ऐतिहासिक उड़ान तो भरी, पर उतरने के बाद कहाँ जाएं? — जेवर एयरपोर्ट पर टैक्सी-कनेक्टिविटी की बड़ी चुनौती

ग्रेटर नोएडा। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर) आज इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया। 15 जून 2026 को इंडिगो की फ्लाइट 6E-2278 लखनऊ के चौधरी चरण सिंह इंटरनेशनल एयरपोर्ट से उड़कर जेवर पहुंची और इसी के साथ यहाँ से व्यावसायिक उड़ान सेवाओं का आगाज हो गया। फ्लाइट आगे बेंगलुरु के लिए रवाना हुई।

किसानों ने लिखा इतिहास

इस ऐतिहासिक पल की सबसे भावुक कहानी उन किसानों की रही जिनकी ज़मीन पर यह एयरपोर्ट बना। जेवर क्षेत्र के करीब 170 किसान — जिनमें 20 महिलाएं भी शामिल थीं — जिन्होंने स्वेच्छा से अपनी पुश्तैनी जमीन एयरपोर्ट निर्माण के लिए दी थी, वे लखनऊ जाने वाली उद्घाटन उड़ान में सवार हुए। वहाँ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उनका स्वागत किया। इन परिवारों के हाथों में बोर्डिंग पास देखकर भावनाएं उफान पर थीं — जो खेत कभी उनकी रोज़ी-रोटी थे, आज वहाँ से विमान आसमान में उड़ रहे थे। यमुना प्राधिकरण के अधिकारी भी इस ऐतिहासिक यात्रा के साक्षी बने और किसानों के साथ पहली उड़ान में शामिल हुए।

यात्रियों को राहत, लेकिन जमीन पर परेशानी

यात्रियों ने एयरपोर्ट की आधुनिकता और दिल्ली की ट्रैफिक से राहत पर खुशी जताई। एक यात्री ने कहा कि दिल्ली एयरपोर्ट जाने में जहाँ घंटों लगते थे, यहाँ बिना ट्रैफिक पहुंचना सुखद अनुभव रहा। लेकिन उत्साह के बीच एक बड़ी चुनौती भी सामने आई — एयरपोर्ट से बाहर निकलने के बाद कहाँ जाएं? लखनऊ से आई फ्लाइट के यात्रियों को ग्रेटर नोएडा, दिल्ली और अन्य स्थानों तक जाने के लिए टैक्सी न मिलने पर भटकना पड़ा। ऐप-बेस्ड कैब सेवाओं की उपलब्धता पर्याप्त नहीं रही और कई यात्री परेशान दिखे।

भविष्य की कनेक्टिविटी — योजनाएं बड़ी, अभी इंतजार

भविष्य में इस एयरपोर्ट को देश के सबसे आधुनिक मल्टी-मॉडल ट्रांसपोर्ट हब के रूप में विकसित किया जाएगा, जहाँ रैपिड रेल, बुलेट ट्रेन, मेट्रो, भारतीय रेलवे और पॉड टैक्सी की कनेक्टिविटी होगी। योजना के तहत दिल्ली के सराय काले खां से यात्री करीब 21 मिनट में नोएडा एयरपोर्ट पहुंच सकेंगे। 72 किलोमीटर लंबे गाजियाबाद-जेवर नमो भारत कॉरिडोर को मंजूरी मिल चुकी है, लेकिन यह अभी निर्माणाधीन है। एक्वा लाइन मेट्रो और नमो भारत ट्रेन का विस्तार सीधे जेवर एयरपोर्ट तक किया जाएगा। फिलहाल हवाई अड्डे पर कैब के लिए अलग पिक-अप और ड्रॉप-ऑफ स्टैंड तैयार किए गए हैं, मगर पहले ही दिन मांग के मुकाबले आपूर्ति कम नज़र आई।

 

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