देश के करोड़ों गरीब परिवारों को इस सप्ताह एक साथ दो बड़े झटके लगे हैं। एक तरफ घरेलू एलपीजी गैस सिलेंडर के दाम बढ़ा दिए गए हैं, तो दूसरी तरफ प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) के तहत मिलने वाली सब्सिडी में भारी कटौती कर दी गई है। केंद्रीय पेट्रोलियम और नेचुरल गैस मंत्रालय ने 7 जून 2026 को एक प्रेस रिलीज जारी कर बताया कि दिल्ली में अब 14.2 किलोग्राम का घरेलू सिलेंडर 942 रुपये में मिलेगा , जो कि पहले से 29 रुपये अधिक है।
सब्सिडी में भारी कटौती — 9 से घटकर हुई सिर्फ 4
सबसे बड़ा और चौंकाने वाला फैसला उज्ज्वला योजना की सब्सिडी को लेकर है। पेट्रोलियम और नेचुरल गैस मंत्रालय की नई प्रेस रिलीज में साफ लिखा गया है कि प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) के लाभार्थियों को अब हर साल केवल पहले चार रिफिल पर ही 300 रुपये प्रति सिलेंडर का डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) मिलेगा। इसका अर्थ यह है कि सालाना कुल 1,200 रुपये की सब्सिडी मिलेगी, और उज्ज्वला लाभार्थी उन चार रिफिल के लिए प्रभावी रूप से 642 रुपये प्रति सिलेंडर का भुगतान करेंगे। इससे पहले की व्यवस्था में उज्ज्वला लाभार्थियों को हर साल 9 सिलेंडर भरवाने पर 300 रुपये प्रति सिलेंडर की दर से सब्सिडी मिलती थी। 9 सिलेंडर के बाद बाकी बचे 3 सिलेंडर वे आम लोगों की तरह बाजार मूल्य पर भरवा सकते थे। यानी पहले जहाँ 9 सिलेंडर पर सब्सिडी मिलती थी, अब केवल 4 पर मिलेगी यह सीधे तौर पर 5 सिलेंडर की सब्सिडी का नुकसान है।
सरकार का तर्क — “औसत खपत सिर्फ 4 सिलेंडर”
सरकार का तर्क है कि उज्ज्वला योजना से जुड़े अधिकांश परिवारों की औसत वार्षिक खपत लगभग चार सिलेंडर ही है, इसी आधार पर सब्सिडी को चार रिफिल तक सीमित करने का निर्णय लिया गया है। सरकार ने यह भी दावा किया कि यह सहायता “अपरिवर्तित” है। लेकिन उपभोक्ता संगठन और विशेषज्ञ इस तर्क से सहमत नहीं हैं। कई उपभोक्ता संगठनों का मानना है कि ग्रामीण और बड़े परिवारों में सालभर में चार से अधिक सिलेंडरों की जरूरत पड़ती है, ऐसे में अतिरिक्त सिलेंडर के लिए पूरी कीमत चुकानी होगी। सरकार के नए फैसले के अनुसार, देश के 10.58 करोड़ से अधिक उज्ज्वला लाभार्थियों को अब साल के पहले चार LPG रिफिल पर ही 300 रुपये प्रति सिलेंडर की सब्सिडी मिलेगी। इसके बाद यदि परिवार अतिरिक्त सिलेंडर लेता है तो उसे सामान्य उपभोक्ताओं की तरह 942 रुपये की पूरी कीमत चुकानी होगी।
प्रेस रिलीज का नाटकीय घटनाक्रम — पहले डिलीट, फिर नई रिलीज
इस पूरे मामले में सरकारी संचार की भारी अव्यवस्था भी सामने आई। पेट्रोलियम और नेचुरल गैस मंत्रालय ने 7 जून को सुबह 5:59 बजे PIB की साइट पर पहली प्रेस रिलीज जारी की, जिसमें सिलेंडर के दाम में 29 रुपये की बढ़ोतरी की बात कही गई थी और उज्ज्वला लाभार्थियों के लिए सिलेंडर 642 रुपये बताया गया था लेकिन थोड़ी देर बाद ही मंत्रालय ने यह प्रेस रिलीज डिलीट कर दी। इसके बाद 7 जून को सुबह 8:02 बजे एक नई प्रेस रिलीज जारी की गई, जिसमें 29 रुपये की बढ़ोतरी का उल्लेख हटा दिया गया और सीधे दिल्ली में आम ग्राहकों के लिए 942 रुपये तथा उज्ज्वला लाभार्थियों के लिए 642 रुपये का उल्लेख किया गया।
उज्ज्वला हेल्पलाइन भी अनजान
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि खुद सरकार की उज्ज्वला हेल्पलाइन (18002666696) को इस बदलाव की जानकारी नहीं दी गई। उज्ज्वला हेल्पलाइन के प्रतिनिधि ने बताया कि उनके पास अभी भी 9 रिफिल सिलेंडर पर सब्सिडी देने का अपडेट है, और सालाना सिर्फ 4 सिलेंडर तक सब्सिडी देने का कोई नया निर्देश उनके पास नहीं आया है। इससे लाखों लाभार्थियों में भ्रम और असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है।
सब्सिडी कटौती का इतिहास — एक नजर में
अक्टूबर 2023 में 14.2 किलोग्राम वाले सिलेंडर पर उज्ज्वला सब्सिडी 200 रुपये से बढ़ाकर 300 रुपये प्रति सिलेंडर की गई थी, लेकिन यह सब्सिडी सालाना 12 सिलेंडर तक सीमित थी। फिर अगस्त 2025 में सरकार ने उज्ज्वला सब्सिडी को 9 सिलेंडर तक सीमित कर दिया। और अब 7 जून 2026 को यह सीमा घटाकर महज 4 सिलेंडर कर दी गई है।
सरकार का बचाव — पड़ोसी देशों से सस्ती है LPG
सरकार ने बताया कि एक सिलेंडर की लागत करीब 1,600 रुपये है, इसलिए हर सिलेंडर पर सरकार को करीब 700 रुपये का घाटा हो रहा है। साथ ही सरकार ने दावा किया कि कीमत बढ़ाने के बाद भी भारत में घरेलू गैस पाकिस्तान, नेपाल, बांग्लादेश और श्रीलंका जैसे पड़ोसी देशों तथा अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा जैसी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं से सस्ती है।
उज्ज्वला योजना क्या है?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2016 में उज्ज्वला स्कीम लॉन्च की थी। इसके तहत लाभार्थियों को मुफ्त LPG गैस कनेक्शन दिया जाता है, जिसमें 14.2 किलोग्राम या 5 किलोग्राम का सिलेंडर, घरेलू प्रेशर रेगुलेटर, सुरक्षा होज पाइप और दो बर्नर वाला स्टोव शामिल हैं। यह योजना मुख्यतः गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाली महिलाओं को ध्यान में रखकर बनाई गई थी, ताकि वे लकड़ी और कोयले की जगह स्वच्छ ईंधन का उपयोग कर सकें।
क्या होगा आगे?
विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले का सबसे बुरा असर उन बड़े ग्रामीण परिवारों पर पड़ेगा जो साल में 4 से अधिक सिलेंडर इस्तेमाल करते हैं। पाँचवें सिलेंडर से उन्हें बिना किसी सब्सिडी के पूरे 942 रुपये खर्च करने होंगे। मंत्रालय ने नई प्रेस रिलीज में लोगों से यह भी अपील की है कि वे घरेलू गैस का जिम्मेदारी से इस्तेमाल करें और खाना पकाने के ऐसे तरीके अपनाएँ जिनसे गैस की खपत कम हो। फिलहाल विपक्षी दल और किसान-श्रमिक संगठन इस फैसले को वापस लेने की माँग कर रहे हैं। मामले पर संसद में भी हंगामे के आसार हैं।

