का साफ कहना है कि यह सब प्राधिकरण की मिलीभगत के बिना संभव नहीं है। जब भी कोई गरीब या किसान छोटा-मोटा निर्माण करता है, तो प्राधिकरण का बुलडोजर तुरंत पहुंच जाता है। लेकिन इन आलीशान फार्महाउसों पर कार्रवाई के नाम पर केवल “कागजी नोटिस” जारी करके खानापूर्ति कर दी जाती है। संगठनों का आरोप है कि नोएडा और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण इन रसूखदारों को परोक्ष रूप से संरक्षण दे रहे हैं, जिसके कारण इनके हौसले बुलंद हैं।
विभिन्न संगठनों ने बुलंद की मांग: “जल्द हो बुलडोजर कार्रवाई”
लगातार बढ़ रहे अतिक्रमण को देखते हुए अब विभिन्न सामाजिक संगठनों ने आर-पार की लड़ाई का मूड बना लिया है। प्राधिकरण और उत्तर प्रदेश सरकार से मांग की जा रही है कि:
- अवैध निर्माणों का तुरंत धस्तीकरण: नदियों की जमीन को तुरंत खाली कराकर वहाँ व्यापक स्तर पर जन-वानिकी (Public Afforestation) को बढ़ावा दिया जाए।
- जवाबदेही तय हो: जिन अधिकारियों के कार्यकाल में ये अवैध फार्महाउस बने, उन पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
- सार्वजनिक पार्क और ग्रीन बेल्ट: इस जमीन को खाली कराकर इसे आम जनता के लिए ऑक्सीजन हब या जैव विविधता पार्क (Biodiversity Park) के रूप में विकसित किया जाए।
यदि समय रहते हिंडन और यमुना के डूब क्षेत्र को इन ‘भू-माफियाओं’ और रसूखदारों के चंगुल से मुक्त नहीं कराया गया, तो आने वाले समय में नोएडा-ग्रेटर नोएडा को गंभीर जल संकट और पर्यावरणीय आपदा का सामना करना पड़ सकता है। अब देखना यह है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ‘जीरो टॉलरेंस’ के निर्देश के बाद क्या नोएडा और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण इन अवैध फार्महाउसों पर कड़ा एक्शन लेते हैं या फिर यह रसूख तंत्र पर्यावरण पर भारी पड़ता रहेगा।

