नई दिल्ली। अमेरिका-इस्राइल और ईरान के बीच जारी युद्ध ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में भूचाल ला दिया है। 28 फरवरी 2026 से होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों की आवाजाही लगभग ठप हो गई है, जिससे दुनिया के करीब 20 फीसदी तेल और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति बाधित हो गई है। इस संकट ने एशिया के कई देशों में पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों को आसमान पर पहुंचा दिया है। लेकिन भारत में तस्वीर बिल्कुल अलग है — यहाँ पेट्रोल और डीजल की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं।
एशिया पर भारी पड़ा होर्मुज संकट
अमेरिका और इस्राइल के इस युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य के प्रभावी रूप से बंद हो जाने से अब तक का सबसे बड़ा तेल आपूर्ति संकट उत्पन्न हुआ है। इससे प्रतिदिन करीब 1.2 से 1.5 करोड़ बैरल कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित हो रही है। चीन, भारत, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे एशियाई देश इस संकट से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं, क्योंकि ये देश होर्मुज से गुजरने वाले तेल और एलएनजी के 75 फीसदी से अधिक आयातक हैं। संघर्ष शुरू होने से पहले अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल करीब 70 डॉलर प्रति बैरल था, जो कभी-कभी 119 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। 15 अप्रैल तक ब्रेंट क्रूड 96-97 डॉलर और अमेरिकी क्रूड WTI 90 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा था।
22 अप्रैल को खत्म हो रहा है युद्धविराम
अमेरिका और ईरान के बीच दो सप्ताह का युद्धविराम 22 अप्रैल को समाप्त हो रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर होर्मुज को फिर से खोलने पर कोई स्थायी समझौता भी होता है, तो तेल आपूर्ति को सामान्य स्तर पर लौटने में कई महीने लग सकते हैं। खाड़ी में 230 से अधिक भरे हुए तेल टैंकर फंसे पड़े हैं।
भारत में क्यों नहीं बढ़े दाम?
भारत में पेट्रोल की कीमतें इस महीने काफी हद तक अपरिवर्तित रही हैं। आज 20 अप्रैल को मुंबई में पेट्रोल का भाव 103.50 रुपये प्रति लीटर है। इसके पीछे सरकार की नीति सबसे बड़ा कारण है। अप्रैल 2022 के बाद से पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतें अपरिवर्तित हैं। इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी सरकारी कंपनियां अंतरराष्ट्रीय कीमतें ऊंची होने पर नुकसान उठाती हैं और कम होने पर लाभ कमाती हैं। तेल विपणन कंपनियां (OMCs) अभी युद्धविराम की स्थायित्व का आकलन कर रही हैं, इसलिए खुदरा ईंधन कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। सरकार ने संकेत दिया है कि जब तक कच्चे तेल की कीमतें बेहद तेजी से नहीं बढ़तीं, तब तक उपभोक्ताओं को राहत देना जारी रखा जाएगा।
आगे क्या?
यदि अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे बनी रहती हैं, तो आने वाले हफ्तों में भारतीय उपभोक्ताओं को पेट्रोल-डीजल के दामों में कमी देखने को मिल सकती है। फिलहाल, जहां पूरा एशिया ऊर्जा संकट की मार झेल रहा है, वहीं भारत सरकार की नीति के चलते आम आदमी को राहत मिली हुई है।

