The Noida-Greater Noida e-bus scam: कंडक्टर अपना QR दिखाकर यात्रियों से वसूल रहे किराया, सरकार को करोड़ों का चूना

The Noida-Greater Noida e-bus scam: नोएडा/ग्रेटर नोएडा। प्रदूषण मुक्त परिवहन और बेहतर पब्लिक ट्रांसपोर्ट के नाम पर शुरू की गई उत्तर प्रदेश रोडवेज की नई ई-बसों में अब बड़ा घोटाला सामने आ रहा है। ड्राइवर और कंडक्टर की मिलीभगत से यात्रियों से किराया तो वसूला जा रहा है, लेकिन आधिकारिक ऑनलाइन टिकट या क्यूआर टिकट जारी नहीं किए जा रहे। कंडक्टर अपना निजी मोबाइल फोन का QR कोड दिखाकर पैसे ले रहे हैं और उन्हें अपने खाते में डाल रहे हैं। इससे सरकार को प्रतिदिन हजारों और लंबे समय में करोड़ों रुपये का नुकसान हो रहा है।

31 अगस्त 2026 को एक यात्री ने एक्सप्रेसवे जीरो पॉइंट से बॉटनिकल गार्डन तक की यात्रा का अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि शाम करीब 6 बजे बैटरी संचालित बस संख्या UP80KT4582 में सवार हुए। बस पूरी भरी हुई थी और 25-30 यात्री खड़े होकर सफर कर रहे थे। कंडक्टर को 100 रुपये का नोट दिया गया तो उन्होंने 80 रुपये वापस किए और कहा कि 30 रुपये की जगह 20 रुपये ही लिए हैं। टिकट मांगने पर कंडक्टर ने कहा कि टिकट मशीन का सर्वर डाउन है। इसके बाद उन्होंने अपना निजी फोन का QR कोड दिखाकर यात्रियों से पैसे वसूलना जारी रखा। नकद देने वाले यात्रियों को भी कोई टिकट नहीं दिया गया। बस नॉन-स्टॉप बॉटनिकल गार्डन पहुंची, वहां यात्रियों को उतारा और तुरंत फिर से परी चौक के लिए सवारियां भरकर 6:40 बजे प्रस्थान कर गई। नियमित यात्रियों का कहना है कि यह खेल रोजाना चल रहा है। कंडक्टर इसी तरीके से सरकार को चूना लगाकर हजारों रुपये प्रतिदिन कमा रहे हैं। यात्री लगातार सवाल उठा रहे हैं कि क्या इसमें प्राधिकरण या संबंधित अधिकारियों की भी मिलीभगत है?

बसें रुकती नहीं, ट्रैकिंग भी नहीं
इस घोटाले के अलावा ई-बसों के संचालन में कई अन्य गंभीर समस्याएं भी बनी हुई हैं। ढाई महीने बीत जाने के बावजूद तय स्टॉपेज नहीं बने हैं और लाइव ट्रैकिंग सिस्टम शुरू नहीं हुआ है। नतीजा यह है कि व्यस्त मेट्रो स्टेशनों और सेक्टरों में यात्री हाथ हिलाते रह जाते हैं, लेकिन खाली ई-बसें बिना रुके निकल जाती हैं। सेक्टर-37 में दोपहर के समय 20-25 यात्री इंतजार कर रहे थे। खाली ई-बस आई, लेकिन ड्राइवर ने ब्रेक तक नहीं लगाया। सेक्टर-52 मेट्रो स्टेशन पर सैकड़ों लोग ई-बस का इंतजार करते हैं, लेकिन बसें या तो नहीं रुकतीं या अपनी मर्जी से कहीं भी रुक जाती हैं।फोनरवा अध्यक्ष योगेंद्र शर्मा ने कहा, “हम सालों से पब्लिक ट्रांसपोर्ट की मांग कर रहे थे। सरकार ने बसें दे दीं, लेकिन चलाने का सिस्टम नहीं दिया। यही हाल रहा तो लोग फिर ऑटो पर निर्भर हो जाएंगे।”

सिस्टम कहां फेल हो रहा है?
अथॉरिटी ने वादा किया था कि नोएडा में 40 जगहों पर स्टॉपेज बनेंगे, लेकिन अभी तक सिर्फ अनुमान तैयार हुआ है। काम शुरू होने में और डेढ़ महीने लग सकते हैं। लाइव ट्रैकिंग के लिए कहा गया था कि 15 दिन में GPS लगाकर सिस्टम चालू हो जाएगा, लेकिन फाइलें अभी भी दौड़ रही हैं। नोएडा अथॉरिटी के जीएम (सिविल) एसपी सिंह ने बताया कि स्टॉपेज बनाने का अनुमान तैयार हो गया है और काम जल्द शुरू होगा। लाइव ट्रैकिंग सिस्टम यूपीएसआरटीसी तैयार कर रही है। इसके शुरू होने के बाद बस के रूट, स्टॉपेज पर रुकने का समय और निर्धारित मार्ग से चलने का पूरा रिकॉर्ड उपलब्ध होगा।

यात्रियों और विशेषज्ञों की मांग
यात्री और स्थानीय लोग परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह से मांग कर रहे हैं कि जिस तरह उत्तर प्रदेश रोडवेज की बसों की आकस्मिक चेकिंग के लिए एटीआई नियुक्त किए गए हैं, उसी तरह इन ई-बसों की नियमित और सख्त चेकिंग की व्यवस्था की जाए। बिना निगरानी के ड्राइवर और कंडक्टर मनमानी करते रहेंगे और सरकारी संसाधन बर्बाद होते रहेंगे। ई-बसों का मकसद प्रदूषण कम करना और आम लोगों को सस्ता-सुविधाजनक परिवहन उपलब्ध कराना था। लेकिन निगरानी की कमी और कर्मचारियों की मनमानी से यह सिस्टम खुद ही सवालों के घेरे में आ गया है। अब देखना यह है कि प्रशासन कितनी तेजी से कार्रवाई करता है।

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