नोएडा में अनधिकृत यूनिपोलों का ‘मौत का जाल’: टेम्पो चालक घायल, आश्रय को गृहमंत्री से लगी आस , प्राधिकरण पर उठ रहें गंभीर सवाल

नोएडा में अनधिकृत और असुरक्षित यूनिपोल विज्ञापन संरचनाओं का मामला एक बड़े राजनीतिक और प्रशासनिक विवाद का रूप ले चुका है। 4 जून को एक यूनिपोल के गिरने से एक टेम्पो चालक के गंभीर रूप से घायल होने के बाद समाजवादी पार्टी के नोएडा महानगर अध्यक्ष डॉ. आश्रय गुप्ता ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर तत्काल ऑडिट और कार्रवाई की मांग की है। इस घटना ने एक बार फिर नोएडा प्राधिकरण की कार्यप्रणाली और विज्ञापन माफिया की सांठगांठ पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

घटना: फुटपाथ पर गिरा यूनिपोल, टेम्पो चालक गंभीर रूप से घायल

4 जून 2026 को नोएडा में एक फुटपाथ के निकट स्थापित यूनिपोल अचानक गिर पड़ा। इस हादसे की चपेट में आने से एक टेम्पो चालक गंभीर रूप से घायल हो गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार यह यूनिपोल पहले से ही असंतुलित अवस्था में था, और न तो इसकी नींव पर्याप्त मजबूत थी और न ही इसकी कोई सुरक्षा जांच की गई थी। यह घटना उस दिन हुई जब नोएडा और आसपास के क्षेत्रों में तेज आंधी-तूफान ने दस्तक दी थी नोएडा और ग्रेटर नोएडा में 4 जून को अचानक मौसम बदल गया, तेज आंधी और मूसलाधार बारिश ने पूरे शहर की रफ्तार थाम दी और कई इलाकों में पेड़, यूनिपोल और बिजली के खंभे गिर गए। इसी अराजक स्थिति में यह हादसा हुआ। ग्रेटर नोएडा के दादरी थाना क्षेत्र में एनएच-91 पर भी उसी दिन विकास प्राधिकरण का एक विशाल बोर्ड गिर पड़ा, जिससे हाईवे पर लंबा जाम लग गया और एक लग्जरी कार क्षतिग्रस्त हो गई। यानी अकेले 4 जून को नोएडा-ग्रेटर नोएडा में कई स्थानों पर विज्ञापन संरचनाएं ध्वस्त हुईं, यह महज संयोग नहीं, बल्कि व्यवस्था की विफलता का प्रमाण है।

सपा का पत्र: गृहमंत्री तक पहुंचा मामला

घटना के ठीक दो दिन बाद, 6 जून 2026 को समाजवादी पार्टी के नोएडा महानगर अध्यक्ष डॉ. आश्रय गुप्ता (बीडीएस) ने क्रमांक 798/26 के तहत केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को एक विस्तृत पत्र लिखा। पत्र में उन्होंने स्पष्ट किया कि नोएडा में पिछले कई महीनों से बड़ी संख्या में अनधिकृत यूनिपोल स्थापित किए जा रहे हैं — विशेषकर एलिवेटेड रोड (सेक्टर 18 से सेक्टर 59 तक), कालिंदी कुंज ब्रिज और सेक्टर 75, 76, 51, 62, 34, 70 जैसे इलाकों में। डॉ. गुप्ता ने पत्र में एक चौंकाने वाला खुलासा भी किया कुछ ऐसे सार्वजनिक स्थान जो पहले शौचालय (यूरिनल) निर्माण के लिए आवंटित थे और जिनके लिए टेंडर भी स्वीकृत हो चुके थे, उन्हें यूनिपोल विज्ञापन स्थलों में बदल दिया गया। यह प्रशासनिक भ्रष्टाचार और जनसुविधाओं की कीमत पर निजी मुनाफे का स्पष्ट उदाहरण है।

पत्र में छह सूत्रीय मांगें रखी गई हैं:

नोएडा में सभी यूनिपोलों का तत्काल ऑडिट एवं संरचनात्मक सुरक्षा जांच, सभी अनधिकृत व असुरक्षित संरचनाओं को हटाना, जिम्मेदार अधिकारियों व ठेकेदारों की भूमिका की जांच, विज्ञापन एवं सुरक्षा नियमों का सख्त पालन, भ्रष्टाचार व लापरवाही पर कड़ी कार्रवाई, यूनिपोल गिरने की घटनाओं में संबंधित ठेकेदार और अधिकारियों के विरुद्ध तत्काल एफआईआर, यह पत्र मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, औद्योगिक मंत्री नंद गोपाल नंदी, नोएडा व ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के सीईओ, पुलिस आयुक्त और जिलाधिकारी गौतम बुद्ध नगर को भी प्रेषित किया गया है।

नोएडा में यूनिपोल की समस्या: नई नहीं है यह लड़ाई

यह पहली बार नहीं है जब नोएडा में यूनिपोलों के खतरे ने सुर्खियां बटोरी हों। कुछ वर्ष पहले सेक्टर 18 में एक यूनिपोल गिरने से एक व्यक्ति की मौत हो गई थी, जिसके बाद नोएडा प्राधिकरण ने सड़क किनारे यूनिपोल लगाने पर सख्त प्रतिबंध लगाया था और अनधिकृत होर्डिंग के खिलाफ अभियान भी चलाया था। लेकिन कुछ दिनों की सख्ती के बाद प्राधिकरण ढीला पड़ गया और होर्डिंग माफिया फिर सक्रिय हो गया। एक पुराने मामले में जब सेक्टर 62 में एक यूनिपोल गिरकर कार को बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर चुका था, तब नोएडा प्राधिकरण ने पूरे शहर में यूनिपोलों का निरीक्षण करने और उनकी नींव की स्थिरता जांचने का निर्णय लिया था। उस समय शहर में 43 अनुमति प्राप्त और 133 सार्वजनिक शौचालयों पर लाइसेंसधारी यूनिपोल दर्ज थे लेकिन अनधिकृत संरचनाओं की संख्या इससे कहीं अधिक थी।

देश भर में ‘विज्ञापन माफिया’ का कहर — नोएडा भी अछूता नहीं

देश में अनधिकृत होर्डिंग और यूनिपोल की त्रासदी कोई नई बात नहीं। मई 2024 में मुंबई के घाटकोपर में एक विशाल अनधिकृत होर्डिंग के गिरने से 17 लोगों की जान गई थी और 80 से अधिक घायल हुए थे। उस घटना के बाद महाराष्ट्र सरकार ने जस्टिस दिलीप भोसले की अध्यक्षता में एक समिति गठित की, जिसकी रिपोर्ट के आधार पर नई होर्डिंग नीति बनाई जा रही है जिसमें 40×40 फीट से बड़े होर्डिंग पर रोक का प्रावधान है। लेकिन उत्तर प्रदेश में ऐसी कोई नीतिगत पहल नजर नहीं आ रही।

प्राधिकरण की लापरवाही पर उठे सवाल

नोएडा प्राधिकरण की अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी वंदना त्रिपाठी ने मई 2026 में ही उद्यान विभाग की समीक्षा करते हुए सौंदर्यीकरण और निर्माण कार्यों में देरी पर नाराजगी जताई थी और मानसून से पहले आवश्यक तैयारियों में तेजी लाने के स्पष्ट निर्देश दिए थे, इसके बावजूद जमीनी स्तर पर काम नदारद रहा। यह लापरवाही अब यूनिपोल हादसों के रूप में सामने आ रही है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि नोएडा में विज्ञापन व्यवसाय और राजनीतिक संरक्षण की मिलीभगत के बिना इतने बड़े पैमाने पर अनधिकृत यूनिपोल संभव नहीं। शौचालय भूमि पर यूनिपोल का मामला तो भ्रष्टाचार की हद को और उजागर करता है।

आगे क्या?

डॉ. आश्रय गुप्ता ने स्पष्ट कहा है कि यदि केंद्र और राज्य सरकार ने शीघ्र हस्तक्षेप नहीं किया तो समाजवादी पार्टी इस मुद्दे पर बड़ा जन-आंदोलन करेगी। उन्होंने घटनास्थल के फोटो और स्थान विवरण भी पत्र के साथ संलग्न किए हैं। फिलहाल नोएडा प्राधिकरण, पुलिस और विज्ञापन विभाग की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। सवाल यह है कि क्या एक टेम्पो चालक के खून से लाल हुई सड़क इस प्रशासनिक नींद को तोड़ पाएगी या फिर कुछ दिनों की हलचल के बाद मामला ठंडे बस्ते में चला जाएगा, जैसा अतीत में होता आया है?

यह भी पढ़ें: ग्रेटर नोएडा में सुपरटेक इको विलेज-3 का जल संकट, 1800 परिवार पानी के लिए तरस रहे

यहां से शेयर करें