पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026: दूसरे चरण में हिंसा और आरोपों की छाया, ममता बनर्जी ने भाजपा पर रिगिंग का आरोप लगाया, सुवेंदु अधिकारी का पलटवार; भबानीपुर में हाई-वोल्टेज मुकाबला 

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे और अंतिम चरण में बुधवार को 142 सीटों पर मतदान जारी है। सुबह 9 बजे तक औसतन 18.39 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। इस चरण में कोलकाता, हावड़ा, उत्तर और दक्षिण 24 परगना, नदिया, हुगली तथा पूर्वी बर्धमान जैसे टीएमसी के पारंपरिक गढ़ शामिल हैं। सबसे ज्यादा ध्यान भबानीपुर सीट पर है, जहां मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भाजपा के सुवेंदु अधिकारी के खिलाफ मैदान में हैं। यह 2021 के नंदीग्राम मुकाबले का बदला लेने जैसा माना जा रहा है।  मतदान शुरू होते ही राजनीतिक तनाव चरम पर पहुंच गया। पहले चरण में रिकॉर्ड 93.2 प्रतिशत मतदान के बावजूद हिंसा की घटनाएं देखी गईं। दूसरे चरण में भी कुछ इलाकों में झड़पें और धमकी की शिकायतें आई हैं।

टीएमसी का आरोप: रिगिंग और ‘आतंकवादी’

ममता बनर्जी ने भाजपा पर चुनाव में रिगिंग का गंभीर आरोप लगाया और चुनाव आयोग के पर्यवेक्षकों को ‘आतंकवादी’ करार दिया। उन्होंने दावा किया कि विपक्षी तत्व मतदाताओं को डरा-धमका रहे हैं। टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने केंद्र पर हमला बोलते हुए दावा किया कि करीब 30 लाख मतदाताओं को रोका गया है या उनकी नाम सूची से हटा दिया गया है। उन्होंने मतदाता सूची संशोधन (SIR) प्रक्रिया को निशाना बनाया, जिसमें राज्य में कुल 91 लाख नाम काटे गए थे (जिनमें से कई दुब्लिकेट या मृतक थे, लेकिन करीब 27 लाख विवादित रहे)। टीएमसी का कहना है कि इससे खासकर अल्पसंख्यक और टीएमसी समर्थक प्रभावित हुए हैं।  भबानीपुर में ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि हिंदू मतदाताओं को डराया जा रहा है और ‘गुंडा तत्व’ सक्रिय हैं। उन्होंने कहा कि यह लोकतंत्र पर हमला है।

भाजपा का जवाब: ‘गुंडों’ के साथ ममता, हिंदू मतदाता खतरे में

भाजपा नेता और विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी पर पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि वे ‘गुंडा तत्वों’ के साथ घूम रही हैं और मतदाताओं को धमका रही हैं। उन्होंने भबानीपुर में हिंदू मतदाताओं को धमकी मिलने का दावा किया और उच्च मतदान प्रतिशत की अपील की। अधिकारी ने भविष्यवाणी की कि महिलाएं इस बार ममता को ‘मिटा’ देंगी और भाजपा बंगाल में बदलाव लाएगी। उन्होंने कहा कि यह चुनाव ‘मां-माटी-मानुष’ बनाम ‘सिंडिकेट राज’ का है। भाजपा का तर्क है कि पहले चरण का रिकॉर्ड मतदान (93.2%) टीएमसी के खिलाफ जनता की नाराजगी दर्शाता है। पार्टी ने दक्षिण बंगाल के टीएमसी गढ़ में सेंध लगाने की रणनीति बनाई है।

फलता विवाद और चुनाव आयोग की कार्रवाई

दक्षिण 24 परगना के फलता में तनाव बढ़ गया जब उत्तर प्रदेश कैडर के आईपीएस अधिकारी अजय पाल शर्मा (जिन्हें ‘सिंघम’ कहा जाता है) ने टीएमसी उम्मीदवार जहांगीर खान के घर पहुंचकर चेतावनी दी। वायरल वीडियो में उन्होंने परेशान करने वालों को ‘उचित इलाज’ देने की बात कही, जिसके बाद टीएमसी ने उन्हें ‘भाजपा एजेंट’ बताकर विरोध किया। जहांगीर खान ने जवाब दिया, “अगर वे सिंघम हैं, तो मैं पुष्पा हूं।”चुनाव आयोग ने मामले में त्वरित कार्रवाई की फलता के जॉइंट बीडीओ को निलंबित कर दिया गया और पक्षपात के आरोपों की जांच शुरू की। टीएमसी ने रात में छापेमारी की शिकायत भी की है। यह घटना पूरे दूसरे चरण की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठा रही है।

आम जनता की प्रतिक्रिया और मैदान की हकीकत

मतदान केंद्रों पर पहुंचे आम मतदाताओं में मिश्रित भावनाएं दिख रही हैं। कुछ महिलाएं और युवा उच्च मतदान की बात कर रहे हैं, जबकि कई इलाकों में डर का माहौल है। बंगाल की राजनीति में हमेशा की तरह ‘बूथ कैप्चरिंग’, ‘धमकी’ और ‘रिगिंग’ के आरोप आम हैं। पहले चरण के बाद टीएमसी ने दावा किया कि उसने 100 सीटों का आंकड़ा पार कर लिया है, जबकि भाजपा इसे एंटी-इनकंबेंसी का संकेत बता रही है। मतदाता सूची से लाखों नाम कटने को लेकर सुप्रीम कोर्ट तक मामला पहुंचा था। कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया कि मुस्लिम बहुल इलाकों में डिलीशन ज्यादा हुआ, जिसे टीएमसी ‘राजनीतिक साजिश’ बता रही है। चुनाव आयोग इन आरोपों से इनकार करता है और कहता है कि यह साफ-सुथरी सूची बनाने की प्रक्रिया थी।

क्या दांव पर है?

यह चुनाव ममता बनर्जी के चौथे कार्यकाल और भाजपा के बंगाल में विस्तार का फैसला करेगा। भबानीपुर न सिर्फ प्रतिष्ठा का मुकाबला है, बल्कि पूरे दक्षिण बंगाल की राजनीतिक दिशा तय कर सकता है। मतदान शाम 6 बजे तक चलेगा। परिणाम 4 मई को घोषित होंगे। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि उच्च मतदान और हिंसा-आरोपों का मिश्रण बंगाल की पुरानी ‘कैम्पेन स्टाइल’ को दोहरा रहा है। सुरक्षा बलों की भारी तैनाती के बावजूद तनाव कम नहीं हो रहा। दोनों पक्ष आम जनता से शांतिपूर्ण मतदान की अपील कर रहे हैं, लेकिन आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं।

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