UPSC प्रीलिम्स 2026: चिलचिलाती गर्मी में परीक्षा के कड़े तेवर, क्या कोचिंग संस्थाओं की चांदी काटने के लिए बदला गया पैटर्न?

नई दिल्ली: देश की सबसे प्रतिष्ठित प्रशासनिक सेवा परीक्षा—संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की प्रारंभिक परीक्षा 2026 देश भर के 83 केंद्रों पर संपन्न हो गई। इस साल करीब 8.19 लाख से अधिक अभ्यर्थियों ने 933 रिक्तियों के लिए अपनी किस्मत आजमाई। लेकिन परीक्षा देकर बाहर निकले छात्रों के चेहरों पर मई महीने की झुलसाने वाली गर्मी से ज्यादा, प्रश्नपत्रों के ‘कड़े तेवरों’ की वजह से आया पसीना साफ देखा जा सकता था।

पहली नज़र में देखने पर यह साफ़ हो गया है कि इस बार आयोग ने सामान्य ज्ञान (GS-1) और सीसैट (CSAT) दोनों ही पेपर्स के स्तर को अप्रत्याशित रूप से कठिन और लेंदी (lengthy) बनाकर छात्रों को हैरान कर दिया है। परीक्षा के इस बदलते रुख को देखकर छात्रों और शिक्षाविदों के बीच अब यह गंभीर बहस छिड़ गई है कि क्या यूपीएससी का यह नया ढर्रा जानबूझकर कोचिंग संस्थानों की कमाई और डिमांड बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है?

1. जीएस पेपर-1: फैक्ट्स गायब, ‘एथिक्स और प्रशासनिक निर्णय’ वाले सवालों ने चौंकाया

आमतौर पर माना जाता है कि प्रारंभिक परीक्षा का पहला पेपर पूरी तरह तथ्यात्मक और पारंपरिक अवधारणाओं पर आधारित होता है। लेकिन इस बार इतिहास (20 सवाल), इकॉनमी (19 सवाल) और साइंस एंड टेक (18 सवाल) जैसे बड़े विषयों में सीधे सवाल पूछने के बजाय बेहद पेचीदा और एप्लिकेटिव सवाल पूछे गए।

  • एथिक्स स्टाइल के सवाल: विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स और कोचिंग एक्सपर्ट्स (जैसे विजन आईएएस और दृष्टि आईएएस) के अनुसार, इस साल जीएस पेपर-1 में कई ऐसी सिचुएशनल (परिस्थिति-आधारित) और डिसीजन-मेकिंग वाले प्रश्न पूछे गए, जो आमतौर पर मुख्य परीक्षा (Mains) के ‘एथिक्स’ (GS-4) पेपर का हिस्सा होते हैं।
  • कथन और कारण (Assertion-Reasoning): इस बार ‘केवल एक सही’, ‘केवल दो सही’ वाले विकल्पों के साथ-साथ तीन-तीन कथनों वाले असर्शन-रीजनिंग प्रश्नों की संख्या बढ़ा दी गई, जिससे एलिमिनेशन तकनीक (विकल्पों को छांटने की विधि) लगभग नाकाम साबित हुई। डिजिटल बैंकिंग, फिनटेक और स्पेस टेक्नोलॉजी से जुड़े गहरे तकनीकी सवालों ने सामान्य पृष्ठभूमि के छात्रों के पसीने छुड़ा दिए।

2. सीसैट (CSAT) पेपर-2: राशि में कठिनतम बदलाव, गणित के जाल में उलझे छात्र

दोपहर की पाली में हुआ सीसैट का पेपर उन छात्रों के लिए ‘कौतुक’ और ‘कष्ट’ दोनों लेकर आया, जो इसे केवल एक क्वालिफाइंग (33% अंक) पेपर मानकर हल्के में लेते हैं। पिछले सालों (2024 और 2025) की तुलना में 2026 का सीसैट काफी कठिन और समय लेने वाला रहा।

  • मैथ्स और क्वांट का बढ़ा दबदबा: इस बार क्वांटिटेटिव एप्टीट्यूड (गणित) से अकेले करीब 37 सवाल पूछे गए, जो न सिर्फ गणना में लंबे (calculation-heavy) थे बल्कि उनमें एक ही सवाल के भीतर कई कॉन्सेप्ट्स का मिश्रण था।
  • कॉम्प्रिहेंशन में कटौती: छात्रों के लिए सबसे बड़ा झटका यह रहा कि रीडिंग कॉम्प्रिहेंशन (गद्यांश) के सवाल घटाकर केवल 23 के आसपास कर दिए गए। गद्यांश छोटे होने के बजाय बेहद लंबे और दार्शनिक थे, जिन्हें पढ़ने में छात्रों का काफी समय बर्बाद हुआ।
  • नया सरप्राइज: यूपीएससी के इतिहास में पहली बार ‘कम्युनिकेशन’ (संचार कौशल) से जुड़े व्यावहारिक सवाल शामिल किए गए, जिसकी उम्मीद छात्रों को बिल्कुल नहीं थी।

3. क्या परीक्षा का नया पैटर्न ‘कोचिंग माफिया’ को फायदा पहुँचाने की चाल है?

इस परीक्षा के बाद इंटरनेट मीडिया और परीक्षा केंद्रों के बाहर छात्रों के बीच सबसे बड़ा असंतोष इस बात को लेकर दिखा कि यूपीएससी अब धीरे-धीरे सेल्फ़-स्टडी (खुद से पढ़ाई) करने वाले गरीब या ग्रामीण पृष्ठभूमि के छात्रों के दायरे से बाहर होती जा रही है।

छात्रों और विशेषज्ञों का तर्क: “जब यूपीएससी बुनियादी किताबों (जैसे NCERT या लक्ष्मीकांत) से सीधे सवाल पूछना बंद कर देती है और ऐसे सवाल लाती है जिनके लिए कॉरपोरेट स्तर की केस स्टडीज और वित्तीय बाजारों (AIF, स्टॉक मार्केट) की गहरी समझ चाहिए, तो छात्र मजबूरन महंगे कोचिंग संस्थानों की तरफ भागता है।”

पेपर के इस ‘अति-आधुनिक और विश्लेषणात्मक’ रूप को देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि प्रश्नपत्र बनाने वाले लोग अनजाने में या अप्रत्यक्ष रूप से बड़े कोचिंग दिग्गजों का बाजार गर्म कर रहे हैं। जिस तरह के सिचुएशनल सवाल पूछे गए, उन्हें हल करने की ‘ट्रिक्स’ और ‘मॉक टेस्ट सीरीज़’ बेचने के नाम पर अब कोचिंग संस्थान अपनी फीस और डिमांड में भारी इजाफा करेंगे।

4. ऐतिहासिक रिफॉर्म: पारदर्शिता की ओर एक कदम

भले ही पेपर कठिन था, लेकिन इस बार यूपीएससी ने 2026 चक्र से एक बड़ा ऐतिहासिक सुधार भी लागू किया है। आयोग परीक्षा समाप्त होने के तुरंत बाद प्रोविजनल आंसर-की (Provisional Answer Key) जारी कर रहा है, और छात्रों को 31 मई 2026 तक तीन प्रामाणिक स्रोतों के साथ आपत्ति (Objection) दर्ज कराने का मौका दिया गया है। इसके अलावा परीक्षा केंद्रों पर फर्जीवाड़े को रोकने के लिए एआई (AI) आधारित फेस ऑथेंटिकेशन का इस्तेमाल किया गया।

निष्कर्ष और संभावित कट-ऑफ

चूंकि दोनों ही प्रश्नपत्र कठिन, लंबे और लीक से हटकर थे, विशेषज्ञों (जैसे नेक्स्ट आईएएस और वाजीराम) का मानना है कि इस साल प्रारंभिक परीक्षा की कट-ऑफ पिछले सालों की तुलना में काफी कम रहने की उम्मीद है। बहरहाल, इस परीक्षा ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि यूपीएससी को ‘अनप्रेडिक्टेबल पब्लिक सर्विस कमीशन’ क्यों कहा जाता है, लेकिन इसके इस अप्रत्याशित स्वभाव की सबसे बड़ी कीमत उन लाखों मध्यमवर्गीय छात्रों को चुकानी पड़ रही है जो बिना कोचिंग के इस दुर्गम किले को फतह करने का सपना देखते हैं।

 

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