प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यूरोपीय यात्रा के दौरान नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) की मीडिया ब्रिफिंग में एक तीखा और यादगार संवाद हुआ। नॉर्वेजियन रिपोर्टर द्वारा भारत की लोकतांत्रिक छवि, प्रेस फ्रीडम और मानवाधिकार रिकॉर्ड पर बार-बार सवाल उठाए जाने पर MEA के सेक्रेटरी (वेस्ट) सिबी जॉर्ज ने करारा जवाब देते हुए भारत की लोकतांत्रिक परंपराओं, संवैधानिक ढांचे और मीडिया परिदृश्य की मजबूती का जोरदार बचाव किया।
घटना प्रधानमंत्री मोदी के नॉर्वे दौरे के संदर्भ में हुई, जहां भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन से पहले मीडिया इंटरैक्शन चल रहा था। एक नॉर्वेजियन महिला पत्रकार ने बार-बार भारत पर सवाल दागे- “दुनिया को भारत पर भरोसा क्यों करना चाहिए?”, प्रेस फ्रीडम, अल्पसंख्यक अधिकारों और प्रधानमंत्री मोदी द्वारा भारतीय मीडिया के सवालों का जवाब न लेने जैसे मुद्दों पर। पत्रकार ने नॉर्वे की दुनिया की सबसे स्वतंत्र प्रेस की रैंकिंग का हवाला भी दिया, जबकि भारत की रैंकिंग 157वें स्थान पर बताई। इस पर सिबी जॉर्ज ने लगभग 17 मिनट लंबा विस्तृत जवाब दिया। उन्होंने कहा कि विदेशी पर्यवेक्षक अक्सर “अज्ञानी एनजीओ रिपोर्ट्स” पर भरोसा करके भारत को गलत समझते हैं। जॉर्ज ने भारत की विशालता, विविधता और 5000 वर्ष पुरानी सभ्यता का जिक्र करते हुए कहा, “भारत 1.4 अरब लोगों का देश है। यहां संस्कृति, भाषा, भोजन और धर्म की अपार विविधता है। लोग एक-दो एनजीओ रिपोर्ट्स पढ़कर सवाल पूछते हैं, लेकिन भारत के पैमाने की कोई समझ नहीं रखते।”
भारत के लोकतंत्र की मजबूती पर जोर
सिबी जॉर्ज ने भारत के संविधान, स्वतंत्र न्यायपालिका, नियमित और निष्पक्ष चुनावों तथा नागरिकों के मौलिक अधिकारों की सराहना की। उन्होंने कहा, “भारत में सरकार बदलने का अधिकार, वोट देने का अधिकार है और यह लगातार हो रहा है। हम इस पर गर्व करते हैं।” उन्होंने महिलाओं के मताधिकार और भारत में सभी धर्मों के लोगों को शरण देने वाली परंपरा का भी उल्लेख किया। विदेशी पत्रकारों द्वारा प्रधानमंत्री मोदी के मीडिया इंटरैक्शन पर उठाए गए सवाल का जवाब देते हुए भारतीय पक्ष ने स्पष्ट किया कि भारतीय मीडिया से सवाल लेना MEA का दायित्व है और यह नियमित रूप से होता है।
एनजीओ रिपोर्ट्स पर तीखी टिप्पणी
जॉर्ज ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया और एनजीओ की रिपोर्टिंग की आलोचना करते हुए कहा कि ये रिपोर्ट्स भारत की जटिलता और वास्तविकता को नजरअंदाज करती हैं। उन्होंने जोर दिया कि भारत में दुनिया का सबसे बड़ा और जीवंत मीडिया इकोसिस्टम मौजूद है, जहां हजारों समाचार चैनल, अखबार और डिजिटल प्लेटफॉर्म स्वतंत्र रूप से काम करते हैं। यह घटना भारत और नॉर्वे के बीच मजबूत द्विपक्षीय संबंधों के बावजूद हुई, जहां दोनों देशों के बीच व्यापार, हरित ऊर्जा, ब्लू इकोनॉमी और जलवायु परिवर्तन जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री मोदी के दौरे में दोनों देशों ने ग्रीन स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप को और मजबूत करने पर जोर दिया।
विदेश मंत्रालय के इस रुख से भारत की स्पष्ट नीति एक बार फिर उभरकर सामने आई है कि वह बाहरी आलोचनाओं को चुनौती देने और अपनी लोकतांत्रिक उपलब्धियों को विश्व पटल पर रखने में पीछे नहीं हटता। यह तनावपूर्ण एक्सचेंज अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की बढ़ती आत्मविश्वासपूर्ण कूटनीति का प्रतीक माना जा रहा है।
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