नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को स्पष्ट कर दिया कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान इस्तेमाल किए गए संशोधित फॉर्म-6 को कोर्ट ने कभी मंजूरी नहीं दी थी। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जोयमल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की।
“हमने संशोधित फॉर्म-6 को मंजूरी नहीं दी, यह स्पष्ट कर दें” — CJI सूर्यकांत ने सुनवाई के दौरान कहा। उन्होंने यह भी कहा कि रिकॉर्ड पेश होने पर कोर्ट यह देखेगा कि फॉर्म में बदलाव किसने किया। यह टिप्पणी महत्वपूर्ण इसलिए है क्योंकि चुनाव आयोग ने 26 सितंबर को जारी एक प्रेस नोट में दावा किया था कि फॉर्म-6 से जुड़ी घोषणा को सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी हासिल है। कोर्ट ने अब इस दावे का खंडन करते हुए कहा कि मई में आए बिहार SIR फैसले में अदालत के पास संशोधित घोषणा की जांच का कोई अवसर ही नहीं था, क्योंकि यह उस फैसले के बाद जोड़ी गई थी।
याचिकाओं में क्या मांगें?
कोर्ट के सामने दो प्रमुख याचिकाएं आईं — एक पटना निवासी राकेश कुमार सिंह की ओर से, दूसरी दिल्ली के वकील शैलेन्द्र मणि त्रिपाठी की ओर से। राकेश कुमार सिंह की याचिका में संविधान के अनुच्छेद 324 का हवाला देते हुए कहा गया कि चुनावों का अधीक्षण और नियंत्रण अकेले CEC में नहीं बल्कि पूरे आयोग में निहित है। याचिका में ज्ञानेश कुमार के खिलाफ क्वो वारंटो रिट, SIR प्रक्रिया को शुरू से अवैध घोषित करने और उन्हें अंतरिम रूप से निलंबित करने की मांग की गई। दूसरी याचिका में इंडियन एक्सप्रेस की एक जांच रिपोर्ट का हवाला देते हुए स्वतंत्र न्यायिक जांच आयोग या सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट जज की अध्यक्षता वाली SIT के गठन की मांग की गई है। इसमें ज्ञानेश कुमार के अलावा वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त मनीष गर्ग और महानिदेशक (आईटी) सीमा खन्ना के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की गई है।
कोर्ट में क्या हुआ?
वरिष्ठ अधिवक्ता विकाश सिंह ने याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी कि मतदाताओं में अपने अधिकार को लेकर असुरक्षा की भावना है और कोर्ट को अंतरिम आदेश पारित करने चाहिए। हालांकि पीठ ने स्पष्ट किया कि पहले जवाब सुने बिना कोई एकतरफा फैसला नहीं लिया जाएगा। न्यायमूर्ति बागची ने सवाल उठाया कि क्या कोर्ट बिना सबूत के यह मान सकता है कि सभी फैसले एकतरफा लिए गए। पीठ ने केंद्र सरकार, चुनाव आयोग, ज्ञानेश कुमार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू, विवेक जोशी, मनीष गर्ग और सीमा खन्ना को नोटिस जारी कर जवाब मांगा और अंतरिम निलंबन की मांग को फिलहाल अस्वीकार कर दिया।
पृष्ठभूमि
यह विवाद इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के बाद बढ़ा, जिसमें दावा किया गया था कि आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने बीते कई महीनों में SIR से जुड़े कई फैसलों पर लिखित आपत्ति दर्ज की थी, यह कहते हुए कि कुछ निर्णय उनकी सहमति के बिना आयोग के नाम पर जारी किए गए। चुनाव आयोग का रुख रहा है कि सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए गए। मामला आगे की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध रहेगा, जब पक्षकारों के जवाब के आधार पर कोर्ट यह तय करेगा कि विवादित फैसले सामूहिक रूप से लिए गए थे या नहीं।

