आव्यान मौत मामले की जांच रिपोर्ट में जल विभाग के तीन अधिकारी दोषी, शासन को भेजी जाएगी रिपोर्ट

ग्रेटर नोएडा के नॉलेज पार्क-2 स्थित कलाधाम सोसाइटी (Kaladham Society )में छह वर्षीय आव्यान की गड्ढे में डूबने से हुई मौत की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। प्राधिकरण की दो सदस्यीय जांच समिति ने अपनी 10 पृष्ठों की रिपोर्ट एसीईओ सुनील कुमार सिंह को सौंप दी है। रिपोर्ट में जल विभाग के वरिष्ठ प्रबंधक, प्रबंधक और सहायक प्रबंधक की लापरवाही स्पष्ट रूप से सामने आई है। अब यह रिपोर्ट ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के सीईओ रवि कुमार एनजी के माध्यम से शासन को भेजी जाएगी।

ओएसडी अभिषेक पाठक की अगुवाई में हुई जांच

वरिष्ठ पीसीएस अधिकारी एवं ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के ओएसडी अभिषेक पाठक के नेतृत्व में गठित जांच समिति ने पूरे मामले की विस्तृत जांच की। जांच में पाया गया कि जिस नलकूप (ट्यूबवेल) की स्थापना ग्रीन बेल्ट क्षेत्र में की जानी थी, उसे निर्धारित स्थान पर स्थापित करने के बजाय ठेकेदार ने बिना किसी पूर्व अनुमति के सोसाइटी परिसर के भीतर ही बोरिंग का कार्य शुरू करा दिया।

बिना अनुमति बदला गया नलकूप का स्थान

रिपोर्ट के अनुसार, नलकूप के स्थान में बदलाव के लिए प्राधिकरण से कोई औपचारिक मंजूरी नहीं ली गई। इतना ही नहीं, इस परिवर्तन की जानकारी भी संबंधित विभागीय अधिकारियों को नहीं दी गई। नियमों की अनदेखी करते हुए किए गए इस कार्य के कारण सुरक्षा मानकों का पालन नहीं हो सका, जिसके चलते यह दुखद हादसा हुआ।

जल विभाग के तीन अधिकारियों पर लापरवाही का आरोप

जांच रिपोर्ट में जल विभाग के वरिष्ठ प्रबंधक, प्रबंधक और सहायक प्रबंधक की कार्य में लापरवाही को हादसे का प्रमुख कारण माना गया है। समिति ने अपनी रिपोर्ट में विभागीय जवाबदेही तय करते हुए संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की है।

शासन को भेजी जाएगी रिपोर्ट

प्राधिकरण प्रशासन अब इस जांच रिपोर्ट को सीईओ रवि कुमार एनजी के माध्यम से उत्तर प्रदेश शासन को भेजेगा। शासन स्तर पर रिपोर्ट का परीक्षण होने के बाद दोषी अधिकारियों और संबंधित पक्षों के खिलाफ आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

कलाधाम सोसाइटी में हुए इस हादसे ने निर्माण कार्यों के दौरान सुरक्षा मानकों और प्राधिकरण की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि नियमों का पालन किया गया होता और निर्माण स्थल को सुरक्षित बनाया गया होता, तो मासूम आव्यान की जान बचाई जा सकती थी।

 

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